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आंतरिक सुरक्षा, साइबर अपराध और ड्रग्स-फ्री देवभूमि पर रहेगा विशेष फोकस

देहरादून। उत्तराखण्ड पुलिस ने वर्ष 2026 के लिए अपनी कार्ययोजना और प्राथमिकताओं को अंतिम रूप दे दिया है। पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड श्री दीपम सेठ की अध्यक्षता में सरदार पटेल भवन स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में आंतरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, नशा-मुक्त उत्तराखण्ड, पुलिस कल्याण और प्रशासनिक सुधारों को केंद्र में रखते हुए विस्तृत मंथन किया गया।

बैठक में पुलिस मुख्यालय की सभी शाखाओं की कार्यप्रणाली को अधिक दक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर विशेष जोर दिया गया। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 में उत्तराखण्ड पुलिस का लक्ष्य केवल अपराध नियंत्रण नहीं, बल्कि प्रोएक्टिव पुलिसिंग, तकनीकी सशक्तिकरण और जनविश्वास को मजबूत करना रहेगा।
साइबर सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
डीजीपी दीपम सेठ ने एंटी टेरर कॉन्फ्रेंस-2025 के दौरान माननीय केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में साइबर सर्विलांस और साइबर इंटेलिजेंस को आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ बताते हुए इस क्षेत्र में संसाधनों और क्षमताओं को और मजबूत करने के निर्देश दिए।
ATS, ANTF और ट्रैफिक निदेशालय का पुनर्गठन
बैठक में ATS, ANTF एवं ट्रैफिक निदेशालय के पुनर्गठन पर विशेष चर्चा हुई। एटीएस की संरचना में एकरूपता लाने तथा माननीय मुख्यमंत्री के “ड्रग-फ्री उत्तराखण्ड” विज़न को साकार करने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) को और अधिक सशक्त किए जाने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होगी शीर्ष पुलिस अधिकारियों की बैठक शीघ्र ही मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें DGP-IGP Conference-2025 के एजेंडा बिंदुओं की समीक्षा कर भविष्य की पुलिस रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

1930 हेल्पलाइन और 112 का बेहतर समन्वय

साइबर अपराधों की त्वरित शिकायत निस्तारण के लिए 1930 साइबर हेल्पलाइन को और अधिक प्रभावी बनाते हुए 112 इमरजेंसी सिस्टम से तकनीकी रूप से मजबूत समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया गया।
ई-ऑफिस, समयबद्ध निर्णय और लंबित मामलों का निस्तारण।डीजीपी ने सभी शाखाओं को अपने-अपने अनुभागों से जुड़े प्रस्तावों पर ठोस और समयबद्ध एक्शन प्लान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। वित्तीय वर्ष समाप्ति से पूर्व बजट, प्रोक्योरमेंट एवं लंबित पत्रावलियों के शीघ्र निस्तारण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री के विज़न “सरलीकरण, समाधान और निस्तारण” को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए। सभी फाइलों के मूवमेंट को ई-ऑफिस / ई-फाइल प्रणाली के माध्यम से ही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
पुलिस कल्याण, पदोन्नति और प्रशिक्षण को प्राथमिकता
सभी इकाइयों को समय पर ACR भरने के निर्देश दिए गए ताकि पुलिस कर्मियों को पदोन्नति, पदक, प्रशस्ति एवं अन्य लाभ समय से मिल सकें। पीटीसी नरेंद्रनगर में प्रस्तावित Centre of Excellence के लिए शासन स्तर पर प्रभावी पैरवी के निर्देश भी दिए गए।

उत्तराखण्ड पुलिस गीत का व्यापक प्रचार

डीजीपी ने उत्तराखण्ड पुलिस गीत को सभी प्रमुख पुलिस आयोजनों, परेड, दीक्षांत समारोह, स्थापना दिवस और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से बजाने के निर्देश देते हुए कहा कि यह गीत राज्य की सांस्कृतिक पहचान और पुलिस की सेवा-भावना को सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है।
बैठक में अपर पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था श्री वी. मुरुगेशन, अपर पुलिस महानिदेशक प्रशासन श्री ए.पी. अंशुमान, आईजी दूरसंचार श्री कृष्ण कुमार वी.के., आईजी साइबर श्री नीलेश आनन्द भरणे, आईजी/निदेशक यातायात श्री एन.एस. नपलच्याल, आईजी प्रशिक्षण श्री अनन्त शंकर ताकवाले, आईजी गढ़वाल परिक्षेत्र श्री राजीव स्वरूप, आईजी अपराध एवं कानून व्यवस्था श्री सुनील कुमार मीणा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं पुलिस मुख्यालय के समस्त अनुभाग अधिकारी उपस्थित रहे।

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