दून अस्पताल में लापरवाही पर निदेशक चिकित्सा शिक्षा सख्त, मरीजों की देखभाल में चूक मिली तो तय होगी जिम्मेदारी

देहरादून राजकीय दून मेडिकल कॉलेज से संबद्ध दून चिकित्सालय की व्यवस्थाओं को लेकर चिकित्सा शिक्षा निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) आशुतोष सायना ने गुरुवार को सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अस्पताल का ब्लॉकवार सघन निरीक्षण कर चिकित्सा सेवाओं, मरीजों की सुविधा, स्वच्छता, वार्ड प्रबंधन, स्टाफ की कार्यप्रणाली, इमरजेंसी सेवाओं और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि मरीजों की सुरक्षा और उपचार में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
दून अस्पताल में निरीक्षण के बाद अस्पताल के पंचम तल स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों, प्रोफेसरों एवं एसोसिएट प्रोफेसरों के साथ उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में अस्पताल की मौजूदा व्यवस्थाओं की समीक्षा के साथ मरीजों को बेहतर और समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।
मरीज सर्वोच्च प्राथमिकता, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सायना ने दो टूक कहा कि अस्पताल में आने वाला प्रत्येक मरीज संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मरीजों को उपचार, जांच, रिपोर्ट या वार्ड से संबंधित किसी भी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी अथवा परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों और विभागाध्यक्षों को चेतावनी दी कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में शिथिलता, अनुशासनहीनता और मरीजों के प्रति लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने वार्ड बॉय, सफाई कर्मचारियों और अन्य सहायक कर्मचारियों के लिए सख्त रोटेशन व्यवस्था लागू करने तथा निर्धारित कार्यक्षेत्र में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकृत कार्य के अलावा कर्मचारियों के अनावश्यक रूप से इधर-उधर घूमने पर रोक लगाने को कहा गया।
मरीजों की देखभाल में चूक पर तय होगी जवाबदेही
निदेशक ने नर्सिंग स्टाफ और वार्ड कर्मचारियों को मरीजों की देखभाल के प्रति पूरी तरह जवाबदेह रहने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीज की देखभाल में लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और संबंधित स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
रेडियोलॉजी-पैथोलॉजी और क्लिनिकल विभागों में बेहतर तालमेल
बैठक में रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी और क्लिनिकल विभागों के बीच समन्वय को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए। सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड और अन्य जांचों की रिपोर्टिंग में मरीज की क्लिनिकल जानकारी को ध्यान में रखते हुए समुचित समन्वय सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि जांच रिपोर्ट अधिक सटीक और उपचार में उपयोगी हो। निदेशक ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस चिकित्सक के हस्ताक्षर से रिपोर्ट जारी होगी, वह उसकी गुणवत्ता और नैदानिक जिम्मेदारी के प्रति जवाबदेह होगा।
रिपोर्ट के लिए मरीजों को नहीं करना पड़ेगा लंबा इंतजार
मरीजों को जांच रिपोर्ट के लिए अनावश्यक रूप से अस्पताल के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए अधिकतम संभव सीमा तक डिजिटल रिपोर्टिंग और अधिकृत डिजिटल संचार माध्यमों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए। निदेशक ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में रिपोर्ट और चिकित्सकीय जानकारी के संचार में अनावश्यक देरी की कोई गुंजाइश नहीं है।
इमरजेंसी में देरी हुई तो भारी पड़ सकती है लापरवाही
इमरजेंसी सेवाओं की समीक्षा के दौरान निदेशक ने विशेष सख्ती दिखाई। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों के उपचार में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।इमरजेंसी में वरिष्ठ और अनुभवी चिकित्सकों की उपलब्धता तथा स्पष्ट SOP के अनुसार तत्काल निर्णय लेने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी अस्पताल की सबसे संवेदनशील इकाइयों में शामिल है, जहां छोटी सी चूक भी मरीज के जीवन पर भारी पड़ सकती है। इसलिए यहां हर स्तर पर जवाबदेही और त्वरित निर्णय व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए।
पीजी छात्रों और इंटर्न की ट्रेनिंग पर भी निगरानी
पीजी छात्रों, जूनियर डॉक्टरों और इंटर्न को वरिष्ठ फैकल्टी के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में कार्य कराने के निर्देश दिए गए। आईसीयू, ओटी और वार्डों में ड्रेस कोड, स्क्रब कल्चर, संक्रमण नियंत्रण और निर्धारित SOP का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया।
सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी
चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी अस्पताल प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए। चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर डॉ. रवींद्र सिंह बिष्ट की ओर से अतिरिक्त सुरक्षा बल बढ़ाने तथा नए सीसीटीवी कैमरे लगाने सहित किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई। निदेशक ने अस्पताल परिसर की निगरानी को प्रभावी बनाने और चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया।
नए ब्लॉक और सुपरस्पेशलिटी सेवाओं पर भी चर्चा
बैठक में कॉलेज की डीन एवं प्राचार्या प्रोफेसर डॉ. गीता जैन ने अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में मरीजों तथा विद्यार्थियों के हित में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। इसमें नया सीएसएसडी ब्लॉक, 500 बेड का नया अस्पताल ब्लॉक, इमरजेंसी ओटी केयर सर्विसेज, ओपीडी एवं आईपीडी सेवाओं का उन्नयन, स्किल सेंटर तथा नए सुपरस्पेशलिटी कार्यक्रम प्रमुख रहे। अंत में डीन एवं प्राचार्या डॉ. गीता जैन ने कहा कि संस्थान का लक्ष्य प्रत्येक मरीज को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और सुलभ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय और प्रशासनिक अनुशासन को प्राथमिकता दी जाएगी। निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सायना के निरीक्षण से अस्पताल में स्पष्ट संदेश गया है कि मरीजों की सुरक्षा, उपचार की गुणवत्ता और प्रशासनिक अनुशासन से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होगा। लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।