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बीज बम अभियान सप्ताह-2026 का शुभारंभ, पूरे उत्तराखंड में 15 जुलाई तक चलेंगे कार्यक्रम

देहरादून। उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण और वनों के संवर्द्धन को जन आंदोलन बनाने की दिशा में ‘बीज बम अभियान सप्ताह-2026’ का गुरुवार को शुभारंभ किया गया। यह अभियान 9 जुलाई से 15 जुलाई तक पूरे प्रदेश में मनाया जाएगा। शुभारंभ अवसर पर वन एवं पर्यावरण मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक संख्या में इस अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि जंगलों का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

कार्यक्रम में राज्य के सभी जनपदों के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ), वन संरक्षक एवं वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से जुड़े। आयोजन हिमालयन पर्यावरण जड़ी-बूटी एग्रो संस्थान, जाड़ी (उत्तरकाशी) के तत्वावधान में किया गया। वन मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में मानव और वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं का एक बड़ा कारण जंगलों की प्राकृतिक भोजन श्रृंखला का प्रभावित होना है। ऐसे में केवल पौधारोपण पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों का संरक्षण, निगरानी और उन्हें जीवित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और वन विभाग से पौधारोपण के बाद नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में उत्तरकाशी के जाड़ी क्षेत्र से शुरू हुआ बीज बम अभियान अब एक व्यापक जन अभियान बन चुका है। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) कपिल लाल को निर्देश दिए कि बीज बम अभियान को वन विभाग के वृक्षारोपण एवं वन संरक्षण कार्यक्रमों का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए। साथ ही उन्होंने इस अभियान को नियमित सरकारी कार्यक्रम के रूप में और अधिक संस्थागत स्वरूप देने पर भी जोर दिया। अपने संबोधन में वन मंत्री ने कहा कि “वन विभाग जंगलों का केवल संरक्षक है, लेकिन वनों का वास्तविक संरक्षण तभी संभव है जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति इसमें अपनी भागीदारी निभाए। जनसहभागिता के बिना न जंगल बचाए जा सकते हैं और न ही वन्यजीवों का संरक्षण संभव है।”
कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) कपिल लाल ने अभियान को सफल बनाने वाले सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि बीज बम अभियान तभी व्यापक परिणाम देगा जब यह हर नागरिक का अभियान बने। उन्होंने सभी डीएफओ और वन अधिकारियों से अपील की कि अभियान सप्ताह के दौरान अधिक से अधिक गतिविधियां आयोजित की जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्षा ऋतु वन्यजीवों और पक्षियों के प्रजनन का महत्वपूर्ण समय होता है तथा इसी अवधि में प्राकृतिक वनस्पतियों का सर्वाधिक विकास होता है, इसलिए इस मौसम में पर्यावरण संरक्षण के प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पद्मश्री प्रेम चंद्र शर्मा ने कहा कि जिस उत्तराखंड की धरती ने विश्व को चिपको आंदोलन का संदेश दिया, उसी धरती से शुरू हुआ बीज बम अभियान आज पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल बन रहा है। हिमालयन पर्यावरण जड़ी-बूटी एग्रो संस्थान के संस्थापक एवं बीज बम अभियान के प्रणेता द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने बताया कि यह अभियान उत्तरकाशी के सुदूरवर्ती बागी गांव से शुरू हुआ था और आज देश के 18 से अधिक राज्यों तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि वन मंत्री के सहयोग से इस वर्ष बीज बम अभियान सप्ताह प्रदेश के सभी जनपदों में कैलेंडर आधारित कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने भविष्य में इसे राज्य सरकार के आधिकारिक कार्यक्रम के रूप में शामिल करने की भी मांग रखी।

नौ ‘बीज बम चेंजमेकर्स’ सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले नौ व्यक्तियों को ‘बीज बम चेंजमेकर सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में डॉ. हितेश नौटियाल (मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम), डॉ. चेतन आहूजा (देहरादून), जे.पी. मैठाणी (पीपलकोटी, चमोली), कैलाश चंद्र भट्ट (देहरादून), माधवेन्द्र रावत (हर्षिल, उत्तरकाशी), डॉ. उदय गौड़ (सहायक वन संरक्षक, देहरादून), गोपाल प्रकाश मिश्रा (शिक्षक, उत्तरकाशी), भारती आनंद अनंता (नौगांव, उत्तरकाशी) तथा रचित शर्मा (देहरादून) शामिल हैं। कार्यक्रम का संचालन पर्वतीय विकास शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. अरविंद दरमोड़ा ने किया। इस अवसर पर सेवानिवृत्त वन संरक्षक एस.के. सिंह, समीर रतूड़ी, प्रो. यतीश वशिष्ठ, एच.डी. शर्मा, प्रो. आर.एस. पटेल, डॉ. विक्रम सिंह बर्त्वाल, डॉ. सुमन सिंह गुसाईं, डॉ. गुरु प्रसाद थपलियाल, डॉ. मनोज किशोर नौटियाल, आशीष सेमवाल, अतुल सेमवाल सहित बड़ी संख्या में पर्यावरणविद, शिक्षाविद और वन अधिकारी उपस्थित रहे। अभियान सप्ताह के दौरान प्रदेशभर में बीज बम निर्माण, वितरण, जनजागरूकता कार्यक्रम, पौधारोपण और वन संरक्षण से जुड़े विभिन्न आयोजन किए जाएंगे।

 

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