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समग्र शिक्षा उत्तराखंड के स्टॉफ ऑफिसर भगवती प्रसाद मैन्दोली को पीएच.डी. की उपाधि

देहरादून।उत्तराखंड राज्य के माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए यह गर्व का विषय है कि राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा उत्तराखंड में स्टॉफ ऑफिसर के पद पर कार्यरत डॉ. भगवती प्रसाद मैन्दोली को लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू), फगवाड़ा, पंजाब के 12वें दीक्षांत समारोह में पीएच.डी. (डाक्टरेट) की उपाधि से सम्मानित किया गया।

विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित दीक्षांत समारोह में यूनाइटेड किंगडम की पूर्व प्रधानमंत्री मैरी एलिज़ाबेथ ट्रस ने डॉ. मैन्दोली को यह उपाधि प्रदान की। समारोह में एलपीयू के संस्थापक एवं चांसलर तथा राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल, उनकी पत्नी एवं एलपीयू की वाइस चांसलर श्रीमती रश्मि मित्तल भी उपस्थित रहीं।
डॉ. मैन्दोली ने प्रोफेसर विजय कुमार छैछी, डिप्टी डीन, एलपीयू के मार्गदर्शन में वर्ष 2025 में
“उत्तराखण्ड में हैप्पीनेस करिकुलम को अपनाने वाले विद्यालयों में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों में विकसित दक्षताएँ: एक तुलनात्मक अध्ययन” विषय पर अपना शोध कार्य पूर्ण किया। यह शोध उत्तराखंड के विद्यालयी शिक्षा तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शोध निष्कर्ष शिक्षकों की शैक्षणिक दक्षताओं के साथ-साथ विद्यार्थियों के सामाजिक-भावनात्मक विकास, जीवन कौशल, आत्म-अनुशासन एवं सकारात्मक व्यवहार को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होंगे।
वर्तमान में डॉ. मैन्दोली उत्तराखंड राज्य में ‘आनन्दम् (हैप्पीनेस) पाठ्यक्रम’ के नोडल अधिकारी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके शोध अनुभव और अकादमिक दृष्टि से राज्य के सरकारी विद्यालयों में हैप्पीनेस करिकुलम के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग एवं गुणवत्ता संवर्धन को नई दिशा मिलने की संभावना है।
लगभग 58 वर्ष की आयु, सेवानिवृत्ति के निकट पहुँचकर पीएच.डी. जैसी उच्चतम शैक्षणिक उपलब्धि अर्जित करना उनके सतत अध्ययन, अनुशासन और शिक्षा के प्रति आजीवन समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। इससे पूर्व वे राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोपेश्वर से वनस्पति विज्ञान में एम.एससी. में विश्वविद्यालय टॉपर रह चुके हैं। बी.एड., एम.ए. (शिक्षाशास्त्र) एवं एम.ए. (सामाजिक कार्य) जैसी अनेक उपाधियाँ उनके बहुआयामी शैक्षणिक व्यक्तित्व को दर्शाती हैं।
डॉ. मैन्दोली की इस उपलब्धि पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों ने उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। स्वयं डॉ. मैन्दोली ने इस सफलता का श्रेय अपने मार्गदर्शक शिक्षकों, विभागीय अधिकारियों एवं शुभचिंतकों को देते हुए आभार व्यक्त किया है। यह उपलब्धि इस तथ्य को रेखांकित करती है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और दृढ़ संकल्प के साथ हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

 

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