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देहरादून कैंट बोर्ड में भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल, मेडिकल ऑफिसर नियुक्ति को लेकर पक्षपात और नियमों में बदलाव के आरोप

देहरादून। नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर अक्सर पहले से सवालों के घेरे में रहे देहरादून कैंट बोर्ड पर अब भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पक्षपात के गंभीर आरोप लगे हैं। कैंट बोर्ड के अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर के पद पर नियुक्ति को लेकर नियमों में बार-बार बदलाव किए जाने से अभ्यर्थियों में रोष व्याप्त है और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। अभ्यर्थियों ने रक्षा मंत्रालय से पूरे प्रकरण का संज्ञान लेने तथा स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।

मिली जानकारी के अनुसार, कैंट बोर्ड ने पूर्व में मेडिकल ऑफिसर पद के लिए जारी भर्ती विज्ञापन में अभ्यर्थियों के लिए तीन वर्ष के अनुभव की अनिवार्य शर्त निर्धारित की गई थी। आरोप है कि बाद में एक विशेष अभ्यर्थी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अनुभव संबंधी मानकों को दरकिनार करने की कोशिश की गई। उस समय एक पात्र अभ्यर्थी द्वारा कैंट बोर्ड अध्यक्ष और तत्कालीन मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) से शिकायत किए जाने के बाद भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी। सूत्रों का दावा है कि तत्कालीन सीईओ हरेंद्र सिंह के स्थानांतरण के बाद अब उसी पद पर नियुक्ति प्रक्रिया को नए तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। आरोप है कि इस बार भर्ती विज्ञापन से अनुभव की अनिवार्य शर्त ही हटा दी गई है, जिससे चयन प्रक्रिया को लेकर नए विवाद खड़े हो गए हैं।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि अस्पताल में कार्यरत एक वरिष्ठ फार्मेसिस्ट की पुत्री को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियमों में बदलाव किया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि ऐसा हुआ है तो यह भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
मामले को और अधिक विवादास्पद बनाते हुए कुछ अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि चयन प्रक्रिया में ऐसे उम्मीदवारों को भी शामिल किया गया है जिनकी शैक्षिक योग्यता मेडिकल ऑफिसर पद की निर्धारित पात्रता से मेल नहीं खाती। इस संबंध में अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया की संपूर्ण जांच कराने की मांग की है। पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि भर्ती नियमों के साथ गंभीर खिलवाड़ का मामला है। उन्होंने रक्षा मंत्रालय से पूरे प्रकरण का संज्ञान लेने तथा स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और योग्य उम्मीदवारों के हितों की रक्षा के लिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। साथ ही दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति न हो सके।

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