तपोवन विष्णुगाड़ परियोजना में बड़ी सफलता: हेड रेस टनल का सफल ब्रेकथ्रू, 12.1 किमी में 80% खुदाई पूरी

देहरादून। उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी 520 मेगावाट तपोवन विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजना के निर्माण कार्य में बुधवार को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई। एनटीपीसी की इस परियोजना में हेड रेस टनल (एचआरटी) का सफल ब्रेकथ्रू कर लिया गया है। फेस-02 और फेस-03 से बनाई जा रही सुरंगों का सटीक मिलान होने के साथ दोनों ओर से हो रही खुदाई सफलतापूर्वक जुड़ गई, जिसे परियोजना के निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

परियोजना प्रबंधन के अनुसार, इस ब्रेकथ्रू के लिए फेस-02 से 1,748 मीटर तथा फेस-03 से 981 मीटर सुरंग की खुदाई की गई। इस उपलब्धि के साथ 12.1 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल में अब तक 9.7 किलोमीटर खुदाई पूरी हो चुकी है, जो कुल निर्माण का लगभग 80 प्रतिशत है।
एनटीपीसी ने बताया कि हिमालयी क्षेत्र की अत्यंत चुनौतीपूर्ण भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों, कठोर चट्टानी संरचनाओं और जटिल भूमिगत निर्माण के बावजूद परियोजना से जुड़े अभियंताओं और तकनीकी टीम ने उच्च स्तरीय इंजीनियरिंग क्षमता, आधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए इस उपलब्धि को हासिल किया है। इस अवसर पर एनटीपीसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ परियोजना की निष्पादन एजेंसी हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (एचसीसी) के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने परियोजना से जुड़े अभियंताओं, कर्मचारियों और कार्यबल की मेहनत, तकनीकी दक्षता तथा सुरक्षित निर्माण कार्य की सराहना की।
परियोजना प्रमुख एवं कार्यकारी निदेशक अजय कुमार शुक्ला ने इस उपलब्धि पर सभी अधिकारियों, अभियंताओं, कर्मचारियों और सहयोगी एजेंसियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता पूरी टीम के समर्पण, कठिन परिश्रम और उत्कृष्ट कार्य निष्पादन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी सुरक्षा, गुणवत्ता और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के उच्चतम मानकों का पालन करते हुए परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
ब्रेकथ्रू के बाद अब टनल लाइनिंग (Tunnel Lining) का कार्य शुरू किया जाएगा, जिससे परियोजना के शेष निर्माण कार्य में और तेजी आएगी। विशेषज्ञों के अनुसार हेड रेस टनल परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके माध्यम से जल को पावर हाउस तक पहुंचाया जाएगा।
गौरतलब है कि 520 मेगावाट क्षमता वाली तपोवन विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजना के पूरा होने के बाद उत्तराखंड के साथ-साथ देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। यह परियोजना स्वच्छ, हरित और विश्वसनीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ भारत के सतत विकास लक्ष्यों और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती प्रदान करेगी।
