पेंशन न मिलने से सेवानिवृत्त कर्मी व मृतक आश्रित परेशान, हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं मिली राहत

देहरादून। उत्तराखंड शासन द्वारा 16 जनवरी 2026 को जारी आदेश हजारों पेंशनधारकों के लिए गंभीर संकट का कारण बन गया है। इस आदेश के बाद लोक निर्माण विभाग के हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं मृतक कर्मचारियों के आश्रित अपनी जनवरी माह की पेंशन के लिए जिला कोषागारों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। हैरानी की बात यह है कि अब तक उनकी पेंशन उनके बैंक खातों में जमा नहीं हो सकी है।
पेंशनधारकों का कहना है कि जब वे जिला कोषागार में संपर्क करते हैं तो उन्हें बताया जा रहा है कि पेंशन पुनः चालू (री-ओपन) कराने के लिए संबंधित विभाग से लिखवाकर लाना होगा। जबकि लोक निर्माण विभाग के मिनिस्ट्रियल कर्मचारी 6 जनवरी से कार्य बहिष्कार पर हैं, जो अब तक जारी है। ऐसे में पेंशनधारकों के सामने भारी असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
भुखमरी के कगार पर हजारों परिवार
संघ का कहना है कि 16 जनवरी 2026 के शासनादेश ने हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों और मृतक आश्रित परिवारों को भुखमरी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। जिन परिवारों की आजीविका पूरी तरह पेंशन पर निर्भर है, उनके लिए यह स्थिति अत्यंत पीड़ादायक बन चुकी है।
विडंबना यह है कि जिन कर्मचारियों की सेवा काल में मृत्यु हो चुकी है और जिनके परिवारों को पारिवारिक पेंशन मिल रही थी, उनकी पेंशन भी रोक दी गई है।
हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना का आरोप
संघ ने आरोप लगाया है कि माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा 16 जनवरी 2026 के शासनादेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाए जाने के बावजूद पेंशन निदेशालय एवं जिला कोषागारों द्वारा पेंशन पुनः चालू नहीं की गई है। यह स्थिति सीधे तौर पर न्यायालय के आदेशों की अवहेलना मानी जा रही है। पेंशनधारकों का कहना है कि उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद भी न तो सेवानिवृत्त कर्मचारियों को और न ही मृतक आश्रितों को कोई राहत मिल पाई है। मजबूरी में वे रोजाना कोषागारों के चक्कर काट रहे हैं और मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त होने का इंतजार कर रहे हैं।
धरना प्रदर्शन की चेतावनी
लोक निर्माण विभाग नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी संघ ने पेंशन निदेशालय, हकदारी विभाग एवं जिला कोषागारों से मांग की है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों एवं मृतक कर्मचारियों के आश्रितों की पेंशन तत्काल प्रभाव से चालू की जाए। संघ के प्रदेश महासचिव राजेश प्रसाद ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो संघ को जिला कोषागारों पर धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी पेंशन निदेशालय, हकदारी विभाग एवं जिला कोषागार प्रशासन की होगी।
