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धराली आपदा पर कांग्रेस का वार, चार महीने बाद भी राहत कार्य शून्य, सरकार पर लापरवाही के गंभीर आरोप

देहरादून। धराली आपदा को पूरे चार महीने बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। इस गंभीर स्थिति का जायजा लेने आज उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कई वरिष्ठ नेताओं की टीम ने धराली का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद कांग्रेस ने सरकार पर घोर लापरवाही, उदासीनता और राहत कार्यों की विफलता के आरोप लगाए। साथ ही मलबे में दबे लोगों की शांति की कामना की।

धराली का निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत में प्रदेश अध्यक्ष गोदियाल ने कहा कि धराली में ज़मीनी स्तर पर एक इंच भी काम नहीं हुआ है। सरकार सिर्फ बयानबाजी, ड्रोन सर्वे और प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहत बांट रही है, जबकि लोग आज भी जीवन की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं। कांग्रेस नेताओं के अनुसार राहत और पुनर्विकास से जुड़े अधिकतर सरकारी दावे कागज़ों तक सीमित हैं। निरीक्षण के दौरान कांग्रेस नेतृत्व ने सबसे द्रवित करने वाला तथ्य सामने रखा कि कई शव अब भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। लेकिन उनकी खोज के लिए कोई अभियान नहीं चलाया गया, उल्टा उन्हीं शवों के ऊपर से यात्रा मार्ग बना दिया गया।कांग्रेस ने इसे “मानवता के विरुद्ध और सभ्य शासन के लिए कलंक” बताया। कांग्रेस नेताओं ने जानकारी दी कि आपदा के बाद स्थानीय रोजगार पूरी तरह ठप हो गया, पर्यटन आधारित आजीविका बर्बाद हो चुकी है, होटल कारोबारियों को अब तक एक रुपये का मुआवज़ा भी नहीं मिला।नेताओं के मुताबिक सरकार के मंत्री कैमरों के सामने राहत घोषणाएँ करते हैं, जबकि धराली के लोगों तक सहायता अब तक नहीं पहुंच सकी है।कांग्रेस दल ने बताया कि वर्तमान में नदी का जलस्तर न्यूनतम है, जो चैनलाइजेशन व सुरक्षा कार्य शुरू करने के लिए सबसे उपयुक्त समय था। परंतु सरकार ने अब तक एक भी संरक्षण कार्य शुरू नहीं किया है। कांग्रेस नेतृत्व ने चेतावनी दी कि यदि तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो धराली और हर्षिल दोनों आने वाले समय में गंभीर खतरे में पड़ेंगे।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा आज धराली पूरी तरह बेसहारा छोड़ दिया गया है। कांग्रेस धराली के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।कांग्रेस सरकार आने पर धराली का पूर्ण पुनर्निर्माण किया जाएगा और इसे गंगा घाटी का आदर्श मॉडल गाँव बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि  धराली के लोग अभी भी उम्मीद के इंतज़ार में हैं, और सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर अब सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

निरीक्षण के दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करण महरा, जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह रावत, घनानन्द नौटियाल, कनकपाल सिंह परमार, दिनेश गौड़, सुधीश पंवार, प्रेमकांत सेमवाल, विजयपाल रावत, गरिमा दसौनी, राजेंद्र गुसाईं, बीना शाह, मधु रावत तथा स्थानीय ग्रामीण प्रतिनिधि उमेश पंवार, सचेंद्र पंवार और ममराज पंवार उपस्थित रहे।

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