Uttarakhandउत्तराखंडजागरूकताजिम्मेदारीदावा

तपोवन विष्णुगाड परियोजना में बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल, आपदा से निपटने की तैयारियों का हुआ व्यापक परीक्षण

देहरादून।/जोशीमठ। एनटीपीसी की तपोवन विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना में आपदा प्रबंधन एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की प्रभावशीलता को परखने के लिए गुरुवार को एक व्यापक बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया। बैराज स्थल और हेड रेस टनल (एचआरटी) क्षेत्र में आयोजित इस अभ्यास में सेना, अर्धसैनिक बलों, आपदा राहत एजेंसियों और जिला प्रशासन सहित विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय संस्थाओं ने भाग लेकर आपात परिस्थितियों से निपटने की अपनी तैयारियों का प्रदर्शन किया।

बादल फटने और अचानक बाढ़ की स्थिति का किया गया अभ्यास

मॉक ड्रिल के दौरान सुराईथोटा क्षेत्र में बादल फटने की काल्पनिक स्थिति तैयार की गई। परिकल्पना के अनुसार क्षेत्र में अचानक भारी वर्षा होने से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। इस स्थिति में परियोजना के सेंसर स्टेशन की चेतावनी सीमा को अस्थायी रूप से कम किया गया, जिसके बाद चेतावनी सायरन बज उठा और ऑटोमेटेड फ्लड वार्निंग सिस्टम तत्काल सक्रिय हो गया। चेतावनी मिलते ही आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र ने निर्धारित मानकों के अनुसार कार्रवाई शुरू कर दी।

सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ समेत कई एजेंसियों ने लिया हिस्सा

अभ्यास में एनटीपीसी और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के नेतृत्व में भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), उत्तराखंड पुलिस, अग्निशमन सेवा, खुफिया ब्यूरो (आईबी), सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) तथा जिला प्रशासन की टीमों ने भाग लिया। इसके अलावा परियोजना से जुड़ी निर्माण एवं तकनीकी कंपनियां मैसर्स पीईएस, मैसर्स ओआईएल और मैसर्स एचसीसी भी इस अभ्यास में सक्रिय रूप से शामिल रहीं।

सुरंग के भीतर खोज एवं बचाव अभियान चला

मॉक ड्रिल के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में हेड रेस टनल के भीतर खोज एवं बचाव अभियान संचालित किया गया। प्रशिक्षित स्निफर डॉग्स की सहायता से सुरंग में फंसे और लापता व्यक्तियों की तलाश की गई। इसके साथ ही बचाव दलों ने सुरंग के भीतर सुरक्षित निकासी, घायलों को बाहर निकालने तथा आपातकालीन संचार व्यवस्था की कार्यप्रणाली का भी परीक्षण किया।

नदी पार रेस्क्यू और जल बचाव अभियान का प्रदर्शन

अभ्यास के दौरान नदी में बचाव अभियान, नदी पार रेस्क्यू ऑपरेशन और आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया से जुड़े विभिन्न परिदृश्यों का भी प्रदर्शन किया गया। राहत एवं बचाव दलों ने आधुनिक उपकरणों और विशेष तकनीकों का उपयोग करते हुए संभावित आपदा के दौरान जीवन रक्षा संबंधी उपायों का अभ्यास किया। इससे विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल, समन्वय और संसाधनों के प्रभावी उपयोग की क्षमता का परीक्षण हुआ।

घायलों को अस्पताल पहुंचाकर चिकित्सा व्यवस्था भी परखी गई

मॉक ड्रिल के तहत घायलों के सुरक्षित रेस्क्यू की प्रक्रिया को भी अंजाम दिया गया। बचावकर्मियों ने घायलों को घटनास्थल से सुरक्षित बाहर निकालकर एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया, जहां उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इस प्रक्रिया के माध्यम से आपदा की स्थिति में राहत, प्राथमिक उपचार और चिकित्सा प्रबंधन की संपूर्ण व्यवस्था का परीक्षण किया गया।

समीक्षा बैठक में साझा किए गए अनुभव और सुझाव

अभ्यास के समापन के बाद एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में परियोजना के कार्यकारी निदेशक एवं परियोजना प्रमुख अजय कुमार शुक्ला, सीआईएसएफ के सहायक कमांडेंट, सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी तथा विभिन्न एजेंसियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में मॉक ड्रिल के दौरान सामने आए अनुभवों, चुनौतियों और सुझावों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा भविष्य में आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कदमों पर विचार किया गया।

आपदा के समय जिम्मेदारियों की स्पष्ट समझ जरूरी : अजय कुमार शुक्ला

एनटीपीसी तपोवन विष्णुगाड परियोजना के कार्यकारी निदेशक एवं परियोजना प्रमुख अजय कुमार शुक्ला ने कहा कि इस प्रकार के नियमित अभ्यास आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को मजबूत बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा या आपात स्थिति के दौरान प्रत्येक व्यक्ति और एजेंसी को अपनी जिम्मेदारियों की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए, ताकि कम समय में प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास, त्वरित निर्णय क्षमता और बेहतर समन्वय ही किसी भी बड़ी आपदा के प्रभाव को कम करने में सबसे अधिक सहायक सिद्ध होते हैं।

सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रदर्शन

इस सफल बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल ने न केवल तपोवन विष्णुगाड परियोजना की आपदा प्रबंधन संबंधी तैयारियों का परीक्षण किया, बल्कि परियोजना की सुरक्षा, परिचालन उत्कृष्टता और जोखिम प्रबंधन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय और संवेदनशील क्षेत्रों में संचालित परियोजनाओं के लिए इस प्रकार के अभ्यास भविष्य की चुनौतियों से निपटने में अत्यंत उपयोगी साबित होते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button