उत्तराखंड में बारिश और गुलदार के डर के बाद अब आवारा कुत्तों के खौफ से स्कूलों में कर दी छुट्टी
नारायणबगड़ में आवारा व हिंसक कुत्तों का आतंक, बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन का बड़ा फैसला; 20 से 23 अगस्त तक स्कूल बंद, ऑनलाइन पढ़ाई के निर्देश

देहरादून। उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में स्कूली बच्चों की सुरक्षा लगातार चुनौती बनती जा रही है। कभी मूसलाधार बारिश और भूस्खलन तो कभी गुलदार और जंगली जानवरों का खतरा, लेकिन अब इन खतरों की फेहरिस्त में आवारा और हिंसक कुत्ते भी शामिल हो गए हैं। चमोली जिले के नारायणबगड़ क्षेत्र में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक ने हालात ऐसे कर दिए कि प्रशासन को बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों में ही अवकाश घोषित करना पड़ा है।
नारायणबगड़ क्षेत्र में आवारा और हिंसक कुत्तों के आतंक को देखते हुए 20 से 23 अगस्त 2026 तक 10 विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है। यह फैसला जिलाधिकारी चमोली के निर्देशों के अनुपालन में मुख्य शिक्षा अधिकारी चमोली की ओर से जारी आदेश के तहत लिया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अवधि में विद्यालयों के शिक्षक ऑनलाइन माध्यम से शिक्षण कार्य कराएंगे, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
डीएम के निर्देश पर जारी हुआ आदेश
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे मुख्य शिक्षा अधिकारी चमोली के आदेश में कहा गया है कि 19 अगस्त 2026 को नारायणबगड़ क्षेत्र में आवारा/हिंसक कुत्तों के आतंक के संबंध में प्रमुख क्षेत्र पंचायत नारायणबगड़ की ओर से पत्र प्राप्त हुआ था। जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र के चिन्हित विद्यालयों में 20 अगस्त से 23 अगस्त तक अवकाश घोषित किया गया है। आदेश में संबंधित विद्यालयों के शिक्षकों को इस अवधि में ऑनलाइन माध्यम से शिक्षण कार्य कराना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इन 10 विद्यालयों में रहेगा अवकाश
आदेश के अनुसार नारायणबगड़ क्षेत्र के राजकीय इंटर कॉलेज नारायणबगड़, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज नारायणबगड़, सरस्वती शिशु मंदिर नारायणबगड़, उत्तरांचल विद्या निकेतन नारायणबगड़, राजकीय प्राथमिक विद्यालय नारायणबगड़, श्री गुरुराम राय पब्लिक स्कूल पंती
राजकीय प्राथमिक विद्यालय नलगांव, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नलगांव, मॉडर्न चिल्ड्रंस एकेडमी नारायणबगड़, उत्तराखंड विद्यालय निकेतन नारायणबगड़
संबंधित विद्यालयों में आदेश का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी/उप शिक्षा अधिकारी नारायणबगड़ को दी गई है।
बच्चों की सुरक्षा बनी पहली प्राथमिकता
नारायणबगड़ क्षेत्र में आवारा कुत्तों के आतंक और लोगों को काटे जाने की घटनाओं के बाद अभिभावकों में भी चिंता बढ़ी है। ऐसे में प्रशासन ने बच्चों को स्कूल आने-जाने के दौरान किसी अप्रिय घटना से बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाया है। स्थानीय स्तर पर सामने आए मामलों के बाद यह फैसला लिया गया है। पहाड़ों में बारिश और भूस्खलन के कारण स्कूल बंद होना कोई नई बात नहीं है। अगस्त के दौरान चमोली में मौसम संबंधी चेतावनियों के चलते भी कई बार विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है। लेकिन आवारा और हिंसक कुत्तों के आतंक के कारण विद्यालयों में छुट्टी का आदेश सामने आना अपने आप में असामान्य स्थिति को दर्शाता है।
सोशल मीडिया पर आदेश वायरल, व्यवस्था पर उठे सवाल
मुख्य शिक्षा अधिकारी का यह आदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई कि बच्चों को स्कूल भेजने के बजाय स्कूल बंद करना पड़ा। अब चुनौती सिर्फ चार दिन की छुट्टी तक सीमित नहीं है। प्रशासन के सामने आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान करने की भी चुनौती है, ताकि 23 अगस्त के बाद जब स्कूल खुलें तो छात्र-छात्राओं को फिर उसी खतरे का सामना न करना पड़े। बारिश, भूस्खलन और गुलदार के खौफ के बीच अब आवारा कुत्तों का आतंक भी पहाड़ के बच्चों की सुरक्षा के लिए नई चुनौती बनकर सामने आया है। नारायणबगड़ का यह आदेश फिलहाल चार दिन की छुट्टी का है, लेकिन यह पहाड़ों में बढ़ती आवारा पशु समस्या और उससे जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े करता है।