छात्रवृत्ति घोटाले में DIT यूनिवर्सिटी पर ED की बड़ी कार्रवाई, शिक्षा जगत में हड़कंप

देहरादून। अनुसूचित जाति (SC) और जनजाति (ST) वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति में हुए कथित बड़े घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत उत्तराखंड के प्रतिष्ठित निजी संस्थान DIT यूनिवर्सिटी के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।ए जेंसी ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी करते हुए संबंधित वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों और जिम्मेदार व्यक्तियों के बयान तलब किए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, ईडी देहरादून ज़ोनल कार्यालय द्वारा चल रही जांच में यह प्रारंभिक तौर पर पाया गया है कि SC/ST विद्यार्थियों को दी जाने वाली सरकारी छात्रवृत्ति के वितरण में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में छात्रवृत्ति की राशि या तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपयोग नहीं हुई या फिर कथित रूप से गलत तरीके से खर्च दिखाई गई।
ईडी ने जांच को आगे बढ़ाते हुए DIT यूनिवर्सिटी के चेयरमैन अनुज अग्रवाल को औपचारिक नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि उन्हें 10 दिनों के भीतर ईडी कार्यालय में उपस्थित होना होगा,अपने स्तर से सभी संबंधित दस्तावेज, बैंक लेन-देन और रिकॉर्ड उपलब्ध कराना होगा,तथा छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया पर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।यह कदम साफ संकेत देता है कि एजेंसी अब संस्थान के आर्थिक लेन-देन और उसकी नीयत दोनों पर गहराई से जांच करेगी।जांच एजेंसियां पहले से थी सक्रिय, अब मामला हुआ और गंभीर
SC/ST छात्रवृत्ति मामले की जांच राज्य स्तर की एजेंसियों द्वारा पहले से ही की जा रही थी, लेकिन ईडी के हस्तक्षेप के बाद अब मामले की गंभीरता कई गुना बढ़ गई है।
माना जा रहा है कि धन के प्रवाह की पूरी चैन की जांच होगी। यह पता लगाया जाएगा कि छात्रवृत्ति की राशि किस तरह और किन खातों के माध्यम से उपयोग की गई। यदि मनी लॉन्ड्रिंग के साक्ष्य मिले तो आगे बड़ी कार्रवाई संभव है
प्रवर्तन निदेशालय की इस कार्रवाई ने प्रदेश के निजी शैक्षणिक संस्थानों में हलचल मचा दी है। DIT यूनिवर्सिटी लंबे समय से प्रदेश का एक प्रमुख शिक्षा केंद्र माना जाता रहा है, ऐसे में ईडी का नोटिस पूरे एकेडमिक जगत के लिए बड़ी खबर है।अब सबकी निगाहें इस बात पर लगी हैं कि आने वाले दिनों में ईडी किन नए खुलासों तक पहुंचती है किन लोगों पर शिकंजा कसता है और क्या जांच दायरा अन्य संस्थानों तक भी बढ़ सकता है। छात्रों की छात्रवृत्ति से जुड़ा यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करता है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी बड़े सवाल खड़े करता है।
