उत्तराखंड के चारों धाम में गर्मकुण्ड का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व
देवदर्शन से पूर्व पवित्र जल में स्नान को अनिवार्य परंपरा, शारीरिक–मानसिक शुद्धि का माना जाता है साधन

देहरादून। चारधाम यात्रा केवल दर्शन की परिक्रमा नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का आध्यात्मिक मार्ग मानी जाती है। इस कारण बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—इन चारों धामों में स्थित गर्मकुण्डों का अत्यंत पौराणिक महत्व है। मान्यता है कि देवदर्शन से पूर्व इन पवित्र जलस्रोतों में स्नान करने से यात्री आध्यात्मिक रूप से शुद्ध होकर दर्शन का अधिकारी बनता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गर्म जल स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।

चारधाम के इन दिव्य गर्मकुण्डों से जुड़ी परंपराएं न केवल धार्मिक भावना को पोषित करती हैं, बल्कि स्वास्थ्य और आध्यात्मिक अनुभव को भी संपूर्ण बनाती हैं। धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक गरिमा का संगम होने के कारण चारधाम यात्रा का अनुभव तभी पूर्ण माना जाता है जब यात्री इन पवित्र जलस्रोतों में स्नान कर देवदर्शन के लिए अग्रसर हो।
बद्रीविशाल धाम — तप्तकुण्ड श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
बद्रीनाथ मंदिर के ठीक नीचे स्थित तप्तकुण्ड को अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह भगवान विष्णु के अवतार कुबेर और अग्निदेव का स्थान है। श्रद्धालु पहले तप्तकुण्ड में स्नान और आचमन कर फिर बद्रीविशाल के दर्शन करते हैं। मान्यता है कि यहां स्नान करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

यमुनोत्री धाम — सूर्यकुण्ड और दिव्यकुण्ड परंपरा के प्रतीक
यमुनोत्री मंदिर के नीचे स्थित गर्मकुण्डों को माता यमुना का आशीर्वाद माना जाता है। यहां स्नान करने के पश्चात श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में दर्शन के लिए प्रवेश करते हैं। यहां एक अनूठी परंपरा है—भक्त चावल के छोटे पोटले गर्मकुण्ड में पकाकर प्रसाद रूप में घर ले जाते हैं। इसे आरोग्य और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
केदारनाथ धाम — गौरीकुण्ड का आध्यात्मिक प्रसंग
केदारनाथ यात्रा मार्ग में स्थित गौरीकुण्ड का जल माता पार्वती की तपस्थली मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने यहीं भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप किया था। तीर्थयात्री यहां स्नान कर केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए प्रस्थान करते हैं। माना जाता है कि गौरीकुण्ड के स्नान से पापों का शमन तथा आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
गंगोत्री धाम — गंगनानी गर्मकुण्ड श्रद्धा और साधना का केंद्र
गंगोत्री मार्ग में स्थित गंगनानी गर्मकुण्ड का धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टियों से विशेष स्थान है। इसे ऋषि पराशर की तपस्थली माना जाता है। श्रद्धालु गंगोत्री के दर्शन से पहले यहां स्नान कर गंगा की दिव्य ऊर्जा का अनुभव प्राप्त करते हैं। वैज्ञानिक रूप से यह गर्म जल ऊंचाई पर कठोर ठंड से होने वाली शारीरिक थकान को कम करने में सहायक होता है।
यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण परामर्श
• गर्मकुण्ड में स्नान पवित्रता और अनुशासन के साथ किया जाए
• साबुन, रसायन व अशुद्ध पदार्थों का उपयोग न किया जाए
• बुजुर्ग एवं कमजोर स्वास्थ्य वाले लोग उच्च तापमान के जल से सावधानी बरतें
• परंपराओं व स्थानीय पुरोहितों के निर्देशों का पालन करें
