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लंबित मांगों पर कार्रवाई न होने से आयुर्वेदिक चिकित्सकों का आंदोलन तेज, तीसरे दिन भी काला फीता बांधकर जताया विरोध

देहरादून। प्रदेश सरकार द्वारा आयुर्वेदिक चिकित्सकों की वर्षों पुरानी लंबित मांगों पर कोई ठोस निर्णय न लिए जाने के विरोध में आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ, उत्तराखंड के आह्वान पर चिकित्सकों ने ओपीडी सेवाएं संचालित करते हुए काला फीता बांधकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराया।

चिकित्सकों का कहना है कि आयुष प्रदेश के रूप में पहचान रखने वाले उत्तराखंड में आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के बजाय सरकार उनकी न्यायोचित मांगों की लगातार अनदेखी कर रही है। इससे प्रदेशभर के आयुर्वेदिक चिकित्सकों में गहरा असंतोष और रोष व्याप्त है। संघ के अनुसार एक ओर दुर्गम और विषम भौगोलिक परिस्थितियों में कार्यरत चिकित्सकों पर आधार आधारित और मोबाइल एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने की अनिवार्यता लागू की जा रही है, वहीं दूसरी ओर उनकी सेवा संबंधी लंबित मांगों के समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।

चिकित्सकों की प्रमुख मांगों में एसीपी (ACP) एवं डीएसपी (DSP) का लाभ, संवर्ग निदेशक की नियुक्ति, विभागीय ढांचे का पुनर्गठन तथा वर्ष 2024 बैच के चिकित्सा अधिकारियों का स्थायीकरण शामिल है। संघ का कहना है कि इन मांगों को लंबे समय से शासन स्तर पर लंबित रखा गया है, जिससे चिकित्सकों में निराशा बढ़ती जा रही है। जिला शाखा अल्मोड़ा के अध्यक्ष डॉ. कपिल शर्मा एवं सचिव डॉ. अनुपमा त्यागी के नेतृत्व में आयोजित विरोध प्रदर्शन में चिकित्सा अधिकारियों ने सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को अगले चरण में और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बनाया जाएगा।

संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि प्रांतीय कार्यकारिणी के नेतृत्व में आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप दिया जा सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। चिकित्सकों ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा चिकित्सकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए लंबित मांगों का शीघ्र समाधान करना चाहिए।

 

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