जलकुर घाटी सांस्कृतिक एवं पर्यटन महोत्सव संपन्न, 25 से अधिक विभूतियों को मिला ‘गाजणा गौरव सम्मान’

देहरादून। जलकुर घाटी की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से राजकीय इंटर कॉलेज धौंतरी के प्रांगण में आयोजित जलकुर घाटी सांस्कृतिक एवं पर्यटन महोत्सव उत्साह और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। स्वर्गीय कलीराम नौटियाल स्मृति फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस महोत्सव में क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पर्यटन विकास और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण क्षेत्र में सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और स्वरोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 25 से अधिक लोगों को ‘गाजणा गौरव सम्मान’ से सम्मानित करना रहा। इस अवसर पर गाजणा गौरव पत्रिका का भी विमोचन किया गया।

रविवार को आयोजित महोत्सव का शुभारंभ गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान एवं मुख्यमंत्री के गढ़वाल समन्वयक किशोर भट्ट ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रतिभाग किया। महोत्सव के दौरान धौंतरी, जालंग, कमद, भेटियारा सहित आसपास के गांवों के महिला मंगल दलों ने पारंपरिक रासो नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकगीतों और पारंपरिक वेशभूषा के साथ प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने गाजणा क्षेत्र की समृद्ध लोक विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की।
महोत्सव में केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ही आकर्षण का केंद्र नहीं रहीं, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास को लेकर भी गंभीर मंथन किया गया। वक्ताओं ने जलकुर घाटी और गाजणा क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विशेषताओं को पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां की लोक संस्कृति, पारंपरिक रहन-सहन, खानपान, धार्मिक एवं प्राकृतिक स्थलों को योजनाबद्ध तरीके से प्रचारित-प्रसारित कर स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
कार्यक्रम में उत्तराखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति के महत्वपूर्ण अंग ढोल सागर की बारीकियों से भी लोगों को परिचित कराया गया। वक्ताओं ने कहा कि ढोल सागर केवल वाद्य परंपरा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसी परंपराओं का संरक्षण और नई पीढ़ी तक उनका हस्तांतरण समय की आवश्यकता है।
25 से अधिक विभूतियों को मिला गाजणा गौरव सम्मान
महोत्सव के समापन अवसर पर गाजणा क्षेत्र और इससे जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 25 से अधिक लोगों को ‘गाजणा गौरव पुरस्कार’ प्रदान कर सम्मानित किया गया। सामाजिक सेवा, राजनीतिक गतिविधियों, स्वरोजगार तथा क्षेत्र के विकास में योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित कर उनके कार्यों को सार्वजनिक रूप से सराहा गया। आयोजकों ने कहा कि इस सम्मान का उद्देश्य क्षेत्र की प्रतिभाओं और समाज के लिए समर्पित लोगों को प्रोत्साहित करना तथा नई पीढ़ी को सकारात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करना है।
इस अवसर पर गाजणा गौरव पत्रिका का विमोचन भी किया गया। पत्रिका के माध्यम से क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, इतिहास, लोक परंपराओं, सामाजिक गतिविधियों और विकास से जुड़े विषयों को सामने लाने का प्रयास किया गया है। राज्य स्तरीय मेला घोषित करने की उठी मांग
महोत्सव में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अतिथियों ने जलकुर घाटी सांस्कृतिक एवं पर्यटन महोत्सव को राज्य स्तरीय मेला घोषित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि इस आयोजन को व्यापक पहचान और सरकारी स्तर पर प्रोत्साहन मिलने से न केवल गाजणा क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण मिलेगा, बल्कि पर्यटन गतिविधियों को भी गति मिलेगी। इससे स्थानीय कलाकारों, महिला मंगल दलों, युवाओं और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल सकेंगे।
कार्यक्रम में उत्तराखंड संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद की उपाध्यक्ष एवं दर्जाधारी राज्यमंत्री मधु भट्ट, समिति अध्यक्ष प्रजापति नौटियाल, गाजणा मंडल अध्यक्ष राजीव नौटियाल, जिला पर्यटन अधिकारी खुशहाल नेगी, जिला पंचायत सदस्य प्रियंका रावत, शंभू नौटियाल, दीपक नौटियाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और क्षेत्रवासी मौजूद रहे। महोत्सव ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करते हुए पर्यटन को विकास का आधार बनाया जा सकता है। जलकुर घाटी का यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ ही विकास की नई संभावनाओं को सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।