प्रवेश से पहले फार्मेसी संस्थान जांच लें इंटरमीडिएट की अंकतालिका
देहरादून। उत्तराखंड में फार्मेसी पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों की शैक्षणिक पात्रता को लेकर फार्मेसी काउंसिल ने शिक्षण संस्थानों को एक बार फिर सतर्क किया है। राज्य में वर्तमान में 96 कॉलेजों, 24 विश्वविद्यालयों और 21 पॉलीटेक्निक संस्थानों में विभिन्न फार्मेसी पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इनमें दो वर्षीय डी.फार्मा, चार वर्षीय बी.फार्मा, छह वर्षीय फार्म-डी तथा दो वर्षीय एम.फार्मा पाठ्यक्रम शामिल हैं।
फार्मेसी एक्ट, 1948 के तहत बनाए गए एजुकेशन रेगुलेशन-2020 के अध्याय-2(4) के अनुसार फार्मेसी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी का विज्ञान वर्ग से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण होना आवश्यक है। निर्धारित शैक्षणिक योग्यता में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान तथा गणित अथवा जीव विज्ञान विषय शामिल हैं। वहीं बी.फार्मा में प्रवेश के लिए विज्ञान वर्ग के साथ अंग्रेजी विषय भी अनिवार्य है।
विषय में फेल होने के बावजूद दे रहे प्रवेश
फार्मेसी काउंसिल के संज्ञान में यह मामला आया है कि पिछले कई वर्षों से कुछ शिक्षण संस्थानों द्वारा निर्धारित नियमों के विपरीत ऐसे अभ्यर्थियों को भी फार्मेसी पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जा रहा है, जो इंटरमीडिएट में निर्धारित अनिवार्य विज्ञान विषयों में से किसी एक में उत्तीर्ण नहीं हैं। अभ्यर्थी संस्थान में प्रवेश लेकर निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा कर लेते हैं, लेकिन फार्मेसी काउंसिल में पंजीकरण के समय उनकी वास्तविक शैक्षणिक पात्रता सामने आने पर परेशानी खड़ी हो जाती है। ऐसे मामलों में पात्रता मानकों को पूरा नहीं करने वाले अभ्यर्थियों का फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकरण नहीं हो पाता। इससे विद्यार्थियों को आर्थिक और मानसिक नुकसान के साथ ही उनके भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की स्थिति बन रही है।
हाईकोर्ट तक पहुंच रहे मामले
पंजीकरण नहीं होने के कारण कई प्रभावित अभ्यर्थियों द्वारा न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया गया है। वहीं, ऐसे मामलों के चलते फार्मेसी काउंसिल को भी अनावश्यक जनआक्रोश और विवाद का सामना करना पड़ रहा है।
काउंसिल की ओर से पूर्व में भी उत्तराखंड में फार्मेसी पाठ्यक्रम संचालित करने वाले सभी शिक्षण संस्थानों को लिखित रूप से निर्देशित किया जा चुका है कि प्रवेश के समय अभ्यर्थी की इंटरमीडिएट अंकतालिका और निर्धारित विषयों में उसकी उत्तीर्णता की अच्छी तरह जांच की जाए। इसके बावजूद पात्रता से संबंधित मामले सामने आने के बाद अब वर्ष 2026 के प्रवेश को लेकर संस्थानों को पुनः सचेत किया जा रहा है।
प्रवेश से पहले दस्तावेजों की करें पूरी जांच
फार्मेसी काउंसिल ने फार्मेसी शिक्षण संस्थानों से कहा है कि वर्ष 2026 में प्रवेश लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी की इंटरमीडिएट अंकतालिका की बारीकी से जांच की जाए। निर्धारित विज्ञान विषयों में उत्तीर्णता और बी.फार्मा के लिए आवश्यक अंग्रेजी विषय की पात्रता सुनिश्चित करने के बाद ही प्रवेश दिया जाए। काउंसिल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यार्थी निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद पंजीकरण के समय पात्रता संबंधी समस्या में न फंसें। प्रवेश के समय संस्थानों द्वारा बरती गई लापरवाही का खामियाजा बाद में विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है। इसलिए संस्थानों से अपेक्षा की गई है कि प्रवेश प्रक्रिया के दौरान नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए अभ्यर्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन करें, ताकि भविष्य में पंजीकरण को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो और विद्यार्थियों का समय, धन तथा भविष्य प्रभावित न हो।
