हर्षिल-धराली क्षेत्र की बदहाल स्थिति पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की चिंता, 10 दिन में काम शुरू न हुआ तो अनशन की चेतावनी

देहरादून।उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने दो दिवसीय उत्तरकाशी दौरे के दौरान हर्षिल-धराली क्षेत्र के आपदाग्रस्त इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने क्षेत्र की संवेदनशील स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हर्षिल क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल ठोस और प्रभावी सुरक्षात्मक कार्य किए जाना अत्यंत आवश्यक है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार हो रहे भूस्खलन और आपदा के प्रभाव से क्षेत्र की स्थिति गंभीर बनी हुई है, लेकिन अब तक अपेक्षित स्तर पर पुनर्निर्माण कार्य शुरू नहीं होना चिंताजनक है। उन्होंने प्रशासन को जल्द से जल्द कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। हर्षिल-धराली क्षेत्र की बिगड़ती स्थिति और पुनर्निर्माण कार्यों में देरी को लेकर अब राजनीतिक माहौल भी गर्माने लगा है। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
इस दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष एवं पूर्व राज्यमंत्री घनानंद नौटियाल, शांति प्रसाद भट्ट, दर्शन लाल, भूपेंद्र पंवार, कनकपाल परमार, मनीष राणा, मनोज मीनान, कमल सिंह रावत, सुधीश पंवार, विजेंद्र नौटियाल, बिपिन नौटियाल सहित अनेक कांग्रेसी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कांग्रेस की चेतावनी: 10 दिन में काम नहीं तो आमरण अनशन
जिला कांग्रेस कमेटी उत्तरकाशी के जिलाध्यक्ष प्रदीप रावत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि आगामी 10 दिनों के भीतर सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं किए गए, तो कांग्रेस पार्टी हर्षिल में ही आमरण अनशन करने को बाध्य होगी। उन्होंने सरकार और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता को अब और इंतजार नहीं कराया जा सकता।
गंगोत्री हाईवे की हालत बदहाल
निरीक्षण के दौरान गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग की जर्जर स्थिति भी सामने आई। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे, क्षतिग्रस्त पुल और ढहे हुए पुश्ते देखे गए। बताया गया कि आपदा को आठ महीने बीत जाने के बावजूद अब तक पुनर्निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है, जो प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं, डीएम से की वार्ता
धराली पहुंचकर हरीश रावत ने स्थानीय ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया। इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी से मुलाकात कर विस्तृत चर्चा की और आवश्यक सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 की केदारनाथ आपदा के बाद उनके नेतृत्व में हुए पुनर्निर्माण कार्यों को आज भी प्रदेश में एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा जाता है। उसी तर्ज पर हर्षिल-धराली क्षेत्र में भी तेजी और पारदर्शिता के साथ कार्य किया जाना चाहिए।
