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प्रधानमंत्री के आगमन से बदलेगी ब्यास, दारमा और चौंदास घाटी की तस्वीर, विश्व मानचित्र पर दर्ज होंगे अनछुए स्थल

देहरादून। सौर क्षेत्र (पिथौरागढ़) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पदार्पण मानसखंड को विश्व पटल पर पहचान दिलाएगा। यही नहीं दो दो अंतरराष्ट्रीय सीमा नेपाल और चीन से लगी धारचूला क्षेत्र की खूबसूरत चौंदास, दारमा और ब्यास घाटी के विकास को भी पंख लगेंगे। यहां के सैकड़ों अनछुए धार्मिक और पर्यटक स्थल अब देश दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे। इससे घाटी की तस्वीर तो बदलेगी ही, यहां के निवासियों की तकदीर भी बदल जाएगी।

उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देशभर में यदि कोई खूबसूरती घाटी पर्यटकों से ओझल है तो वह पिथौरागढ़ की सौर, जौहर घाटी के बाद धारचूला क्षेत्र की चौंदास, ब्यास और दारमा घाटी है। असीम प्राकृतिक सुंदरता, लोक संस्कृति और पौराणिकता का खजाना समेटे यह क्षेत्र आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। यहां आज भी कई गांव देश दुनिया से अलग बोली, रीति रिवाज, रहन सहन और परंपराओं में मस्त हैं। लेकिन दुनिया से जुड़ने की छटपटाहट इनमें भी देखी जा सकती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गृह जनपद होने के कारण वह यहां की हर परेशानियों से वाकिफ हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र के विकास का बीड़ा उठाया है। मुख्यमंत्री ने देश के प्रधानमंत्री को जब यहां की लोक संस्कृति, पर्यटन , तीर्थाटन और विकास की संभावनाओं पर चर्चा की होगी तो प्रधानमंत्री भी इस अनदेखे, अनछुए स्थान देखने की लालसा लिए यहां आ रहे हैं। प्रधानमंत्री के आने के बाद अब उम्मीद लगाए जा रही कि देश दुनिया से अलग इस घाटी के विकास में चार चांद लगेंगे। इससे वह दिन दूर नहीं जब सौर, जौहार, चौंदास, दारमा और ब्यास घाटी विश्व पर्यटन मानचित्र पर अलग दखल रखेगी।

मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट को लगेंगे पंख

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कमान संभालते ही पुष्कर सिंह धामी पर्यटन और तीर्थाटन आधारित विकास को लेकर चिंतित है। केदारखंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों बड़ी योजनाओं की पटकथा मुख्यमंत्री पिछले साल बद्रीनाथ और केदारनाथ में लिख चुके हैं। अब मानसखंड की बारी है। इसके लिए भी मुख्यमंत्री अपने मानसखंड मंदिर माला के ड्रीम प्रोजेक्ट पर दिनरात काम कर रहे हैं। आज प्रधानमंत्री को दुनिया के सबसे बड़े तीर्थ आदि कैलाश में आमंत्रित कर मुख्यमंत्री मानसखंड की योजनाओं को धरातल पर उतारने में कामयाब होंगे। इसके अलावा कुमाऊं क्षेत्र के अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर आदि जिलों के धार्मिक, पर्यटन स्थलों के विकास को पंख लगेंगे। बहरहाल मुख्यमंत्री धामी के ड्रीम प्रोजेक्ट पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी मुहर लगा देंगे।

इसलिए पर्यटकों से ओझल है खूबसूरती

पिथौरागढ़ जनपद में कदम कदम पर सुंदरता बिखरी पड़ी है। लेकिन दिल्ली हो या फिर देहरादून, यहां की दूरी 500 से 700 किमी है। ऐसे में यहां पर्यटकों का आगमन कम है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद पिथौरागढ़ जनपद के पर्यटन को पंख लगने तय है। उम्मीद जताई जा रही कि प्रधानमंत्री के आने के बाद यहां वर्षों से बंद पड़ी नैनी सैनी हवाई पट्टी भी शुरू हो जाएगी। इसके बाद पर्यटक सीधे दिल्ली, देहरादून या अन्य स्थानों से यहां आसानी से पहुंच सकेंगे।

कैसे पहुंचे सौर, जौहार, चौंदास, ब्यास और दारमा घाटी

देहरादून और दिल्ली से हल्द्वानी तक ट्रेन है। ट्रेन से पहुंचने के बाद हल्द्वानी से टैक्सी से पिथौरागढ़ शहर में पहुंच सकते हैं। पिथौरागढ़ से मुनस्यारी यानी जौहार घाटी से होते हुए धारचूला पहुंच सकते है। यदि मुनस्यारी नहीं जाना चाहते हो तो सीधे पिथौरागढ़ से जौलजीवी धारचूला जा सकते हैं। धारचूला के आगे चौंदास, ब्यास और दारमा घाटी पड़ती है।  इसके अलावा यूपी पीलीभीत से टनकपुर तक ट्रेन, बरेली मुरादाबाद, आदि से बस सेवा टनकपुर होते हुए चंपावत तथा रुद्रपुर होते हुए हल्द्वानी तक है। जहां से टैक्सी या बस से पिथौरागढ़ पहुंच सकते हैं। दिल्ली से करीब 500 किमी और देहरादून से करीब 550 किमी तक पिथौरागढ़ की दूरी है।।

 

ये बड़े धार्मिक स्थल

धारचूला से लगा छिपला केदार, नारायण आश्रम, गबला मंदिर, महादेव गुफा, ब्यास मंदिर, देवी मंदिर, तिलथिन मंदिर, सँगलीन मंदिर, आदि कैलाश, गौरीकुंड पार्वती ताल, कुंती चोंटी, पांडव पर्वत, रामा ताल आदि बड़े धार्मिक स्थल हैं, जो प्रधानमंत्री के आने के बाद श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे।

ये स्थान बनेंगे पर्यटकों के आकर्षण

पिथौरागढ़ के बाद धारचूला के आगे चौंदास, ब्यास और दारमा घाटी अलग अलग बंटी है। यहां से सबसे खूबसूरत घाटी ब्यास है। मुनस्यारी से दिखनी वाली सबसे खूबसूरत पंचाचूली पर्वत श्रृंखला, रालम ग्लेशियर, कुंती चोंटी, रामा ग्लेशियर, रामा ताल, नामा पास, सिनाल पास, स्यथंग, च्यतम ला, ज्यौलिकंग चोटियां, लिम्पिया धुरा, मंगथ्यया धुरा, आदि पर्यटक स्थान पर्वतारोहण, ट्रेकिंग, नेचर वॉक आदि के लिए पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे।

इन गांव का होगा विकास

तपोवन, दोबत, एलागाड, तवाघाट, पांगला, मंगति, गर्बाधार, बूंदी, छियालेख, गरव्यांग, गुंजी, नाबी, नयल, कुटी, पाबून्द पर्वत, ज्यौलिकंग आदि सौ से ज्यादा गांव तीनों घाटी के हैं, जिनका विकास होगा। अभी भी कई गांव 15 से 25 किमी पैदल दूरी पर हैं। जहां जाना आज हर किसी की बस में नहीं है।

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