देहरादून महायोजना पर यातायात, पर्यावरण संरक्षण, आवास और बुनियादी सुविधाओं पर आए अहम सुझाव

देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा तैयार की जा रही देहरादून महायोजना-2041 को लेकर जनसहभागिता लगातार बढ़ रही है। सोमवार को अभियान के 11वें दिन सेक्टर-11 की जनसुनवाई राजकीय बालिका पॉलिटेक्निक कॉलेज, सुद्धोवाला में आयोजित की गई, जिसमें स्थानीय नागरिकों, भू-स्वामियों, व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न हितधारकों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर राजधानी के भविष्य से जुड़े अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराईं।
जनसुनवाई के दौरान नागरिकों ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2041 तक तेजी से बढ़ती आबादी, शहरी विस्तार और बदलती आवश्यकताओं को देखते हुए महायोजना को दूरदर्शी बनाया जाना चाहिए। एमडीडीए के अधिकारियों ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि प्रत्येक सुझाव एवं आपत्ति का तकनीकी और विधिक परीक्षण करने के बाद अंतिम महायोजना में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।
यातायात और आधारभूत ढांचे को लेकर उठी मजबूत मांग
जनसुनवाई में सबसे अधिक चर्चा शहर की यातायात व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं को लेकर हुई। नागरिकों ने सड़क नेटवर्क के विस्तार, सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने, ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार, पार्किंग व्यवस्था विकसित करने और नए विकसित हो रहे आवासीय क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग रखी।
प्रतिभागियों ने कहा कि आने वाले वर्षों में देहरादून की आबादी और वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि होगी, इसलिए महायोजना को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए। जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज, आंतरिक संपर्क मार्ग और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार पर भी विस्तृत सुझाव दिए गए।
पर्यावरण संरक्षण को महायोजना का अभिन्न हिस्सा बनाने की मांग
जनसुनवाई में पर्यावरण संरक्षण भी प्रमुख मुद्दा रहा। नागरिकों ने हरित क्षेत्रों, प्राकृतिक जल स्रोतों और खुले सार्वजनिक स्थलों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया। वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण और जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान को महायोजना में शामिल करने की मांग की गई। प्रतिभागियों का कहना था कि देहरादून की पहचान उसकी हरियाली, प्राकृतिक संपदा और पर्यावरणीय संतुलन से है। ऐसे में विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण को समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए। तकनीकी विशेषज्ञों ने भी इन सुझावों का अभिलेखीकरण कर उन्हें योजना निर्माण प्रक्रिया में शामिल करने का भरोसा दिया।
क्षेत्रवार विकास मॉडल तैयार करने पर जोर
भू-स्वामियों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भूमि उपयोग प्रस्तावों, विकास नियंत्रण नियमों तथा क्षेत्र विशेष की भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप विकास मॉडल तैयार करने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि शहर के प्रत्येक क्षेत्र की अलग-अलग आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ही संतुलित और प्रभावी विकास संभव है। एमडीडीए अधिकारियों ने कहा कि सभी सुझावों का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा ताकि अंतिम महायोजना अधिक व्यावहारिक, संतुलित और जनहितकारी बन सके।
21 जुलाई को सेक्टर-12 की जनसुनवाई
एमडीडीए ने बताया कि देहरादून महायोजना-2041 के तहत जनसंवाद अभियान लगातार जारी रहेगा। अभियान के अगले चरण में 21 जुलाई को प्रातः 11 बजे सेक्टर-12 की जनसुनवाई वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट, चंद्रबनी रोड में आयोजित की जाएगी, जहां संबंधित क्षेत्र के नागरिक अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
जनभागीदारी से ही बनेगी बेहतर महायोजना
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून महायोजना-2041 केवल एक तकनीकी दस्तावेज नहीं, बल्कि राजधानी के भविष्य का विकास दृष्टिपत्र है। उन्होंने कहा कि नागरिकों से प्राप्त सुझाव योजना को जमीनी जरूरतों के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और जितनी अधिक जनभागीदारी होगी, महायोजना उतनी ही प्रभावी, व्यावहारिक और दूरदर्शी बनेगी।
वहीं, एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों का व्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम प्रत्येक सुझाव का तकनीकी और विधिक परीक्षण करेगी, जिससे अंतिम महायोजना विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन स्थापित करने वाली व्यापक योजना के रूप में तैयार हो सके।
