फर्जी ई-चालान लिंक से रहें सावधान, उत्तराखंड पुलिस ने जारी की एडवाइजरी; गलत भुगतान से बचने के बताए तरीके

देहरादून। उत्तराखंड पुलिस के यातायात निदेशालय ने फर्जी ई-चालान के नाम पर हो रही साइबर ठगी को लेकर आम नागरिकों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने बताया कि साइबर ठग इन दिनों आईटीएमएस (Intelligent Traffic Management System) और ई-चालान के नाम पर वाहन स्वामियों को एसएमएस, व्हाट्सएप और ईमेल के माध्यम से फर्जी लिंक भेज रहे हैं। इन लिंक पर क्लिक कर भुगतान करने या बैंकिंग संबंधी जानकारी साझा करने वाले लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। यातायात निदेशालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी ई-चालान का भुगतान करने से पहले उसकी सत्यता केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल पर ही जांचें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या उसके माध्यम से भुगतान करने से बचें।
ऐसे पहचानें असली ई-चालान
पुलिस के अनुसार असली ई-चालान केवल भारत सरकार के अधिकृत पोर्टल पर उपलब्ध होता है। वेबसाइट का पता हमेशा https:// से शुरू होता है और ब्राउज़र में सुरक्षा का लॉक (🔒) चिन्ह दिखाई देता है। आधिकारिक वेबसाइट का डोमेन parivahan.gov.in अथवा संबंधित राज्य सरकार का .gov.in डोमेन होता है। वास्तविक ई-चालान की पुष्टि वाहन संख्या, चालान संख्या अथवा ड्राइविंग लाइसेंस नंबर दर्ज कर की जा सकती है। प्रत्येक वास्तविक चालान 19 अंकों का यूनिक नंबर होता है, जिसमें संबंधित राज्य का कोड भी शामिल रहता है। उत्तराखंड के चालानों में UK कोड अंकित रहता है। वहीं, ई-चालान संबंधी एसएमएस भी केवल अधिकृत सरकारी माध्यमों से भेजे जाते हैं और प्रेषक के रूप में VAHAN से संबंधित अधिकृत आईडी दिखाई देती है।
इन संकेतों से पहचानें फर्जी लिंक
पुलिस ने कहा कि यदि किसी संदेश में वेबसाइट का डोमेन .gov.in के बजाय .com, .xyz, .top, .site या अन्य संदिग्ध डोमेन हो, या फिर bit.ly अथवा tinyurl जैसे शॉर्ट लिंक दिए गए हों, तो सतर्क हो जाएं। इसी तरह यदि संदेश में “तुरंत भुगतान करें”, “भुगतान नहीं करने पर वाहन या ड्राइविंग लाइसेंस जब्त कर लिया जाएगा” जैसी डराने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया हो या लिंक खोलते ही बैंक खाता, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, ओटीपी, सीवीवी अथवा यूपीआई पिन मांगा जाए, तो यह साइबर ठगी का प्रयास हो सकता है। पुलिस ने यह भी बताया कि कई फर्जी संदेशों में केवल 8 से 10 अंकों की चालान संख्या भेजी जा रही है, जबकि वास्तविक ई-चालान 19 अंकों का होता है।व्हाट्सएप पर “UTTARAKHAND RTO – AUTOMATED TRAFFIC VIOLATION ALERT” जैसे नामों से भेजे जाने वाले संदिग्ध संदेशों से भी सावधान रहने की सलाह दी गई है।
संदेश मिलने पर क्या करें?
यदि किसी वाहन स्वामी को ट्रैफिक उल्लंघन से संबंधित संदेश प्राप्त होता है, तो वह किसी भी लिंक पर क्लिक करने के बजाय स्वयं आधिकारिक ई-चालान पोर्टल खोलकर वाहन संख्या, चालान संख्या या ड्राइविंग लाइसेंस नंबर के माध्यम से चालान की जांच करें। पुलिस ने mParivahan मोबाइल ऐप के जरिए भी चालान की स्थिति और हिस्ट्री जांचने की सलाह दी है। केवल सत्यापित चालान का ही भुगतान अधिकृत सरकारी पोर्टल के माध्यम से करें।
साइबर ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत
यातायात निदेशालय ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध एसएमएस, व्हाट्सएप या ईमेल लिंक पर क्लिक न करें और ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी, बैंक खाता या कार्ड संबंधी जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें। यदि कोई संदिग्ध संदेश प्राप्त होता है या साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो इसकी सूचना तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930, राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल तथा निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर थाने में दें।
पुलिस ने कहा कि सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। इसलिए किसी भी ई-चालान का भुगतान करने से पहले उसकी सत्यता आधिकारिक सरकारी पोर्टल पर अवश्य जांच लें और फर्जी लिंक से दूर रहें।
