Uttarakhandअपराधएसटीएफ की बड़ी कार्रवाई

बंद बीमा पॉलिसी चालू कराने के नाम पर 26 लाख की साइबर ठगी, STF ने नोएडा से आरोपी दबोचा

देहरादून। उत्तराखंड एसटीएफ की साइबर क्राइम टीम ने बंद पड़ी बीमा पॉलिसियों को दोबारा चालू कराने और भारी मुनाफे का लालच देकर ठगी करने वाले गिरोह के एक सदस्य को नोएडा से गिरफ्तार किया है। आरोपी के खातों में ठगी के करीब 20 लाख रुपये ट्रांसफर होने की पुष्टि हुई है, जबकि कुछ ही महीनों में उसके खातों से 42 लाख रुपये के लेन-देन का खुलासा हुआ है।

एसटीएफ के अनुसार पटेलनगर निवासी एक व्यक्ति ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया कि उसकी पीएनबी मेटलाइफ इंश्योरेंस की तीन पॉलिसियां पिछले दो वर्षों से प्रीमियम जमा न होने के कारण बंद हो गई थीं। अक्टूबर 2025 में उसे एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को बीमा कंपनी का अधिकारी बताते हुए बंद पॉलिसियों को दोबारा चालू कराने और अच्छा मुनाफा दिलाने का झांसा दिया। आरोपियों ने पीड़ित को अपने “हेड बाबू” से बात कराते हुए विभिन्न बैंक खातों में रकम जमा करवाई। बाद में जब पीड़ित ने बीमा कंपनी के कस्टमर केयर से संपर्क किया तो उसे पता चला कि उसके साथ करीब 25.90 लाख रुपये की साइबर ठगी हो चुकी है।
मामले में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल डाटा का विश्लेषण किया। इसके आधार पर पुलिस ने नोएडा के सेक्टर-31 निठारी निवासी 21 वर्षीय सूरज चौहान को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर बंद पड़ी बीमा पॉलिसियों का डाटा हासिल करता था और लोगों को मुनाफे का झांसा देकर ठगी करता था। आरोपी साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए अपने बैंक खातों का इस्तेमाल करता था तथा कमीशन लेकर खाते किराये पर देने और बेचने का काम भी करता था।
एसटीएफ ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है तथा अन्य राज्यों की पुलिस से भी संपर्क किया जा रहा है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में निरीक्षक विजय भारती, कांस्टेबल नीरज नेगी और कांस्टेबल विकास रावत शामिल रहे।
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने लोगों से अपील की है कि किसी को भी अपना बैंक खाता, एटीएम, ओटीपी या यूपीआई पिन साझा न करें। किसी भी लालच, निवेश योजना या फर्जी कस्टमर केयर नंबर के झांसे में न आएं। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

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