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आनन्दम् पाठ्यचर्या’ के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शिक्षा विभाग सख्त, सभी जिलों को जारी हुए निर्देश

देहरादून।उत्तराखण्ड के राजकीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक अध्ययनरत विद्यार्थियों के सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संचालित ‘आनन्दम् पाठ्यचर्या’ के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। यह पाठ्यचर्या राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप बाल-केंद्रित, अनुभवात्मक, आनंदमय एवं मूल्य-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

गत 12 जनवरी 2026 को आयोजित राज्य स्तरीय ऑनलाइन समीक्षा बैठक के पश्चात निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण (SCERT) उत्तराखण्ड, बन्दना गब्र्याल द्वारा सभी जनपदों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। निदेशक द्वारा स्पष्ट किया गया है कि शासनादेश दिनांक 18 दिसम्बर 2019 के अनुसार विद्यालयों की समय-सारिणी में प्रथम वादन ‘आनन्दम् पाठ्यचर्या’ हेतु अनिवार्य है और इसका अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों, जिला शिक्षा अधिकारियों, डायट प्राचार्यों, खण्ड एवं उप शिक्षा अधिकारियों को नियमित अनुश्रवण करते हुए प्रतिमाह प्रगति आख्या राज्य स्तर पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला व ब्लॉक स्तर पर सन्दर्भ समूह का गठन
प्रत्येक जनपद में मुख्य शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में ‘आनन्दम् जिला सन्दर्भ समूह’ तथा प्रत्येक विकासखण्ड में ‘ब्लॉक सन्दर्भ समूह’ का गठन किया जाएगा। विकासखण्ड स्तर पर किसी सक्रिय शिक्षक अथवा प्रधानाचार्य को ‘आनन्दम् नोडल अधिकारी’ नामित किया जाएगा, जो कार्यक्रम की नियमित समीक्षा करेंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में सहानुभूति, आत्म-अनुशासन, सहयोग, नैतिकता एवं भावनात्मक संतुलन जैसे गुणों का विकास करना है।
‘आनन्दिनी’ संदर्शिका व प्रशिक्षण पर विशेष जोर
समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई विद्यालयों में ‘आनन्दिनी’ शिक्षक संदर्शिका उपलब्ध नहीं है तथा शिक्षकों का समुचित अभिमुखीकरण भी नहीं हो पाया है। इसे गंभीरता से लेते हुए सभी खण्ड शिक्षा अधिकारियों को ‘आनन्दिनी’ पुस्तिकाओं की मांग एवं प्रशिक्षण आवश्यकता की जानकारी डायट एवं राज्य नोडल अधिकारी को समय से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
2026-27 के बजट में अलग प्राविधान
शिक्षा विभाग ने वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट 2026-27 में ‘आनन्दम् पाठ्यचर्या’ के अंतर्गत प्रशिक्षण, संदर्शिका पुनर्मुद्रण एवं अनुश्रवण हेतु पृथक बजट प्राविधान करने के निर्देश भी दिए हैं। डायट, विकासखण्ड एवं संकुल स्तर पर होने वाले प्रत्येक प्रशिक्षण एवं बैठक में ‘आनन्दम्’ अभिमुखीकरण सत्र अनिवार्य होगा। निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण ने दो-टूक शब्दों में कहा कि ‘आनन्दम् पाठ्यचर्या’ विद्यार्थियों के समग्र विकास की आधारशिला है और इसके क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
बैठक में ये रहे उपस्थित
राज्य स्तरीय बैठक में समस्त जनपदों के डायट प्राचार्य, राज्य नोडल अधिकारी ‘आनन्दम् पाठ्यचर्या’ डॉ. बी.पी. मैन्दोली, डॉ. मोहन बिष्ट, प्रोफेशनल सीमैट, समन्वयक-समस्त डायट, समग्र शिक्षा के प्रतिनिधि तथा लभ्य फाउंडेशन और ब्लू ओर्ब फाउंडेशन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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