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मीडिया और लोकतंत्र में डिजिटल मीडिया की भूमिका पर व्याख्यान आयोजित

देहरादून। दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र में शनिवार को “मीडिया और लोकतंत्र : उद्यमी पत्रकारिता व डिजिटल जन समूह” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। मीडिया अध्ययन के विशेषज्ञ प्रो. अनूप कुमार ने व्याख्यान देते हुए कहा कि मीडिया और लोकतंत्र के संबंधों को समझने के लिए जनमत निर्माण की प्रक्रिया को गहराई से समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यूट्यूब और सोशल मीडिया के दौर में उद्यमी पत्रकारिता के तेजी से उभरने तथा डिजिटल जनसमूह के विस्तार ने पत्रकारों को जनमत का नेता बना दिया है। वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर सक्रिय अनेक पत्रकार लोगों को यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि किसी मुद्दे पर कैसे सोचना है, जबकि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य तथ्यों को सामने लाकर लोगों को स्वयं राय बनाने में सक्षम बनाना है।

प्रो. कुमार ने कहा कि मौलिक रिपोर्टिंग में कमी और विचारप्रधान सामग्री की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण समाज में परस्पर विरोधी धारणाओं का टकराव बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम दर्शकों को प्रायः वही सामग्री दिखाते हैं, जो उनकी पसंद के अनुरूप होती है। इससे लोग विभिन्न दृष्टिकोणों और तथ्यों से दूर होकर विचारों के सीमित दायरे में सिमट सकते हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में मीडिया की जिम्मेदारी तथ्यों को स्थापित करना और महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाना है, ताकि नागरिक सूचित निर्णय ले सकें।
प्रो. अनूप कुमार वर्तमान में अमेरिका की क्लीवलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी में निदेशक एवं प्रोफेसर हैं। पत्रकारिता और मीडिया अध्ययन के क्षेत्र में उनके शोध कार्य अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। वे “द मेकिंग ऑफ ए स्मॉल स्टेट” पुस्तक के लेखक भी हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चंद्रशेखर तिवारी ने स्वागत भाषण से की। हिमांशु आहूजा ने प्रो. अनूप कुमार का परिचय कराया, जबकि निकोलस हॉफलैण्ड ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने मीडिया और लोकतंत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रश्न भी पूछे।
इस अवसर पर राजू गुंसाई, एल.ए. सीली, मदन डुकलान, भूमेश भारती, प्रेम पंचोली, आलोक सरीन, संदीप सिंह, डॉ. लालता प्रसाद, सुंदर बिष्ट, जगदीश बाबला, परमजीत सिंह, देवेंद्र कांडपाल सहित अनेक लेखक, साहित्यकार, पत्रकार आदि मौजूद रहे।

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