Uttarakhandउत्तराखंडकोर्ट का निर्णयगाज गिरी

उत्तराखंड में कोर्ट का बड़ा फैसला: आईपीएस लोकेश्वर सिंह पर एफआईआर के आदेश, कोर्ट ने कहा, ‘नग्न कर मारना ड्यूटी नहीं

पिथौरागढ़ CJM कोर्ट सख्त, पुलिसिया कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल

देहरादून। न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता और कानून की सर्वोच्चता को एक बार फिर स्थापित करते हुए पिथौरागढ़ की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत ने बड़ा और सख्त आदेश जारी किया है। अदालत ने पिथौरागढ़ के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक आईपीएस लोकेश्वर सिंह समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने थानेदार को मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच करने तथा एसपी को प्रकरण में दोषी पुलिस कर्मियों की विस्तृत जांच की स्वयं मॉनेटरिंग करने के आदेश दिए हैं। साथ ही कार्यवाही से कोर्ट को अवगत कराने के आदेश दिए हैं। कोर्ट के इस आदेश से जहां पुलिस महकमे में हड़कंप मचा है, वहीं, यह आदेश न सिर्फ पुलिस व्यवस्था के लिए एक बड़ा संकेत है, बल्कि आम जनता के लिए यह भरोसा भी मजबूत करता है कि न्यायपालिका आज भी निष्पक्षता के साथ खड़ी है, चाहे मामला कितना ही प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ क्यों न हो। इससे पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीदें बढ़ जाती है।

कोर्ट की दो टूक: ‘ऐसे कृत्य ड्यूटी का हिस्सा नहीं’
मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पिथौरागढ़ संजय सिंह ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि किसी भी नागरिक को निर्वस्त्र कर मारपीट करना, गाली देना या अपमानित करना किसी भी लोक सेवक के वैधानिक कर्तव्य का हिस्सा नहीं हो सकता। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि ऐसे मामलों में धारा 197 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा लागू नहीं होती।

 क्या था पूरा मामला….!!
यह मामला एक सामान्य नागरिक की शिकायत से शुरू होकर गंभीर आरोपों तक पहुंचा है। शिकायतकर्ता लक्ष्मी दत्त जोशी ने पुलिस लाइन के सीवरेज का गंदा पानी अपने बोरवेल में आने की शिकायत की थी। 6 फरवरी 2023 को वह शिकायत की स्थिति जानने एसपी कार्यालय पहुंचे।आरोप है कि इसी दौरान वहां उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें निर्वस्त्र कर अपमानित किया गया। उनका मोबाइल और पैसे छीन लिए गए और एनकाउंटर की धमकी तक दी गई।

पुलिस ने नहीं लिखी एफआईआर , कोर्ट पहुंचा पीड़ित
पीड़ित का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया, जिसके बाद उन्हें न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अब अदालत ने खुद संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

इन धाराओं में दर्ज होगा मुकदमा
कोर्ट ने आईपीएस लोकेश्वर सिंह समेत अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 323 (मारपीट), धारा 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), धारा 355 (अपमानित करना), धारा 504, 506 (धमकी), धारा 392 (लूट), धारा 120B (आपराधिक साजिश) में मुकदमा दर्ज किया है।

 निष्पक्ष जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने वर्तमान एसपी पिथौरागढ़ को जांच की निगरानी करने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इधर, पहले भी प्रकरण में पूर्व एसपी को राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण पहले ही इस मामले में दोषी मान चुका है। अब अदालत के आदेश से मामले को और मजबूती मिली है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button