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आयुर्वेदिक चिकित्सकों का विरोध प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी, मांगों की अनदेखी पर जताया रोष

देहरादून। आयुष विभाग के प्रति सरकार के उदासीन रवैये और लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी के विरोध में आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ (उत्तराखंड) का चरणबद्ध आंदोलन मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। जिले भर के आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने काला फीता बांधकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया।

संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि एक ओर उत्तराखंड को आयुष प्रदेश के रूप में स्थापित करने की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर आयुर्वेदिक चिकित्सकों की समस्याओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में आधार आधारित एवं मोबाइल एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था को अव्यावहारिक बताते हुए इसे चिकित्सकों के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बताया। चिकित्सकों का कहना है कि उनकी वर्षों से लंबित मांगों, जिनमें एसीपी, डीएसपी, संवर्ग निदेशक की नियुक्ति, विभागीय ढांचे का पुनर्गठन तथा वर्ष 2024 बैच के चिकित्सा अधिकारियों का स्थायीकरण शामिल है, पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे प्रदेश भर के आयुर्वेदिक चिकित्सकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ के आह्वान पर जिला इकाई अल्मोड़ा द्वारा अध्यक्ष डॉ. कपिल शर्मा और सचिव डॉ. अनुपमा त्यागी के नेतृत्व में चिकित्सकों ने अपने-अपने चिकित्सालयों में ओपीडी सेवाएं संचालित करते हुए विरोध दर्ज कराया। संघ पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने चिकित्सकों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी शासन और विभागीय अधिकारियों की होगी।

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