हंसराज कॉलेज में ‘देवोत्सव 2.0’ की धूम: लोक नृत्यों के जरिए गूंजा “पलायन से दूर, संस्कृति की ओर” का नारा

देहरादून/नई दिल्ली: हंसराज कॉलेज के मदन मोहन ऑडिटोरियम में 9 अप्रैल को ‘देवभूमि परिवार’ द्वारा आयोजित भव्य लोक नृत्य प्रतियोगिता ‘देवोत्सव 2.0’ संपन्न हुई। दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों से आई टीमों ने अपनी कला के माध्यम से उत्तराखंड की विलक्षण सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम में 1000 से अधिक दर्शकों की उपस्थिति ने इसे एक ऐतिहासिक सफल आयोजन बना दिया।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक वैभव का अद्भुत प्रदर्शन
तस्वीरों में देखा जा सकता है कि प्रतिभागी पारंपरिक पहाड़ी वेशभूषा में सजे-धजे, हाथों में तलवारें और ढाल लेकर ‘छोलिया’ जैसे वीर गाथा नृत्यों का प्रदर्शन कर रहे थे। रंग-बिरंगे घाघरे और पिछौड़ों में सजी छात्राओं ने अपनी ऊर्जावान प्रस्तुतियों से पूरे ऑडिटोरियम को देवभूमि के रंग में रंग दिया। मंच के पीछे लगा “CONFLUENCE ’26” का बैनर इस बात का प्रतीक बना कि यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि संस्कृतियों का मिलन था।
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रमुख मार्गदर्शकों का सहयोग:
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में कॉलेज के अनुभवी शिक्षकों का विशेष मार्गदर्शन रहा। कार्यक्रम के संयोजक (Convenor) डॉ. आर.सी. गर्ग और सह-संयोजक (Co-Convenor) डॉ. बाल कृष्ण नेगी ने छात्रों के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे विश्वविद्यालय स्तर पर पहाड़ी संस्कृति को पहचान दिलाने वाला एक सशक्त मंच बताया।
आयोजन से झलका नेतृत्व और दृष्टिकोण:
इस पहल की शुरुआत करने वाले देवभूमि परिवार हंसराज कॉलेज के संस्थापक एवं पूर्व अध्यक्ष Akshat Bhatt रहे, जिन्होंने वर्ष 2025 में पहली बार हंसराज कॉलेज में इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन की नींव रखी थी। उन्हीं के पदचिह्नों पर चलते हुए टीम ने इस वर्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया।
कार्यक्रम को लेकर पदाधिकारियों का संकल्प
Rayan Bhatt (वर्तमान अध्यक्ष):”हमारा उद्देश्य केवल कार्यक्रम करना नहीं, बल्कि अपनी पहचान को जीवित रखना है। आने वाले वर्षों में हम इससे भी बड़े स्तर पर अपनी संस्कृति का प्रचार-प्रसार करेंगे।” Gauri Lohani (सांस्कृतिक प्रमुख):”मेरा लक्ष्य दिल्ली के शैक्षणिक संस्थानों में पहाड़ी संस्कृति को और गहराई से समाहित करना है। दे्वोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से हम सुनिश्चित करेंगे कि हमारी विरासत नई पीढ़ी के बीच हमेशा गौरव के साथ बनी रहे।”
अपनी जड़ों की और लौटने की अपील
ऑडिटोरियम पहाड़ी गीतों और ढोल-दमाऊ की थाप से गूंज उठा। प्रतिभागियों ने पारंपरिक वेशभूषा में कुमाऊँनी और गढ़वाली लोक नृत्यों का प्रदर्शन कर उत्तराखंड की जीवंतता को मंच पर उतारा। यह आयोजन न केवल एक प्रतियोगिता थी, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक आह्वान भी था। मीडिया पार्टनर:Current News UK और आयोजक: देवभूमि परिवार, हंसराज कॉलेज द्वारा किया गया।
