टौंस पुल एप्रोच रोड प्रकरण में बड़ी कार्रवाई, अधिशासी अभियंता राजेश कुमार निलंबित

देहरादून। टौंस नदी पर देहरादून–पांवटा पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित नव निर्मित पुल के एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने के मामले में उत्तराखंड शासन ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड, देहरादून के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

लोक निर्माण अनुभाग-1 द्वारा जारी कार्यालय आदेश के अनुसार प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि पुल निर्माण के दौरान नदी के डायवर्जन कार्य (River Diversion Work) का आवश्यक डिजाइन तैयार नहीं किया गया। जांच में यह भी पाया गया कि डिजाइन कंसल्टेंट द्वारा नदी के तल (River Bed) की ढाल, नदी के प्राकृतिक बहाव (Meandering Nature) तथा नदी प्रशिक्षण (River Training) से संबंधित आवश्यक तकनीकी उपाय नहीं सुझाए गए। इसके परिणामस्वरूप नदी का पूरा दबाव एक ओर केंद्रित हो गया और पुल के एबटमेंट के अपस्ट्रीम हिस्से में भारी स्कॉरिंग (कटाव) होने से एप्रोच रोड पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। शासन के अनुसार, उस समय कार्य की तकनीकी निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी पर्यवेक्षण, अनुबंध की शर्तों के पालन तथा अपने प्रशासनिक दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किया। प्रारंभिक जांच में इसे शासकीय कार्यों के प्रति गंभीर लापरवाही, पर्यवेक्षण में शिथिलता तथा कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर त्रुटि माना गया है। आदेश में कहा गया है कि इस लापरवाही से न केवल शासन की छवि प्रभावित हुई, बल्कि सार्वजनिक हित भी प्रभावित हुआ।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए शासन ने उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 2003 (यथा संशोधित) के नियम-4(1) के तहत अधिशासी अभियंता राजेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति की कार्रवाई भी की जा सकती है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें वित्तीय नियम संग्रह के प्रावधानों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। साथ ही उन्हें यह प्रमाणित करना होगा कि निलंबन अवधि में वे किसी अन्य सेवा, व्यापार, व्यवसाय अथवा निजी रोजगार से जुड़े नहीं हैं, तभी संबंधित भुगतान देय होगा। गौरतलब है कि टौंस नदी पर बने इस पुल के एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को लेकर कई सवाल उठे थे। शासन की इस कार्रवाई को प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
