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धराली आपदा के एक वर्ष: राहत से पुनर्वास तक धराली में पुनर्निर्माण का नया अध्याय

देहरादून। धराली-हर्षिल क्षेत्र में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के एक वर्ष पूर्ण होने पर जनपद उत्तरकाशी में राहत, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण कार्यों को तीव्र गति से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन एवं जिला प्रशासन उत्तरकाशी के समन्वित प्रयासों से प्रभावित क्षेत्रों में राहत वितरण, पुनर्वास तथा आधारभूत सुविधाओं की बहाली का कार्य निरंतर जारी है। सरकार ने आपदा प्रभावित प्रत्येक परिवार तक सहायता पहुंचाने को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभिन्न मदों में आर्थिक सहायता एवं पुनर्वास योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया है।

आपदा के दौरान धराली क्षेत्र में मृतकों के आश्रितों को एसडीआरएफ मानकों के अनुसार 4 लाख रुपये तथा मुख्यमंत्री राहत कोष से 1 लाख रुपये प्रति परिवार, कुल 5 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त शासन की गाइडलाइन के अनुसार अब तक 19 लापता व्यक्तियों को मृत घोषित कर उनके आश्रितों को भी आर्थिक सहायता वितरित की जा चुकी है। आपदा में 18 लोग घायल हुए, जिनमें 5 सामान्य एवं 13 गंभीर घायल शामिल थे। सभी घायलों को निर्धारित मानकों के अनुरूप आर्थिक सहायता प्रदान की गई। वहीं 115 पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त आवासीय भवनों के स्वामियों को 5-5 लाख रुपये की सहायता सहित कुल रू. 575 लाख राशि उपलब्ध कराई गई। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त भवनों तथा अहैतुक सहायता के प्रकरणों में भी प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत राशि वितरित की गई।

व्यावसायिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से धराली एवं हर्षिल क्षेत्र के होटल एवं दुकान संचालकों को मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई गई। अब तक प्रभावित होटल स्वामियों को 6 करोड़ 83 लाख 73 हजार 848 रुपये से अधिक की सहायता वितरित की जा चुकी है तथा शेष प्रकरणों में स्वीकृति एवं वितरण की प्रक्रिया जारी है। आपदा में बेघर हुए 115 परिवारों को छह माह तक 4 हजार प्रतिमाह की दर से 24 हजार प्रति परिवार किराया राशि सहायता उपलब्ध कराई गई।

धराली आपदा: सरकार और जिला प्रशासन ने सुरक्षा कार्यों को दी सर्वोच्च प्राथमिकता

सिंचाई विभाग द्वारा राहत, बचाव एवं सुरक्षात्मक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संचालित किया जा रहा है। सिंचाई विभाग द्वारा एसडीआरएफ मद के अंतर्गत लगभग ₹384.61 लाख की लागत से भागीरथी नदी, खीर गाड़ एवं तेल गाड़ में नदी चैनलाइजेशन, मलबा हटाने, तट सुरक्षा, बोल्डर क्रेटिंग, वायर क्रेट, सुरक्षात्मक दीवार निर्माण, झील का नियंत्रित निकास, आवासीय भवनों एवं राष्ट्रीय राजमार्ग की सुरक्षा सहित कुल 15 सुरक्षात्मक कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से अधिकांश कार्य पूर्ण हो चुके हैं तथा शेष कार्य तेजी से प्रगति पर हैं। जिला प्रशासन द्वारा सभी कार्यों की सतत निगरानी की जा रही है ताकि भविष्य में संभावित आपदा जोखिम को कम करते हुए नागरिकों एवं आधारभूत संरचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

उद्यान विभाग : सेब बागानों एवं बागवानी को मिला नया संबल

आपदा के उपरांत बागवानी एवं कृषि क्षेत्र को उबारने हेतु उद्यान विभाग द्वारा माननीय मुख्यमंत्री घोषणा संख्या के अंतर्गत कुल ₹ 234.02 लाख की योजनाएं संचालित की गईं। इसके तहत हर्षिल घाटी के कृषकों के 256.83 मीट्रिक टन सेब का उपार्जन कर ₹ 115.94 लाख की धनराशि सीधे बागवानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की गई। इसके अतिरिक्त कृषकों को उपज सुरक्षित रखने हेतु ₹ 18.57 लाख के 25,450 कोरोगेटेड बॉक्स, ₹ 10.11 लाख के 4,100 प्लास्टिक क्रेट व किल्टा, 50 प्रतिशत सहायता पर ₹ 6.00 लाख के हाइब्रिड सब्जी बीज तथा ₹ 0.19 लाख मूल्य की फल पौध वितरित की गई। फसल सुरक्षा के दृष्टिगत ₹ 41.21 लाख के कीटनाशक व रसायन तथा राज्य व जिला योजना के तहत ₹ 40.00 लाख की सामग्री 100 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराई गई। वहीं आपदा राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं राहतकर्मियों के भोजन हेतु स्थानिक कृषकों से ₹ 2.00 लाख मूल्य की 38.11 कुंतल सब्जियों का उपार्जन कर रसद आपूर्ति सुदृढ़ की गई।

धराली आपदा के बाद लोनिवि भटवाड़ी ने दी सड

लोक निर्माण विभाग, भटवाड़ी द्वारा सड़क संपर्क एवं आवागमन को शीघ्र बहाल करने के लिए त्वरित कार्रवाई की गई। एसडीआरएफ मद के अंतर्गत ₹88.25 लाख की लागत से चार महत्वपूर्ण कार्य संपादित किए गए, जिनमें धराली पुल का सुधार, हर्षिल मुख्य मोटर मार्ग का मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क संपर्क की बहाली तथा मुखवा-हर्षिल-धराली क्षेत्र में राहत सामग्री की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक मार्ग का निर्माण शामिल है। विभाग द्वारा सभी स्वीकृत कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन सुचारु हुआ है और स्थानीय लोगों के साथ-साथ राहत एवं बचाव कार्यों को भी गति मिली है।

कृषि विभाग : किसानों को राहत एवं कृषि गतिविधियों का पुनर्जीवन

कृषि विभाग द्वारा ₹ 40.92 लाख की लागत से कृषकों की आजीविका सुरक्षा के कार्य पूर्ण किए गए। जिला योजना के अंतर्गत ग्राम धराली के 274 कृषकों को ₹ 35.00 लाख मूल्य के लघु कृषि यंत्र (जैसे गार्डन रैक, खुरपा, कुदाल, दांती, तलवार, प्रूनिंग सॉ, सेकैटियर) तथा कृषि निवेश (यारा कॉम्प्लेक्स, यारा नाइट्रोबोर, बड बिल्डर, कार्बेंडाजिम) 100 प्रतिशत अनुदान पर वितरित किए गए। कृषि भूमि की सिंचाई समस्या के समाधान हेतु धराली क्षेत्र में ₹ 5.92 लाख की लागत से 04 जियो-लाइन टैंक एवं 04 स्प्रिंकलर सेट स्थापित कर सूक्ष्म सिंचाई सुविधा विकसित की गई।

पशुपालन विभाग : पशुधन क्षति पर सहायता एवं आजीविका को संवर्धन

पशुधन संरक्षण एवं पशुपालकों के पुनर्वास हेतु पशुपालन विभाग द्वारा SDRF मद के तहत आपदा में मृत 235 पशुओं की क्षतिपूर्ति हेतु 13 प्रभावित पशुपालकों को ₹ 10.94 लाख की अनुग्रह राशि प्रदान की गई। आजीविका संवर्धन हेतु राज्य सेक्टर योजना से 3 लाभार्थियों को भेड़-बकरी पालन हेतु ₹ 1.89 लाख तथा जिला योजना पोषित ‘गोट वैली योजना’ से 7 लाभार्थियों को ₹ 4.41 लाख से आच्छादित किया गया। इसके अलावा धराली में बहुउद्देशीय पशुचिकित्सा शिविर का आयोजन कर 25 पशुपालकों को निःशुल्क औषधियां व पशु-स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।

समन्वित विभागीय प्रयासों से भागीरथी घाटी में पटरी पर आया जनजीवन

अवस्थापना, बुनियादी ढांचे तथा ग्राम्य विकास कार्यों के अंतर्गत जिला ग्राम्य विकास अभिकरण व अन्य कार्यदायी संस्थाओं द्वारा विभिन्न विकास योजनाएं पूर्ण की गई हैं। यूरेडा (UREDA) द्वारा ₹ 13.93 लाख की लागत से वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सोलर स्ट्रीट लाइट एवं हाई मास्ट लाइटों की स्थापना शत-प्रतिशत पूर्ण कर ली गई है। वन विभाग द्वारा धराली से झिंडा तक ₹ 55.00 लाख की लागत से ट्रैकिंग मार्ग का निर्माण कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है। विकासखण्ड भटवाड़ी द्वारा रू. 20 लाख, विद्युत विभाग द्वारा रू. 177 लाख, आजीविका संवर्धन हेतु रीप द्वारा रू. 297 लाख, राहत बचाव कार्य हेतु तहसील भटवाड़ी द्वारा रू. 453 लाख, पर्यटन विभाग द्वारा रू. 15 लाख, खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा रू. 187 लाख, शिक्षा विभाग द्वारा शासकीय प्राथमिक विद्यालय धराली में ₹ 6.00 लाख की लागत से बाल पेंटिंग, बाल-अनुकूल फर्नीचर, टीवी व कंप्यूटर स्थापित कर स्मार्ट शिक्षण वातावरण तैयार किया गया है। मत्स्य विभाग हेतु ₹ 4.00 लाख की लागत से फिश कियोस्क निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। पंचायती राज व ग्राम्य विकास द्वारा राज्य वित्त एवं 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत सुशीला देवी के बगीचे की घेराबंदी व सुरक्षा दीवार (₹ 2.50 लाख), प्रभा देवी के रास्ते में सुरक्षा कार्य (₹ 0.50 लाख), पंचायत चौक में PCC व टाइल्स निर्माण (₹ 1.40 लाख व ₹ 0.65 लाख), गंगा किनारे सुरक्षा दीवार (₹ 0.65 लाख) तथा धराली स्वागत गेट पर टाइल्स निर्माण (₹ 0.78 लाख) के समस्त सिविल कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिए गए हैं।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार जिला प्रशासन आपदा प्रभावित प्रत्येक परिवार के साथ मजबूती से खड़ा है। राहत एवं पुनर्वास का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के जीवन को पुनः सामान्य बनाना तथा क्षेत्र का सुरक्षित एवं स्थायी पुनर्निर्माण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास एवं विकास कार्य पूरी प्रतिबद्धता के साथ चल रहे हैं। जिला प्रशासन सभी विभागों के समन्वय से पुनर्वास कार्यों की नियमित समीक्षा कर रहा है। प्रत्येक पात्र प्रभावित परिवार तक सहायता पहुंचाने तथा पुनर्निर्माण कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

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