उत्तराखंड बना देश का पूर्ण साक्षर राज्य ‘उल्लास पर्व’ में नवसाक्षरों और स्वयंसेवी शिक्षकों का सम्मान

देहरादून। उत्तराखंड ने साक्षरता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए खुद को देश का पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया है। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘उल्लास पर्व’ के तहत राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नवसाक्षरों, स्वयंसेवी शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक और विषम परिस्थितियों के बावजूद राज्य ने साक्षरता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल किया है। यह दिन प्रदेश के लिए गौरव और ऐतिहासिक उपलब्धि का अवसर है। उन्होंने कहा कि ‘एक सोच, एक विचार’ के साथ आगे बढ़ते हुए नवसाक्षरों को केवल साक्षरता तक सीमित न रखकर शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी ज्ञान से जोड़ना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा से जोड़ना है। कोई भी व्यक्ति शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यालयों को मजबूत करने, बच्चों की शिक्षा में निरंतरता बनाए रखने तथा वंचित एवं जरूरतमंद बच्चों को बेहतर शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
करीब 25 हजार लोगों ने की सहभागिता
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 में भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए जन-जन साक्षरता कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड में करीब 25 हजार लोगों ने सहभागिता की और राज्य ने निर्धारित लक्ष्य को पूरा किया। उन्होंने कहा कि नवसाक्षरों को आगे कक्षा 2 से 5 तक की शिक्षा से जोड़ने के साथ ही विभिन्न कौशल विकास योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सतत विकास की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। राज्य ने तीन प्रमुख प्राथमिकताएं निर्धारित की हैं—100 प्रतिशत पूर्ण साक्षरता, विद्यालयी शिक्षा में ड्रॉपआउट को शून्य करना और वर्ष 2035 तक माध्यमिक शिक्षा के बाद कम से कम 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ना।
नवसाक्षरों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में ऊधमसिंह नगर के नवसाक्षरों ने ‘देश में चमक गया उत्तराखंड, पूर्ण साक्षर बन गया उत्तराखंड’ शीर्षक से साक्षरता गीत प्रस्तुत किया। रुद्रप्रयाग की नवसाक्षर रामप्यारी ने अपने अनुभव साझा किए, जबकि चम्पावत की स्वयंसेविका मधु कालोनी ने उल्लास कार्यक्रम से जुड़े अनुभव बताए। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की ओर से तैयार लघु फिल्म के माध्यम से भी कार्यक्रम की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया।
भारत सरकार की अपर सचिव अर्चना अवस्थी ने उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किए जाने पर मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा विभाग के अधिकारियों, नवसाक्षरों और स्वयंसेवी शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि नवसाक्षरों को साक्षरता के अगले चरण से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के माध्यम से कक्षा 2 से 5 तक की शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में विधायक कैंट सविता कपूर, सचिव विद्यालयी शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव विद्यालयी शिक्षा नमामि बंसल, निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा/अपर राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा सहित विभागीय अधिकारी, जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारी, समन्वयक, नवसाक्षर और स्वयंसेवी शिक्षक मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में अपर सचिव विद्यालयी शिक्षा नमामि बंसल ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। संचालन डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने किया।
