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गैरसैंण की पेयजल समस्या दूर करने की दिशा में बड़ा कदम, रामगंगा नदी पर बनेगा बांध

देहरादून। गैरसैंण नगर और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने के लिए रामगंगा नदी पर बांध निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के तहत प्रस्तावित इस परियोजना को शासन ने 122.6891 करोड़ रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। परियोजना के लिए पहली किश्त के रूप में 2.454 करोड़ रुपये जारी करने की मंजूरी दी गई है। इसे गैरसैंण की दीर्घकालिक पेयजल जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

चमोली जिले के गैरसैंण नगर और आसपास की आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रस्तावित इस परियोजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में धनराशि की व्यवस्था की गई है। शासनादेश के अनुसार, शुरुआती धनराशि राज्य आकस्मिकता निधि से उपलब्ध कराई जाएगी। बाद में इसका समायोजन केंद्र सरकार की स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (SASCI) योजना के तहत प्राप्त धनराशि से किया जाएगा।
गुणवत्ता से समझौता नहीं, तकनीकी जांच अनिवार्य
शासन ने परियोजना के निर्माण में गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और वित्तीय अनुशासन का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। बांध एवं बैराज के संरचनात्मक डिजाइन और ड्राइंग को मान्यता प्राप्त संस्था से जांच और सत्यापन कराने के बाद ही अंतिम रूप दिया जाएगा। निर्माण शुरू होने से पहले संबंधित क्षेत्रीय मुख्य अभियंता कार्यस्थल का निरीक्षण करेंगे। जरूरत के अनुसार मृदा परीक्षण और भूगर्भीय उपयुक्तता की जांच भी कराई जाएगी।
निर्माण में इस्तेमाल होने वाली रेत, बजरी, सीमेंट, स्टील पाइप और अन्य सामग्रियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित भारतीय मानकों के अनुरूप मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में परीक्षण कराना होगा। इसके साथ ही निर्माण कार्य का तृतीय पक्ष गुणवत्ता परीक्षण भी अनिवार्य किया गया है।

प्रभावित गांवों को भी मिलेगा पानी
परियोजना के तहत जल स्रोत में निर्धारित डिजाइन अवधि के दौरान आवश्यक न्यूनतम जल उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। बांध निर्माण से डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में प्रभावित होने वाले गांवों को निर्माण के दौरान और काम पूरा होने के बाद भी निर्बाध जलापूर्ति बनाए रखने की व्यवस्था करनी होगी। परियोजना के विभिन्न घटकों का निर्माण चरणबद्ध तरीके से करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि तैयार संरचनाओं का समय पर और प्रभावी उपयोग हो सके।

खर्च का हिसाब, अनियमितता पर रोक
शासन ने परियोजना की लागत पर नियंत्रण रखने के लिए भी कड़े प्रावधान किए हैं। आगणन में केवल जरूरी कार्यों और मदों को शामिल किया जाएगा। निविदा के बाद स्वीकृत लागत से बचने वाली धनराशि शासन को लौटानी होगी। अतिरिक्त कार्य कराने से पहले सक्षम अधिकारी की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। स्वीकृत राशि से अधिक या अनधिकृत मदों में खर्च की अनुमति नहीं होगी। निर्माण एवं खरीद संबंधी कार्यों में उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली, 2025 समेत लागू नियमों का पालन करना होगा। जहां तक संभव हो, निर्धारित मानकों के अनुरूप स्थानीय स्तर पर निर्मित सामग्री के इस्तेमाल को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

मार्च 2027 तक धनराशि के उपयोग की समयसीमा
परियोजना में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए कार्यस्थल पर सूचना पट्ट लगाना अनिवार्य होगा। इस पर स्वीकृत लागत, कार्य प्रारंभ और पूरा होने की तिथि, कार्यदायी संस्था तथा ठेकेदार का नाम दर्ज किया जाएगा। निर्माण से पहले, निर्माण के दौरान और काम पूरा होने के बाद की तस्वीरें एवं वीडियो भी सुरक्षित रखने होंगे। परियोजना को पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर अपलोड करने तथा उसकी वित्तीय और भौतिक प्रगति की जानकारी शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वीकृत धनराशि का उपयोग 31 मार्च, 2027 तक सुनिश्चित करना होगा। संबंधित अधिशासी अभियंता को परियोजना के औचित्य, लागत, निर्धारित दरों, समयबद्धता और निर्माण गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार बनाया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का प्रयास है कि विकास योजनाओं को पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि उनका लाभ आमजन तक पहुंचे। रामगंगा नदी पर प्रस्तावित बांध के निर्माण से गैरसैंण नगर और आसपास की आबादी के लिए पेयजल संबंधी आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना के वास्तविक लाभ निर्माण की प्रगति और निर्धारित मानकों के अनुरूप इसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।

 

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