कला, संस्कृति और जनजागरण में योगदान के लिए वरिष्ठ रंगकर्मी जयप्रकाश राणा को मानद डॉक्टरेट सम्मान

उत्तरकाशी। जनपद के वरिष्ठ रंगकर्मी, लोक कलाकार एवं सांस्कृतिक कर्मी जयप्रकाश राणा को कला, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट एवं दीर्घकालिक योगदान के लिए पीएचएचडी मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड फाउंडेशन द्वारा मानद डॉक्टरेट अवार्ड से सम्मानित किया गया है। इस सम्मान से उत्तरकाशी सहित पूरे उत्तराखंड के सांस्कृतिक जगत में खुशी की लहर है।

जयप्रकाश राणा लंबे समय से उत्तराखंड की लोक कला, रंगमंच और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। संगीत के क्षेत्र में उन्होंने तबला वादन में विशारद की उपाधि प्राप्त की है तथा उत्तराखंड की प्राचीन लोक परंपरा ‘ढोल सागर’ में भी विशेष दक्षता हासिल की है। उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र से ढोल की लगभग 300 पारंपरिक तालों का गहन अध्ययन किया है। रंगमंच के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने अनेक लोकनाट्यों में लेखक, निर्देशक, अभिनेता और संगीतकार के रूप में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उनके प्रमुख लोकनाट्यों में ‘जीतू बगड़वाल’, ‘गंगू रमोला’, ‘नरु बिजोला’, ‘कचड़ु देवता’ और ‘औस्यालु’ जैसे चर्चित नाट्य मंचन शामिल हैं, जिन्होंने उत्तराखंड की लोक संस्कृति और इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर भी जयप्रकाश राणा लगातार सक्रिय रहे हैं। उन्होंने प्रदेश के लगभग दस जिलों में सैकड़ों नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से जनजागरण अभियान चलाए हैं। इन अभियानों के जरिए शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तथा जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर लोगों को जागरूक किया गया। मानद डॉक्टरेट सम्मान प्राप्त होने पर क्षेत्र के कलाकारों, साहित्यकारों, सांस्कृतिक कर्मियों और सामाजिक संगठनों ने उन्हें बधाई देते हुए इसे उत्तरकाशी और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।
