आपदा प्रबंधन को बड़ी मजबूती: एसडीआरएफ एसडीएमएफ के तहत सैकड़ों करोड़ के प्रस्ताव मंजूर

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में राज्य कार्यकारिणी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) एवं राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि (SDMF) के अंतर्गत प्राप्त प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक में चालू वित्तीय वर्ष के लिए आपदा तैयारी, राहत, पुनर्निर्माण एवं क्षमता निर्माण से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। राज्य आपदा मोचन निधि के अंतर्गत उत्तराखण्ड पुलिस संचार नेटवर्क के उच्चीकरण हेतु ₹15.34 करोड़, मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम एवं राहत वितरण के लिए कुल ₹26 करोड़, दैवीय आपदा से क्षतिग्रस्त पटवारी चौकियों के पुनर्निर्माण हेतु ₹14.95 करोड़ तथा प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग को ₹25 करोड़ स्वीकृत किए गए।
इसके साथ ही मानसून अवधि में अतिवृष्टि एवं बादल फटने से क्षतिग्रस्त मार्गों को खोलने हेतु उत्तराखण्ड ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण को ₹25 करोड़ तथा उत्तराखण्ड प्रशासन अकादमी, नैनीताल स्थित आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की गतिविधियों के लिए ₹44.50 लाख की स्वीकृति दी गई। इसके अलावा जनपद अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल, टिहरी गढ़वाल, चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी गढ़वाल एवं पिथौरागढ़ के जिलाधिकारियों को SDRF के अंतर्गत कुल ₹92.50 करोड़ की कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक में सिंचाई विभाग से जुड़े बाढ़ सुरक्षा एवं भू-कटाव रोकथाम के प्रस्तावों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। चमोली जनपद के गैरसैंण में रामगंगा नदी, उत्तरकाशी के हर्षिल क्षेत्र में भागीरथी नदी, हरिद्वार जनपद के विभिन्न क्षेत्रों तथा चंपावत जनपद में हुड्डी नदी से संबंधित बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए करोड़ों रुपये की स्वीकृति दी गई।
इसके अतिरिक्त देहरादून जनपद के रायपुर एवं धर्मपुर विधानसभा क्षेत्रों में रिस्पना, सौंग, दुल्हनी, सुस्वा सहित विभिन्न नदियों एवं रावों में क्षतिग्रस्त तटबंधों, सुरक्षा दीवारों एवं बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए भी धनराशि स्वीकृत की गई। वहीं लोक निर्माण विभाग को एसडीआरएफ मद के अंतर्गत पौड़ी गढ़वाल के बेलखेत में क्वैराला नदी पर 85 मीटर स्पान के पैदल झूला पुल निर्माण हेतु ₹4.82 करोड़ की मंजूरी दी गई।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वीकृत योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध एवं गुणवत्ता के साथ किया जाए, ताकि आपदा की स्थिति में जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।
