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उत्तरकाशी में 15 जुलाई को होगा ‘जीतू बगड़वाल’ का भव्य मंचन

देहरादून। राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 15 जुलाई को देशभर में आयोजित होने जा रहे राष्ट्रीय सांस्कृतिक अभियान के तहत उत्तरकाशी में उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोकगाथा पर आधारित चर्चित नाटक “जीतू बगड़वाल” का मंचन किया जाएगा। यह प्रस्तुति 15 जुलाई (कालिदास जयंती) को सायं 5:30 बजे कलेक्ट्रेट प्रेक्षागृह, उत्तरकाशी में होगी।

नई दिल्ली स्थित संगीत नाटक अकादमी के तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत देश के सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में एक साथ 150 नाट्य प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इन प्रस्तुतियों में 39 भारतीय भाषाओं, 150 से अधिक नाट्य संस्थाओं और 4,000 से अधिक कलाकारों की सहभागिता रहेगी। अभियान का उद्देश्य राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ को देशभक्ति, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता के उत्सव के रूप में मनाना है।
उत्तरकाशी में इस विशेष आयोजन का दायित्व स्थानीय अग्रणी रंग संस्था संवेदना समूह को सौंपा गया है। संस्था द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला नाटक “जीतू बगड़वाल” उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, लोकगाथाओं और देशभक्ति की भावना को मंच पर जीवंत करेगा। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध लोकगायिका एवं पद्मश्री सम्मानित बसंती बिष्ट की गरिमामयी उपस्थिति होगी, जिनकी मौजूदगी से आयोजन को विशेष सांस्कृतिक गरिमा मिलेगी। आयोजन को सफल बनाने के लिए संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली के सचिव राजू दास, सह सचिव सुमन कुमार, नाट्य सलाहकार विजय सिंह, मनीष ममगाईं तथा जिला प्रशासन का सहयोग प्राप्त हो रहा है। वहीं संवेदना समूह के कलाकार अंकिता, रानी, काजल, आईशी, सिमरन, अमित, अनिल, आलोक, जयप्रकाश राणा, गंगा डोगरा, अजय नौटियाल, डॉ. अजीत पंवार, संजय पंवार, गोविंद बिष्ट, विपिन नेगी, राजेश जोशी सहित अनेक रंगकर्मी अंतिम तैयारियों में जुटे हुए हैं। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, साहित्यकारों, रंगकर्मियों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रहने की उम्मीद है। यह आयोजन उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को राष्ट्रीय मंच से जोड़ने के साथ-साथ राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का भी सशक्त संदेश देगा।

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