भावुक विदाई के बीच डॉ. हिमांशु ऐरन ने संभाली राष्ट्रीय जिम्मेदारी, सुभारती परिवार ने दी श्रद्धापूर्ण विदाई

देहरादून। रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में डॉ. हिमांशु ऐरन को भावभीनी विदाई दी गई। राष्ट्रीय दंत आयोग में पूर्णकालिक सदस्य (असेसमेंट एंड रेटिंग) के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे डॉ. ऐरन के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार की भावनाएं उमड़ पड़ीं।
कार्यक्रम के दौरान जैसे ही डॉ. ऐरन मंच पर पहुंचे, फूल-मालाओं से उनका भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान कुलपति, प्रति कुलपति, अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे। पूरे सभागार में उनके प्रति सम्मान और आत्मीयता का माहौल देखने को मिला।
अपने संबोधन में डॉ. हिमांशु ऐरन ने विश्वविद्यालय में बिताए 18 महीनों को अविस्मरणीय बताते हुए कहा कि यह कार्यकाल राष्ट्र निर्माण की भावना से प्रेरित रहा। उन्होंने सहयोगियों और छात्रों के समर्थन को अपनी उपलब्धियों का आधार बताया और सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में कार्यकारी अधिकारी डॉ. कृष्ण मूर्ति ने कहा कि डॉ. ऐरन ने अपने कार्यकाल में संस्थान को नई दिशा और सशक्त नेतृत्व प्रदान किया। उनकी पारदर्शिता, प्रतिबद्धता और दूरदर्शिता ने विश्वविद्यालय की कार्यशैली में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए संस्थान नई ऊंचाइयों को छुएगा।
प्रति कुलपति डॉ. देश दीपक ने कहा कि डॉ. ऐरन का नेतृत्व प्रेरणादायक रहा और उन्होंने विश्वविद्यालय को एक स्पष्ट दिशा दी। वहीं रजिस्ट्रार खालिद हसन ने उनके कार्यकाल को अनुशासन और कार्यकुशलता का प्रतीक बताया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागाध्यक्षों और संकाय सदस्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए डॉ. ऐरन के योगदान को सराहा। छात्रों ने भी उन्हें प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके मार्गदर्शन को याद किया।
समारोह के दौरान विभिन्न विभागों की ओर से उन्हें स्मृति-चिन्ह भेंट किए गए। कार्यक्रम के अंत में पूरे सभागार ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उन्हें विदाई दी।
अपने अंतिम संबोधन में डॉ. ऐरन ने कहा, “मैं आपके स्नेह और सम्मान से अभिभूत हूं… जय हिन्द, जय सुभारती।”
यह विदाई केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसे नेतृत्व को सम्मान देने का अवसर था, जिसने कम समय में ही विश्वविद्यालय पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।
