पंचायतों के सशक्तिकरण के लिए प्रधान संगठन ने पंचायती राज मंत्री से की मुलाकात, रखीं कई महत्वपूर्ण मांगें

देहरादून। उत्तराखंड प्रधान संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री भरत सिंह चौधरी से शिष्टाचार भेंट कर राज्य की ग्राम पंचायतों से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं और मांगों को प्रमुखता से उठाया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष योगिता केंतुरा रावत ने किया। बैठक में पंचायतों के समग्र विकास, अधिकारों के विकेंद्रीकरण और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रही व्यावहारिक समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
प्रधान संगठन ने मंत्री के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में पंचायतें विकास की आधारशिला हैं, लेकिन संसाधनों और व्यवस्थागत चुनौतियों के कारण ग्राम पंचायतों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने पंचायतों को समय पर बजट उपलब्ध न होने की समस्या को गंभीर बताते हुए कहा कि निधि आवंटन में लगातार हो रही देरी के कारण गांवों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और कई योजनाएं अधूरी पड़ी हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि पंचायतों को समयबद्ध तरीके से बजट जारी किया जाए, ताकि विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।
बैठक में ग्राम प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय वृद्धि का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने कहा कि वर्तमान समय में पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, जबकि उन्हें मिलने वाला मानदेय उनकी कार्यशैली और बढ़ती महंगाई के अनुरूप नहीं है। ऐसे में ग्राम प्रधानों एवं पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय में उचित वृद्धि की जानी आवश्यक है। इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में डिजिटल व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को भी मंत्री के समक्ष रखा गया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहद कमजोर है, जिससे ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने, डिजिटल भुगतान प्रणाली (PFMS) और अन्य ऑनलाइन कार्यों में तकनीकी बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। संगठन ने इन समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग करते हुए कहा कि बिना मजबूत डिजिटल ढांचे के पंचायतों पर ऑनलाइन व्यवस्थाओं का दबाव व्यवहारिक नहीं है।
प्रधान संगठन ने पंचायती राज अधिनियम के तहत पंचायतों को दिए गए अधिकारों को पूरी तरह लागू करने की मांग भी रखी। संगठन का कहना था कि जब तक पंचायतों को वास्तविक अधिकार और निर्णय लेने की स्वतंत्रता नहीं मिलेगी, तब तक ग्रामीण विकास की अवधारणा अधूरी रहेगी। पंचायतों को प्रशासनिक और वित्तीय रूप से अधिक सशक्त बनाए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। बैठक के दौरान पंचायती राज मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की सभी मांगों और समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा उनके समाधान के लिए सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया। मंत्री ने कहा कि सरकार पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष योगिता केंतुरा रावत ने कहा कि जब तक ग्राम पंचायतें मजबूत नहीं होंगी, तब तक “आदर्श उत्तराखंड” का सपना साकार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि प्रधान संगठन पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों और ग्रामीण विकास के मुद्दों को लेकर लगातार संघर्षरत रहेगा तथा सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा करता है। इस मौके पर संगठन के महामंत्री ठाकुर कृपाल सिंह समेत अन्य मौजूद रहे।
