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गजब : चोरी की स्कूटी से चोर घूम रहा शहरभर में, आरटीओ ने काटा फोटो समेत चालान और पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर गहरी नींद में सो गई

देहरादून। राजधानी में मित्र पुलिस की मित्रता अब इतनी उदार हो चुकी है कि वह जाने-अनजाने नहीं, बल्कि जाने-पहचाने चोरों पर भी खुलकर बरस रही है। हालात ऐसे हैं कि चोरी की स्कूटी पर चोर बेखौफ होकर शहर में मटरगश्ती कर रहा है और पुलिस मानो जानबूझकर उसी से आँखें चुरा रही हो। इसका प्रमाण यह है कि ज़ब चोर को पकड़ कर आरटीओ के टीटीओ ने चोरी की स्कूटी का चालान कर फोटो समेत पीड़ित को भेज दी , लेकिन पुलिस की नींद तब भी नहीं जागी। अब पीड़ित पुलिस की इस लापरवाही के खिलाफ जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई के मूड में है।

हद तो तब हो गई जब चोर ने चोरी की स्कूटी से यातायात नियमों की ऐसी धज्जियाँ उड़ाईं कि एक-दो नहीं, पूरे चार-चार चालान कटवा लिए। हर बार कैमरे में उसका चेहरा कैद हुआ, जुर्माना भी तय हो गया—लेकिन पुलिस की गिरफ्त आज तक उस तक नहीं पहुँच पाई। ऐसा लगता है मानो पुलिस इस भ्रम में जी रही हो कि चोर अपनी सैर-सपाटे से ऊबकर एक दिन खुद ही स्कूटी लौटाने आ जाएगा।

स्कूटी चोरी, रिपोर्ट दर्ज… और फिर पुलिस की गहरी नींद

यह पूरा मामला अजबपुर खुर्द स्थित सरस्वती विहार निवासी नितिन सिलवाल की स्कूटी से जुड़ा है। 14 नवंबर 2025 की रात नितिन की स्कूटी उनके घर के बाहर से चोरी हो गई। पीड़ित ने तुरंत थाना नेहरू कॉलोनी में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई। लेकिन रिपोर्ट दर्ज होना शायद पुलिस की जिम्मेदारी की अंतिम सीमा थी। इसके बाद स्कूटी की तलाश में न तो कोई सक्रियता दिखी, न कोई नतीजा। मजबूर होकर नितिन ने जनवरी 2026 में थानाध्यक्ष को पत्र लिखकर गुहार लगाई—पर वह पत्र भी शायद किसी फाइल के नीचे दबकर “लापता” हो गया।

पुलिस नहीं ढूंढ पाई स्कूटी, चोर ने करा दिए चार चालान

जहाँ मित्र पुलिस पूरी तरह नाकाम साबित हुई, वहीं चोर ने शहरभर में स्कूटी दौडाई और ट्रैफिक रूल तोड़ते हुए आरटीओ के टीटीओ से चार चालान कराते हुए पुलिस को खुली चुनौती दे कर अपनी ‘उपलब्धियाँ’ खुद दर्ज करवा दीं। जानकारी के अनुसार 26 फरवरी 2026 को चोरी की स्कूटी से चलते हुए उसने एक साथ चार यातायात चालान कटवा डाले, जिसमें बिना हेलमेट वाहन चलाने का, मोबाइल पर बात करते हुए स्कूटी दौड़ाने का, यातायात पुलिस के निर्देशों की अवहेलना का और प्रदूषण मानकों के उल्लंघन का चालान कराया गया।  इन सभी मामलों में आरटीओ की टीटीओ द्वारा 6500 रुपये का जुर्माना भी ठोका गया। मज़े की बात यह है कि चालान में चोर का फोटो भी साफ-साफ नजर आ रहा है। यानी अपराधी अब बिना नाम के सही, लेकिन चेहरे के साथ सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है।

फोटो है, चालान है… बस पुलिस की ‘नियत’ गायब है

यह शायद देहरादून का पहला ऐसा मामला होगा जहाँ चोर की तस्वीर सरकारी कैमरों में कैद है, अपराध की पूरी टाइमलाइन मौजूद है, जुर्माने की रसीद तक तैयार है लेकिन फिर भी चोर आज़ाद घूम रहा है और पीड़ित अपनी स्कूटी के लिए दर-दर भटक रहा है। अब सवाल यह नहीं है कि चोर कौन है, सवाल यह है कि क्या मित्र पुलिस उसे पहचानना चाहती भी है या नहीं?, अगर चार चालान काटने के बाद भी चोर नहीं पकड़ा जा सकता, तो फिर CCTV, ई-चालान और स्मार्ट पुलिसिंग के दावे किस काम के?

उम्मीद सिर्फ इतनी… कि ‘मित्रता’ अब पीड़ित से भी निभाई जाए

पीड़ित नितिन को अभी तक अपनी स्कूटी तो नहीं मिली, लेकिन चोर की करतूतों का पूरा लेखा-जोखा जरूर थमा दिया गया है। अब जनता को मित्र पुलिस से सिर्फ इतनी उम्मीद है कि वह चोर से निभाई जा रही यह ‘मित्रता’ तोड़े और कम से कम उस पीड़ित के साथ खड़ी हो—जिसने कानून पर भरोसा किया था। वरना देहरादून में यह संदेश साफ चला जाएगा कि चोरी करो, चालान कटवाओ, फोटो खिंचवाओ पकड़े फिर भी नहीं जाओ।

 

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