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गढ़ी कैंट बोर्ड में डॉक्टर भर्ती पर घमासान, नियम बदलकर चहेती नियुक्ति के आरोप

कर्मचारी की बेटी को नौकरी दिलाने के लिए बदले गए नियम?, सीबीआई जांच की मांग तेज

देहरादून। सेना के अनुशासन और पारदर्शिता के लिए पहचाने जाने वाले कैंट बोर्ड की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। कैंट बोर्ड अस्पताल में संविदा मेडिकल ऑफिसर की भर्ती को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि बोर्ड के एक कर्मचारी की बेटी को नौकरी दिलाने के लिए भर्ती प्रक्रिया के नियमों में बदलाव किया गया और निर्धारित पात्रता शर्तों को दरकिनार कर नियुक्ति दे दी गई।

मामले को लेकर अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण बताते हुए रक्षा मंत्रालय और सीबीआई से पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। सूत्रों के अनुसार कुछ अभ्यर्थी इस मामले को न्यायालय तक ले जाने की तैयारी भी कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार मेडिकल ऑफिसर पद के लिए पूर्व में जारी भर्ती विज्ञापन में तीन वर्ष के अनुभव की अनिवार्य शर्त रखी गई थी। इस आधार पर कई अनुभवी चिकित्सकों ने आवेदन भी किया था। आरोप है कि बाद में भर्ती प्रक्रिया को नए सिरे से आगे बढ़ाते हुए अनुभव की अनिवार्यता को ही समाप्त कर दिया गया। अभ्यर्थियों का दावा है कि यह बदलाव एक विशेष उम्मीदवार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया।

आरोप यह भी हैं कि पर्याप्त आवेदन न मिलने पर ऐसे अभ्यर्थियों से भी आवेदन कराए गए जिनकी पात्रता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया के दौरान इंटरव्यू के साथ अचानक लिखित परीक्षा भी आयोजित की गई। अभ्यर्थियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा और चयन पूर्व निर्धारित था। भर्ती को लेकर उठ रहे सवालों ने कैंट बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि एक संविदा डॉक्टर की नियुक्ति के लिए नियमों में मनमाने बदलाव किए जा सकते हैं तो अन्य महत्वपूर्ण मामलों में भी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अभ्यर्थियों ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से कराई जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा और भर्ती प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

मामले पर कैंट बोर्ड अध्यक्ष ब्रिगेडियर राम सिंह थापा ने भर्ती प्रक्रिया में कुछ बदलाव किए जाने की बात स्वीकार की है। उनका कहना है कि कम वेतनमान पर योग्य डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो रहे थे, जिसके चलते पात्रता संबंधी कुछ शर्तों में संशोधन किया गया। हालांकि उन्होंने किसी विशेष व्यक्ति को लाभ पहुंचाने या मनमाफिक भर्ती किए जाने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। थापा के अनुसार चयन प्रक्रिया सेना के चिकित्सकों के पैनल की देखरेख में संपन्न हुई और भर्ती पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से की गई है। इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल अब कैंट बोर्ड की साख पर असर डाल रहे हैं और जांच की मांग लगातार जोर पकड़ रही है।

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