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प्रेरणादायक: अपने 51वें जन्मदिन पर 51 किमी पैदल चलकर एडीएम शैलेन्द्र नेगी ने दिया फिट इंडिया का संदेश

नई टिहरी से शुरू हुआ नौ घंटे का सफर, फिट इंडिया का दिया संदेश; पहाड़, प्रकृति और जनजीवन को करीब से जानने का भी मिला अवसर

देहरादून। जन्मदिन पर आमतौर पर लोग केक काटकर, दोस्तों और परिवार के साथ खुशियां मनाते हैं, लेकिन टिहरी गढ़वाल के अपर जिलाधिकारी (एडीएम) शैलेन्द्र सिंह नेगी ने अपने 51वें जन्मदिन को एक अलग और प्रेरणादायक अंदाज में मनाया। आठ अक्टूबर को उन्होंने नई टिहरी से मां कुंजापुरी मंदिर तक लगभग 51 किलोमीटर की दूरी दौड़ते और पैदल चलते हुए तय की। करीब नौ घंटे तक चले इस सफर को पूरा कर उन्होंने न केवल अपनी शारीरिक क्षमता और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नियमित व्यायाम करने का संदेश भी दिया। उनकी इस अनूठी पहल की सोशल मीडिया पर जमकर सराहना हो रही है।

सुबह 6:30 बजे शुरू हुआ सफर, 3:30 बजे मां कुंजापुरी के दर्शन

एडीएम शैलेन्द्र सिंह नेगी आठ अक्टूबर की सुबह करीब 6:30 बजे नई टिहरी स्थित अपर जिलाधिकारी आवास से रोजाना की तरह दौड़ने निकले थे। करीब तीन किलोमीटर दौड़ने के बाद उनके मन में अपने 51वें जन्मदिन को यादगार बनाने का विचार आया। उन्होंने तय किया कि जीवन के इस नए पड़ाव पर 51 किलोमीटर की दूरी तय कर मां कुंजापुरी के दर्शन किए जाएं। इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल से फोन पर संपर्क कर अपने विचार से अवगत कराया और अनुमति व शुभकामनाएं प्राप्त कीं। खास बात यह रही कि उन्होंने इस यात्रा की जानकारी अपने परिवार तक को नहीं दी। बिना किसी विशेष तैयारी, अतिरिक्त कपड़ों या भोजन की व्यवस्था के वह अपने साथ केवल मोबाइल फोन और रोजाना इस्तेमाल में आने वाली छड़ी लेकर आगे बढ़ गए।
चंबा, नागणी, खाड़ी, आगराखाल और हिंडोलाखाल होते हुए उन्होंने मां कुंजापुरी मंदिर तक का सफर पूरा किया। सुबह से लगातार दौड़ने और पैदल चलने के बाद दोपहर की तेज धूप, चढ़ाई और थकान ने उनकी परीक्षा ली, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपराह्न करीब 3:30 बजे मंदिर पहुंचकर उन्होंने मां कुंजापुरी के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।

एडीएम ने आधी दूरी दौड़कर, शेष पैदल किया सफर

लगभग 51 किलोमीटर की इस यात्रा में उन्होंने करीब आधी दूरी दौड़ते हुए और शेष पैदल चलकर पूरी की। अंतिम चरण में पैरों में तेज दर्द और भारीपन के कारण मंदिर की सीढ़ियां चढ़ना भी चुनौतीपूर्ण हो गया था। कई बार विश्राम करने के बाद वह आगे बढ़े और आखिरकार अपने संकल्प को पूरा किया। नेगी के अनुसार, यह उनके जीवन की सबसे कठिन शारीरिक परीक्षाओं में से एक थी। यात्रा पूरी होने के बाद उन्होंने फिट इंडिया चैलेंज के लिए आवश्यक विवरण, फोटो और वीडियो भी अपलोड किए। इस प्रक्रिया में ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर सूरज बिष्ट का सहयोग मिला।

पहाड़ के बचपन ने दी मजबूती, नियमित दौड़ आज भी दिनचर्या का हिस्सा

एडीएम शैलेन्द्र सिंह नेगी अपने स्वस्थ और सक्रिय जीवन का श्रेय पहाड़ में बीते बचपन को देते हैं। उनका कहना है कि खेतों में काम करना, पशु चराना, जंगलों में घूमना, नदियों में नहाना और पहाड़ी रास्तों पर चलना बचपन की सामान्य दिनचर्या का हिस्सा था। उस दौर में शारीरिक श्रम को व्यायाम नहीं समझा जाता था, बल्कि वह जीवन की जरूरत थी। बाद के वर्षों में शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने शारीरिक सक्रियता बनाए रखने का प्रयास किया। वर्तमान में वह सामान्यतः प्रतिदिन छह से सात किलोमीटर दौड़ते हैं। पहाड़ों, दुर्गम गांवों, बुग्यालों, घाटियों और हिमालयी क्षेत्रों की यात्राओं में भी उनकी विशेष रुचि रही है। उनका मानना है कि चालीस वर्ष की आयु के बाद स्वास्थ्य के प्रति सजगता और बढ़ानी चाहिए, जबकि पचास वर्ष के बाद नियमित शारीरिक गतिविधि जीवन का अनिवार्य हिस्सा बननी चाहिए। धन, पद और प्रतिष्ठा का अपना महत्व है, लेकिन अच्छे स्वास्थ्य के बिना जीवन की उपलब्धियों का पूरा आनंद नहीं लिया जा सकता।

सफर में शहीदों को नमन, प्रकृति और ग्रामीण जीवन से साक्षात्कार

यह यात्रा केवल शारीरिक चुनौती तक सीमित नहीं रही। रास्ते में नेगी ने पहाड़ के इतिहास, संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और ग्रामीण जीवन को भी करीब से देखा। चंबा में प्रथम विश्वयुद्ध के वीर सैनिक और विक्टोरिया क्रॉस विजेता राइफलमैन गब्बर सिंह नेगी के स्मारक पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने उनकी जन्मभूमि ग्राम मंज्यूड़ के प्रवेश स्थल से भी श्रद्धा व्यक्त की। टिहरी की धरती के महान जननायक श्रीदेव सुमन के संघर्ष और बलिदान का स्मरण भी उनके लिए इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। खाड़ी पहुंचकर उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीद रवीन्द्र सिंह रावत के स्मारक पर पुष्प अर्पित किए और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी श्रद्धांजलि दी। नागणी के निकट जड़धारगांव के प्रवेश द्वार पर रुककर उन्होंने बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता विजय जड़धारी के योगदान का स्मरण किया। रास्ते में खेतों में काम करते किसान, सब्जियों की खेती में जुटे श्रमिक, स्वरोजगार के जरिए आजीविका चलाते स्थानीय उद्यमी, पशुपालन करते वन गुर्जर परिवार और कबाड़ एकत्र कर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में योगदान देने वाले श्रमिक भी उनके सफर का हिस्सा बने। उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनके कामकाज और जीवन की परिस्थितियों को समझा।

20 से अधिक जलस्रोत और झरने देख संरक्षण की जरूरत महसूस की

नई टिहरी से कुंजापुरी तक के मार्ग में उन्हें 20 से अधिक प्राकृतिक जलस्रोत और झरने दिखाई दिए। पहाड़ी ढलानों और चट्टानों से निकलती जलधाराओं को देखकर उन्होंने इनके संरक्षण, आसपास स्वच्छता बनाए रखने और स्थानीय लोगों को इनके महत्व के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता महसूस की। यात्रा के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग-34 पर सड़क चौड़ीकरण, ग्रामीण संपर्क मार्गों, भूस्खलन प्रभावित ढलानों और सुरक्षा उपायों को भी करीब से देखने का अवसर मिला। कहीं सड़क निर्माण से प्रभावित मकान और पुराने रास्ते दिखाई दिए, तो कहीं भूस्खलन रोकने के लिए बनाई गई संरचनाएं और काम में लगी मशीनें नजर आईं। तेज रफ्तार वाहनों के बीच पैदल चलने के अनुभव ने सड़क सुरक्षा और गति नियंत्रण के महत्व को भी रेखांकित किया। नेगी का मानना है कि पैदल यात्राएं किसी क्षेत्र को समझने का अलग अवसर देती हैं। वाहन से गुजरते हुए जो दृश्य नजरअंदाज हो जाते हैं, पैदल चलने पर उन्हीं के बीच स्थानीय जीवन, समस्याओं और संभावनाओं को समझने का अवसर मिलता है।

स्वास्थ्य के लिए मेहनत भी जरूरी, दूसरों के अनुभवों से मिली प्रेरणा

अपनी यात्रा के दौरान नेगी को श्रीनगर की मीना कंडारी की उपलब्धियों का भी स्मरण होता रहा, जिन्होंने सुबह टहलने से शुरुआत कर लंबी दूरी की दौड़ प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वर्ष 2026 में सूर्य देवभूमि चैलेंज अल्ट्रा रन में 113 किलोमीटर की दूरी पूरी कर दूसरा स्थान प्राप्त करना उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। इसके अलावा फिट इंडिया से जुड़ी डॉ. भैरवी नाइक जोशी के जीवन अनुभवों ने भी उन्हें प्रेरित किया। नियमित साइकिलिंग और जीवनशैली में बदलाव के माध्यम से स्वास्थ्य बेहतर बनाने का उनका प्रयास इस बात का उदाहरण है कि इच्छाशक्ति और निरंतर अभ्यास से जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं। यात्रा के दौरान मिले एक संन्यासी से भी उनकी बातचीत हुई, जो नर्मदा परिक्रमा, चारधाम और अन्य धार्मिक यात्राएं पैदल कर चुके थे। सीमित सामान के साथ लंबी दूरी तय कर रहे इस पदयात्री ने भी नेगी को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

एडीएम नेगी ने जन्मदिन पर लिया स्वस्थ रहने का संकल्प

यात्रा पूरी करने के बाद जब नेगी देहरादून स्थित अपने घर पहुंचे तो उनकी थकान और लड़खड़ाती चाल देखकर परिवार ने उन्हें खूब डांटा भी और हंसी-मजाक भी किया। उनकी मां ने जब उन्हें लचककर चलते देखा तो कारण पूछा। नेगी ने मजाकिया अंदाज में कह दिया कि गाड़ी में बैठने से पैर सुन्न हो गया है। परिवार को उनकी 51 किलोमीटर की यात्रा की पूरी जानकारी नहीं थी। नेगी के लिए आठ अक्टूबर की यह यात्रा केवल जन्मदिन मनाने का तरीका नहीं, बल्कि अपने जीवन के अनुभवों को नए संकल्प से जोड़ने का अवसर रही। उनका संदेश स्पष्ट है कि स्वस्थ रहने के लिए उम्र को बाधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति अधिक जिम्मेदार होने की वजह मानना चाहिए।जीवन के पचास वर्ष पूरे कर 51वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर तय किए गए 51 किलोमीटर उनके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक बन गए। उनकी यह पहल बताती है कि जन्मदिन को केवल उत्सव तक सीमित रखने के बजाय उसे किसी सकारात्मक संकल्प और समाज के लिए प्रेरक संदेश से भी जोड़ा जा सकता है।

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