गौरव…..दो भाई, दो राज्यों की कमान: आनंद बर्धन के बाद अब ज्ञानेश भारती भी बने मुख्य सचिव

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन के परिवार के लिए प्रशासनिक क्षेत्र से एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। उनके छोटे भाई और 1998 बैच के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश भारती को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को उनकी नियुक्ति का आदेश जारी किया। नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू की गई है।

बता दें कि ज्ञानेश भारती इससे पहले भारत निर्वाचन आयोग में उप निर्वाचन आयुक्त (Deputy Election Commissioner) के पद पर कार्यरत थे। नियुक्ति से पहले उन्हें केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद उनके मूल एजीएमयूटी (AGMUT) कैडर में वापस भेजा गया। इसके बाद गृह मंत्रालय ने उन्हें अंडमान एवं निकोबार प्रशासन का मुख्य सचिव नियुक्त किया।
एक ही परिवार के दो भाई, दोनों महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी पर
ज्ञानेश भारती की नई नियुक्ति का उत्तराखंड से भी खास संबंध है। उनके बड़े भाई आनंद बर्धन 1992 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में उत्तराखंड के मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत हैं। आनंद बर्धन ने अप्रैल 2025 में उत्तराखंड के मुख्य सचिव का पद संभाला था। इस तरह अब एक ही परिवार के दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी देश के अलग-अलग महत्वपूर्ण प्रशासनिक क्षेत्रों में मुख्य सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उत्तराखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी आनंद बर्धन को मुख्य सचिव के रूप में दर्ज किया गया है। प्रशासनिक दृष्टि से यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि दोनों भाई लंबे अनुभव वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं और दोनों को अलग-अलग महत्वपूर्ण प्रशासनिक क्षेत्रों की शीर्ष जिम्मेदारी मिली है। एक ओर आनंद बर्धन हिमालयी राज्य उत्तराखंड की प्रशासनिक व्यवस्था का नेतृत्व कर रहे हैं, वहीं ज्ञानेश भारती अब रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के प्रशासन की कमान संभालेंगे।
चुनाव आयोग में निभाई अहम जिम्मेदारी
ज्ञानेश भारती का प्रशासनिक करियर भी काफी महत्वपूर्ण रहा है। वे अगस्त 2025 में भारत निर्वाचन आयोग में उप निर्वाचन आयुक्त नियुक्त हुए थे। निर्वाचन आयोग में रहते हुए उन्होंने इस वर्ष पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी संभाली। इससे पहले वे केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में अपर सचिव के पद पर कार्यरत रहे। वर्ष 2022 से 2024 के बीच उन्होंने दिल्ली नगर निगम के आयुक्त के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। दिल्ली नगर निगम जैसे बड़े शहरी निकाय की जिम्मेदारी से लेकर केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालय और फिर निर्वाचन आयोग में वरिष्ठ दायित्व तक ज्ञानेश भारती को प्रशासनिक और नीतिगत मामलों का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ है।
बांका के कटोरिया से दिल्ली तक का सफर
ज्ञानेश भारती मूल रूप से बिहार के बांका जिले के कटोरिया बाजार के रहने वाले हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा कटोरिया में हुई। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली का रुख किया। संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद वे भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए। कटोरिया जैसे छोटे कस्बे से निकलकर देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवाओं में जगह बनाने और अब केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचने की उनकी यात्रा को क्षेत्र के लोग गौरव के रूप में देख रहे हैं।
अंडमान-निकोबार की प्रशासनिक जिम्मेदारी अब ज्ञानेश भारती के कंधों पर
अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह देश की सामरिक और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण केंद्र शासित क्षेत्र है। ऐसे में मुख्य सचिव के रूप में ज्ञानेश भारती के सामने प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ विकास, आधारभूत ढांचे, जनकल्याणकारी योजनाओं और केंद्र की नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी।
केंद्र सरकार के आदेश के अनुसार उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से की गई है।
उत्तराखंड से जुड़ी उपलब्धि ने बढ़ाया गौरव
ज्ञानेश भारती की नियुक्ति के बाद उत्तराखंड में भी इस खबर को खास तौर पर देखा जा रहा है। एक ही परिवार के दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों का अलग-अलग राज्यों एवं केंद्र शासित क्षेत्रों में मुख्य सचिव जैसे शीर्ष प्रशासनिक पद पर पहुंचना दुर्लभ उपलब्धि है। एक भाई उत्तराखंड के मुख्य सचिव, दूसरा अंडमान-निकोबार का मुख्य सचिव—बर्धन-भारती परिवार की यह प्रशासनिक उपलब्धि अब देशभर में चर्चा का विषय बन गई है।