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पूर्व मुख्य सचिव के बेटे का फर्जी आईपीएस बनकर ठगी का खेल, देहरादून पुलिस ने किया गिरफ्तार

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एस. रामास्वामी के बेटे आर. यशोवर्धन को देहरादून पुलिस ने फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को कभी भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) का अधिकारी, कभी खुफिया एजेंसी (रॉ) से जुड़ा अधिकारी और कभी केंद्र सरकार के प्रभावशाली पदों पर तैनात बताकर लोगों को अपने झांसे में लेता था। पुलिस की जांच में आरोपी के कब्जे से कई फर्जी पहचान पत्र, विजिटिंग कार्ड, वायरलेस सेट और सेना व अर्द्धसैनिक बलों की वर्दियां बरामद हुई हैं।

पुलिस के अनुसार आर. यशोवर्धन लंबे समय से प्रभावशाली व्यक्तियों से संबंध होने का दावा कर लोगों का विश्वास जीतता था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उसने एक महिला डॉक्टर को रक्षा मंत्रालय में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी की। इसके अलावा एक छात्र को स्टार्टअप में निवेश और सरकारी स्तर पर सहयोग का भरोसा देकर भी बड़ी रकम ऐंठी गई। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से पांच फर्जी पहचान पत्र, आठ विजिटिंग कार्ड, एक वायरलेस सेट तथा सेना और अर्द्धसैनिक बलों की तीन जोड़ी वर्दियां बरामद की हैं। इन सामानों का इस्तेमाल वह खुद को वरिष्ठ अधिकारी साबित करने और लोगों को प्रभावित करने के लिए करता था।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। यह भी जांच की जा रही है कि उसने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और इस नेटवर्क में कोई अन्य व्यक्ति शामिल तो नहीं है। बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आरोपी उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एस. रामास्वामी का पुत्र है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है और कानून के समक्ष सभी समान हैं।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नौकरी, सरकारी नियुक्ति, टेंडर, ट्रांसफर-पोस्टिंग या किसी भी सरकारी कार्य के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति के झांसे में न आएं। किसी भी अधिकारी की पहचान और पद की पुष्टि संबंधित विभाग से अवश्य करें। यदि कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर अनुचित लाभ लेने का प्रयास करता है तो इसकी तत्काल सूचना पुलिस को दें। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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