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उत्तराखंड लोक सेवा आयोग में लेफ्टिनेंट जनरल गजेंद्र जोशी बने अध्यक्ष, भर्ती प्रक्रिया में आएगी पारदर्शिता और तेजी

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने लंबे समय से रिक्त चल रहे उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) के अध्यक्ष पद पर भारतीय सेना के वरिष्ठ और सेवानिवृत्त अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल गजेंद्र जोशी (PVSM, AVSM, SM) की नियुक्ति कर राज्य की भर्ती व्यवस्था को नया नेतृत्व दिया है। सैन्य अनुशासन, निष्पक्ष कार्यशैली और प्रशासनिक अनुभव के लिए पहचाने जाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल जोशी की नियुक्ति को सरकार का एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी निर्णय माना जा रहा है।

मूल रूप से चम्पावत जिले के लटोली गांव के निवासी लेफ्टिनेंट जनरल गजेंद्र जोशी का भारतीय सेना में लंबा और गौरवशाली करियर रहा है। उन्होंने देश की सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया है और अपनी रणनीतिक क्षमता, नेतृत्व कौशल तथा उत्कृष्ट सेवाओं के कारण सेना में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। हाल ही में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा देश के सर्वोच्च शांतिकालीन सैन्य सम्मानों में से एक परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान राष्ट्र के प्रति उनकी असाधारण एवं विशिष्ट सैन्य सेवाओं के लिए प्रदान किया गया। इससे पहले उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और सेना मेडल (SM) से भी सम्मानित किया जा चुका है।
लेफ्टिनेंट जनरल जोशी ने अपने सैन्य जीवन के दौरान श्रीलंका में ‘ऑपरेशन पवन’, पूर्वोत्तर भारत में आतंकवाद विरोधी अभियानों तथा जम्मू-कश्मीर में ‘ऑपरेशन रक्षक’ जैसे चुनौतीपूर्ण अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा उन्होंने भारतीय सेना की प्रतिष्ठित स्ट्राइक-1 कोर के कमांडर तथा महू स्थित इन्फैंट्री स्कूल के कमांडेंट जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी सफलतापूर्वक कार्य किया।
उत्तराखंड सरकार को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष, समयबद्ध और जवाबदेह बनेगी। आयोग की लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को गति मिलने, परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने तथा चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बीते वर्षों में राज्य में भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे विभिन्न विवादों और नकल प्रकरणों के बाद सरकार लगातार भर्ती व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे समय में एक अनुभवी सैन्य अधिकारी को आयोग की जिम्मेदारी सौंपना युवाओं का विश्वास मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य के लाखों प्रतियोगी अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि नए अध्यक्ष के नेतृत्व में आयोग समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर, शीघ्र परिणाम, पारदर्शी चयन प्रक्रिया और लंबित भर्तियों के निस्तारण पर विशेष ध्यान देगा।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि सेना में दशकों तक नेतृत्व का अनुभव रखने वाले लेफ्टिनेंट जनरल गजेंद्र जोशी आयोग की कार्यसंस्कृति में अनुशासन, दक्षता और विश्वसनीयता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सरकार के इस फैसले को राज्य की भर्ती प्रणाली को मजबूत करने और युवाओं के हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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