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वीडियो….यूआईआईडीबी पर उठे सवालों पर सरकार की सफाई: 7,000 बीघा नहीं, अब तक सिर्फ 45 एकड़ भूमि उपलब्ध

देहरादून। उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) को लेकर हाल के दिनों में उठ रहे सवालों के बीच प्रमुख सचिव नियोजन एवं यूआईआईडीबी के प्रबंध निदेशक आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा है कि बोर्ड को 7,000 बीघा भूमि आवंटित किए जाने की बात तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक चिन्हित भूमि में से यूआईआईडीबी को केवल 45 एकड़ भूमि ही उपलब्ध हो पाई है। न तो बोर्ड को 7,000 बीघा भूमि दी गई है और न ही इतनी भूमि प्राप्त करने की कोई प्रक्रिया संचालित की जा रही है।

प्रमुख सचिव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हाल के दिनों में कुछ स्वतंत्र मीडिया संस्थानों और विभिन्न सार्वजनिक मंचों पर यूआईआईडीबी की कार्यप्रणाली, परियोजनाओं और भूमि से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में सरकार की ओर से आवश्यक समझा गया कि सही और तथ्यात्मक स्थिति जनता के सामने रखी जाए, ताकि किसी प्रकार की भ्रांति न फैले। उन्होंने दो टूक कहा कि यूआईआईडीबी को 7,000 बीघा भूमि दिए जाने संबंधी दावे सही नहीं हैं। बोर्ड को इतनी भूमि न तो मिली है और न ही इतनी भूमि हासिल करने का कोई प्रयास किया जा रहा है।

सेवा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए हुआ यूआईआईडीबी का गठन
आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि यूआईआईडीबी का गठन राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर किया गया है। राज्य सरकार ने आगामी पांच वर्षों में प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी जीएसडीपी को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए पूंजी निवेश बढ़ाने, नए रोजगार सृजित करने और निवेश परियोजनाओं के लिए आवश्यक आधारभूत संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि राज्य में आयोजित इन्वेस्टर समिट के दौरान बड़ी संख्या में निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए निवेशकों को उपयुक्त भूमि और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। यूआईआईडीबी का गठन इसी उद्देश्य से किया गया है, ताकि विशेष रूप से सेवा क्षेत्र में बड़े और गुणवत्तापूर्ण निवेश के लिए एक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था विकसित की जा सके। उन्होंने बताया कि औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य में सिडकुल जैसी व्यवस्था पहले से कार्यरत है। वहीं यूआईआईडीबी के माध्यम से पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी और अन्य सेवा क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।

पर्यटन और वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में उत्तराखंड की संभावनाओं पर जोर

प्रमुख सचिव ने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन और वेलनेस क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य को एक प्रमुख पर्यटन एवं वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले होटल, रिसॉर्ट, वेलनेस सेंटर और अन्य पर्यटन सुविधाओं में पूंजी निवेश की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। जयपुर और उदयपुर जैसे शहरों ने देश और दुनिया में वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान बनाई है, जिसका लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिला है। इसी प्रकार उत्तराखंड में भी उच्च गुणवत्ता की होटल और आतिथ्य सुविधाओं के विकास के लिए निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप उत्तराखंड को देश के प्रमुख पर्यटन और वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे होटल और पर्यटन कारोबार के साथ-साथ स्थानीय परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद, खान-पान और अन्य संबद्ध सेवा क्षेत्रों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी निवेश बढ़ाने की तैयारी
यूआईआईडीबी के माध्यम से शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े निवेश के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रमुख सचिव ने कहा कि उत्तराखंड देश के महत्वपूर्ण शिक्षा केंद्रों में शामिल है और यहां उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षणिक संस्थानों के विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में बड़े निवेश के लिए उपयुक्त भूमि और आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकता होती है। यूआईआईडीबी उपलब्ध सरकारी संसाधनों को नियमानुसार चिन्हित और व्यवस्थित करने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि निवेशकों के लिए प्रक्रिया आसान हो और राज्य में गुणवत्तापूर्ण संस्थानों का विस्तार हो सके। सरकार का मानना है कि इससे राज्य के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली, बेंगलुरु और अन्य महानगरों की ओर जाने के बजाय उत्तराखंड में ही बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। शिक्षा क्षेत्र में निवेश से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

पर्वतीय राज्य में व्यवस्थित लैंड बैंक बड़ी जरूरत

प्रमुख सचिव नियोजन ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में निवेश के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है। निजी स्तर पर भूमि खरीद की प्रक्रिया कई कारणों से जटिल होती है। ऐसे में सेवा क्षेत्र की बड़ी निवेश परियोजनाओं के लिए सरकारी भूमि का एक व्यवस्थित लैंड बैंक तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ सरकारी भूमि का अनियोजित हस्तांतरण या विक्रय नहीं है। बोर्ड का उद्देश्य ऐसी सरकारी भूमि का चिन्हीकरण करना है, जो वर्तमान में अनुपयोगी है अथवा आर्थिक गतिविधियों के लिए उपयोग में नहीं आ रही है।
ऐसी भूमि का उपयोग भी निर्धारित नियमों, प्रचलित कानूनों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप ही किया जाएगा। सरकार का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों के सुनियोजित उपयोग से पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सेवा क्षेत्रों में निवेश की राह आसान होगी।
सरकारी भूमि बिकेगी नहीं, राज्य के पास ही रहेगा स्वामित्व
यूआईआईडीबी को लेकर भूमि के स्वामित्व संबंधी सवालों पर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। प्रमुख सचिव ने कहा कि निवेश को बढ़ावा देने का मतलब सरकारी भूमि को बेचना नहीं है। भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा। निवेश परियोजनाओं के लिए भूमि का उपयोग निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत लीज मॉडल पर किया जाएगा। परियोजनाओं में पर्यावरणीय और अन्य सभी वैधानिक मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ स्तरों पर यह भ्रांति भी फैलाई जा रही है कि भूमि 90 वर्ष के लिए लीज पर दी जाएगी, जबकि सरकार के अनुसार लीज की अवधि 60 वर्ष है।

ऑप्टिमल लैंड यूटिलाइजेशन कमेटी और यूआईआईडीबी अलग-अलग

प्रमुख सचिव ने यूआईआईडीबी को ऑप्टिमल लैंड यूटिलाइजेशन कमेटी के साथ जोड़कर देखे जाने को भी तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि ऑप्टिमल लैंड यूटिलाइजेशन कमेटी का गठन यूआईआईडीबी से पहले वर्ष 2022 में किया गया था।
इस कमेटी का मुख्य उद्देश्य विभिन्न सरकारी विभागों के बीच भूमि हस्तांतरण से जुड़ी प्रक्रियागत और प्रशासनिक कठिनाइयों को दूर करना था। कई बार एक विभाग से दूसरे विभाग को सरकारी भूमि हस्तांतरित करने में व्यावहारिक समस्याएं सामने आती थीं। उन्होंने कहा कि दोनों व्यवस्थाओं की भूमिका और उद्देश्य अलग-अलग हैं, इसलिए इन्हें एक ही व्यवस्था के रूप में देखना सही नहीं है।

स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलने की उम्मीद
प्रमुख सचिव और एमड़ी का कहना है कि यूआईआईडीबी के माध्यम से सेवा क्षेत्र में निवेश बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। पर्यटन, होटल, रिसॉर्ट, वेलनेस, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश से स्थानीय परिवहन, होम-स्टे, खान-पान, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को भी बढ़ावा मिल सकता है। प्रमुख सचिव ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक और मानवीय संसाधन क्षमता का बेहतर उपयोग करते हुए नियोजित और पर्यावरणीय रूप से संतुलित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना सरकार का उद्देश्य है। इससे एक ओर राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर तैयार हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूंजी निवेश, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार जरूरी है। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यूआईआईडीबी इसी दिशा में कार्य कर रहा है।

सरकार की मुख्य बातें
-7,000 बीघा भूमि आवंटन का दावा गलत बताया गया।
-अब तक यूआईआईडीबी को मात्र 45 एकड़ भूमि उपलब्ध हुई है।
-सरकारी भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा।
-भूमि का उपयोग बिक्री नहीं, लीज मॉडल के माध्यम से होगा।
-सरकार के अनुसार लीज अवधि 60 वर्ष है, 90 वर्ष नहीं।
-पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सेवा क्षेत्रों में निवेश पर जोर।
-स्थानीय स्तर पर रोजगार, स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने का लक्ष्य।
-यूआईआईडीबी और ऑप्टिमल लैंड यूटिलाइजेशन कमेटी अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं।

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