चिकित्सकों की 11 मांगों पर स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन, 15 दिन का अल्टीमेटम

देहरादून। प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ उत्तराखंड ने चिकित्सकों की लंबे समय से लंबित 11 मांगों के निस्तारण को लेकर स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन भेजा है। संघ ने शासन को 15 दिन का समय देते हुए चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो चिकित्सक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।
संघ के अध्यक्ष डॉ. रमेश कुंवर और महासचिव डॉ. यशपाल सिंह तोमर की ओर से भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि चिकित्सकों की समस्याओं और मांगों को लेकर पूर्व में भी शासन को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से चिकित्सकों में नाराजगी बढ़ रही है। संघ ने बताया कि इस संबंध में छह अप्रैल और 27 जून 2026 को भी शासन को पत्र भेजे गए थे।
स्थानांतरण नीति में संशोधन की मांग
संघ ने स्थानांतरण के बाद उत्पन्न असंतुलन को दूर करने के लिए स्थानांतरण नीति में आवश्यक संशोधन करने की मांग की है। संघ का कहना है कि कई बीमार चिकित्सकों का पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानांतरण किया गया है, जबकि युगल दंपती चिकित्सकों को अलग-अलग स्थानों पर तैनाती दी गई है। ऐसे मामलों में मानवीय और व्यावहारिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण संबंधी संशोधनों को पूरी तरह लागू करने की मांग की गई है।
एसडीएसीपी का लाभ दिलाने की मांग
चिकित्सकों ने विशेष गतिशील सुनिश्चित कैरियर प्रगति योजना (एसडीएसीपी) का लाभ देने की मांग भी उठाई है। संघ के अनुसार यह लाभ लंबे समय से लंबित है। इसके साथ ही पूर्ण सेवा अवधि में एक बार मिलने वाले छूट संबंधी प्रावधान का लाभ भी चिकित्सकों को दिए जाने की मांग की गई है।
हर साल डीपीसी कराने पर जोर
संघ ने रिक्त पदों के सापेक्ष प्रत्येक वर्ष विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) कराने की मांग की है। कहा गया है कि विभाग में रिक्त पद उपलब्ध होने के बावजूद कई वर्षों तक डीपीसी नहीं होने से चिकित्सकों की पदोन्नति प्रभावित हो रही है। संघ ने भविष्य में रोस्टर तैयार करने और रिक्त पद उपलब्ध होते ही संबंधित चिकित्सकों की डीपीसी कराने की मांग की है।
चार क्षेत्रों को फिर दुर्गम घोषित करने की मांग
संघ ने अल्मोड़ा जिला मुख्यालय, टिहरी जिला मुख्यालय, नैनीताल जिला मुख्यालय और मसूरी नगर क्षेत्र को दोबारा दुर्गम क्षेत्र घोषित करने की मांग की है। संघ के मुताबिक पूर्व में ये क्षेत्र दुर्गम श्रेणी में शामिल थे। इन्हें फिर से दुर्गम घोषित करने से चिकित्सकों को स्थानांतरण और अन्य सेवा संबंधी लाभ मिल सकेंगे।
चिकित्सकीय पदों में बढ़ोतरी
ज्ञापन में विभागीय आवश्यकता के अनुरूप एमओ, एमओ-1, एसएमओ, जेएमओ, एसीएमओ और निदेशक के पदों की संख्या बढ़ाने की मांग भी की गई है। संघ का कहना है कि चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकेगा।
जिला चिकित्सालयों के स्थानांतरण का विरोध
संघ ने जिला चिकित्सालयों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किए जाने का विरोध किया है। संघ के अनुसार चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग वर्ष 2013 से अलग-अलग प्रशासनिक सेवाओं के रूप में कार्य कर रहे हैं। ऐसे में जिला चिकित्सालयों के स्थानांतरण से प्रशासनिक स्तर पर कई तरह की दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। संघ ने कहा कि जिला मुख्यालय पर जिला चिकित्सालय नहीं होने की स्थिति में मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पोस्टमार्टम, वीआईपी ड्यूटी और मेडिकल बोर्ड के गठन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही विभिन्न विभागों के बीच प्रशासनिक समन्वय को लेकर भी टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
अस्पतालों में पुलिस चौकी और चिकित्सकों के लिए आवास
चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर संघ ने सभी स्थानीय एवं राजकीय चिकित्सालयों में पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग की है। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, संयुक्त चिकित्सालयों और जिला चिकित्सालयों में स्वीकृत पदों के अनुरूप चिकित्सकों के लिए आवासीय सुविधा विकसित करने की मांग की गई है।
पीजी सीटों में पीएमएचएस अभ्यर्थियों को आरक्षण
संघ ने उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटों में प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा (पीएमएचएस) के चिकित्सकों के लिए आरक्षण की मांग भी उठाई है। संघ का कहना है कि इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत चिकित्सकों को उच्च चिकित्सा शिक्षा के अवसर मिल सकेंगे।
सेवानिवृत्त चिकित्सकों को पर्वतीय क्षेत्रों में तैनाती
संघ ने सेवानिवृत्ति के बाद संविदा पर सेवाएं दे रहे चिकित्सकों को प्राथमिकता के आधार पर पर्वतीय क्षेत्रों में तैनाती देने की मांग की है। इसके साथ ही सेवा अवधि के दौरान स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने वाले दंत रोग विशेषज्ञों को पीजी भत्ता देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई है।
15 दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन
प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ ने स्पष्ट किया है कि चिकित्सकों की ये मांगें लंबे समय से शासन के समक्ष लंबित हैं। संघ ने स्वास्थ्य मंत्री से सभी मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने की मांग करते हुए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। संघ ने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में मांगों का समाधान नहीं होने पर संगठन आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य होगा।
