देहरादून महायोजना-2041: जीआरडी यूनिवर्सिटी में जनसुनवाई, नागरिकों ने दिए विकास से जुड़े सुझाव

देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा देहरादून महायोजना-2041 के तहत चलाए जा रहे जनसुनवाई एवं जनसंवाद अभियान के सातवें दिन मंगलवार को जीआरडी यूनिवर्सिटी, राजपुर रोड में आयोजित शिविर में नागरिकों, संस्थाओं, भू-स्वामियों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराईं।
जनसुनवाई के दौरान सड़क संपर्क, यातायात व्यवस्था, पार्किंग, जल निकासी, पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्रों के संरक्षण, सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार, संस्थागत विकास तथा शहरीकरण से जुड़ी चुनौतियों पर लोगों ने अपने विचार रखे। एमडीडीए की तकनीकी टीम ने सभी सुझावों और आपत्तियों का अभिलेखीकरण कर उन्हें विशेषज्ञ स्तर पर परीक्षण के लिए दर्ज किया। अधिकारियों ने बताया कि देहरादून महायोजना-2041 केवल भूमि उपयोग परिवर्तन का दस्तावेज नहीं, बल्कि राजधानी के आगामी वर्षों के विकास की व्यापक रूपरेखा है। इसे शहर की बढ़ती आबादी, बदलती आवश्यकताओं और नागरिकों की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। स्थानीय स्तर से प्राप्त सुझावों के आधार पर योजना को अधिक व्यावहारिक और जनहितकारी बनाया जाएगा।
राजपुर रोड क्षेत्र के नागरिकों ने बढ़ते ट्रैफिक दबाव, पार्किंग की कमी, अनियोजित विकास, जलभराव, सड़क सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। साथ ही सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित मार्ग विकसित करने तथा हरित क्षेत्रों के संरक्षण की मांग भी की।
एमडीडीए के अनुसार 6 जुलाई से शुरू हुआ यह जनसुनवाई अभियान 21 जुलाई तक शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जारी रहेगा। बुधवार को अगला जनसुनवाई शिविर लीची बाग स्थित 4 न्यू कैंट रोड, दिलाराम चौक में आयोजित किया जाएगा। प्राधिकरण ने संबंधित क्षेत्र के नागरिकों, संस्थाओं, भू-स्वामियों और व्यापारिक संगठनों से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर अपने सुझाव एवं आपत्तियां दर्ज कराने की अपील की है। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि महायोजना-2041 राजधानी के भविष्य की विकास दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जिसे जनभागीदारी के आधार पर तैयार किया जा रहा है। वहीं, सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्रत्येक सुझाव और आपत्ति का तकनीकी एवं विधिक परीक्षण कर उसे नियोजन प्रक्रिया में शामिल करने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महायोजना का उद्देश्य देहरादून की प्राकृतिक पहचान और पर्यावरणीय संतुलन को सुरक्षित रखते हुए सतत एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।
