रामलीला मंच पर जीवंत हुई गंगू रमोला के पुत्र सिद्धवा-विद्ववा की लोकगाथा, नृत्य-नाटिका ने दर्शकों का मोहा मन

देहरादून। संवेदना समूह की ओर से रामलीला मंच पर मौल्यागढ़ (रमोली) के राजा गंगू रमोला के पुत्र सिद्धवा और विद्ववा की लोकगाथा पर आधारित नृत्य-नाटिका की शानदार प्रस्तुति दी गई। करीब सवा दो घंटे तक चली इस नृत्य-नाटिका ने दर्शकों को गढ़वाली लोकसंस्कृति, पौराणिक प्रसंगों और लोकविश्वासों से रूबरू कराया। कलाकारों के सशक्त अभिनय, भावपूर्ण संवाद और नृत्य प्रस्तुति ने दर्शकों का दिल जीत लिया।

नृत्य-नाटिका में राजा गंगू रमोला के अहंकार, भगवान श्रीकृष्ण के अभिशाप, उनकी तपस्या, रानी मैनावती को पुत्र प्राप्ति के वरदान और सिद्धवा-विद्ववा के जन्म से लेकर उनकी शिक्षा-दीक्षा तक की कथा को प्रभावशाली ढंग से मंच पर उतारा गया। कथा के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि अहंकार व्यक्ति के पतन का कारण बनता है, जबकि विनम्रता, भक्ति और सद्कर्म जीवन को सही दिशा देते हैं।
प्रस्तुति में दिखाया गया कि राजा गंगू रमोला को भगवान श्रीकृष्ण के कोप का सामना करना पड़ता है। इसके बाद कथा में रानी मैनावती की भूमिका और पुत्र प्राप्ति के वरदान का प्रसंग सामने आता है। सिद्धवा और विद्ववा के जन्म के बाद उनकी शिक्षा-दीक्षा के लिए गोरखनाथ के पास जाने का प्रसंग भी आकर्षण का केंद्र रहा। नाटक में गुरु परंपरा, साधना और आध्यात्मिक ज्ञान के महत्व को दर्शाया गया।

नृत्य-नाटिका का प्रमुख आकर्षण राजा गंगू रमोला के अहंकार का अंत रहा। कथा के घटनाक्रम को कलाकारों ने अभिनय और नृत्य के माध्यम से इस तरह प्रस्तुत किया कि दर्शक पूरे समय मंच से जुड़े रहे। लोकगाथा के विविध प्रसंगों, पात्रों की भाव-भंगिमाओं और संवाद अदायगी ने प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया।

लोकसंस्कृति को मंच पर सहेजने का प्रयास
इस आयोजन के माध्यम से उत्तरकाशी की समृद्ध लोकपरंपरा और लोकगाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। गंगू रमोला और उनके पुत्रों से जुड़ी लोककथा क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसी प्रस्तुतियां लोककथाओं को मंचीय अभिव्यक्ति देने के साथ ही स्थानीय इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। करीब सवा दो घंटे तक चली प्रस्तुति के दौरान दर्शक कलाकारों के अभिनय और नृत्य का आनंद लेते रहे। नाटक के निर्देशक जय प्रकाश राणा, जय प्रकाश नौटियाल, राजेश जोशी, संजय पंवार,विपिन नेगी, रोशन, उत्तम सिंह और गोविंद सिंह सहित अन्य कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों को जीवंत कर मंच पर समां बांध दिया। संवेदना समूह की इस प्रस्तुति ने दर्शाया कि उत्तराखंड की लोकगाथाओं में मनोरंजन के साथ-साथ जीवन-मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक संदेशों की भी समृद्ध परंपरा मौजूद है।