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समरवैली स्कूल में छात्रा से छेड़छाड़ के आरोपों पर हंगामा, प्रबंधन की भूमिका पर उठे सवाल

देहरादून। शहर के समरवैली स्कूल में 11वीं की छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ का मामला तूल पकड़ गया है। शुक्रवार को छात्रा की मां स्कूल पहुंचीं तो हंगामे की स्थिति बन गई। मां ने भौतिक विज्ञान के शिक्षक पर करीब डेढ़ माह से बेटी को परेशान करने और अनुचित तरीके से छूने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि शिकायत करने के बावजूद स्कूल प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय उनकी बेटी पर ही दबाव बनाने का प्रयास किया। हालांकि, स्कूल के प्रधानाचार्य ने शिक्षक को 16 अक्टूबर को निलंबित किए जाने की बात कही है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि यदि कार्रवाई हो चुकी थी तो शिकायतकर्ता परिवार की नाराजगी दूर क्यों नहीं हुई और मामले को लेकर दोनों पक्षों के दावों की निष्पक्ष जांच क्यों जरूरी नहीं समझी जा रही?

शिकायत के बाद छात्रा पर दबाव बनाने का आरोप
छात्रा की मां के अनुसार, बेटी ने उन्हें बताया था कि शिक्षक उसके साथ अनुचित व्यवहार करता है और गलत तरीके से छूता है। मां का दावा है कि कक्षा की अन्य छात्राओं के साथ भी शिक्षक का व्यवहार इसी तरह का रहा है। उन्होंने बताया कि बच्चों के भविष्य और लोकलाज के कारण शुरुआत में शिकायत करने से परहेज किया, लेकिन 14 अक्टूबर को स्कूल पहुंचने में देर होने पर शिक्षक द्वारा बेटी को धक्का देते हुए प्रधानाचार्य कक्ष तक ले जाने की घटना के बाद उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया। मां के मुताबिक, बेटी से पूरी बात जानने के बाद वह 15 अक्टूबर को स्कूल पहुंचीं और प्रधानाचार्य को लिखित शिकायत सौंपी। उनका दावा है कि शिकायत पर 15 छात्राओं के हस्ताक्षर थे। उस समय प्रधानाचार्य ने छात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आरोपी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने का भरोसा दिया था। मां का आरोप है कि बाद में उनकी बेटी को प्रधानाचार्य कक्ष में बुलाया गया, जहां निदेशक ने उसके आरोपों पर सवाल उठाए। मां के अनुसार, छात्रा से कथित तौर पर कहा गया कि शिक्षक उसे कैसे छूता है, यह छूकर बताए। शिक्षक की उम्र का हवाला देते हुए उसके पिता के छूने से भी तुलना की गई।

पढ़ाई और भविष्य का डर दिखाने का आरोप
मां का आरोप है कि छात्रा को उसकी और उसके भाई की पढ़ाई प्रभावित होने का डर दिखाया गया। यह भी कहा गया कि बीच सत्र में दूसरे स्कूल में दाखिला मिलना मुश्किल हो सकता है। उनका कहना है कि बेटी एथलेटिक्स की कई स्पर्धाओं में हिस्सा ले चुकी है और उसे अपने भविष्य की चिंता सताने लगी थी। मां ने यह भी आरोप लगाया कि मामले को खत्म कराने के प्रयास में खेलों से जुड़े बाहरी लोगों को शामिल किया गया, जिससे उनके और स्कूल प्रबंधन के बीच की शिकायत कई अन्य लोगों तक पहुंच गई। इसी से नाराज होकर वह शुक्रवार को स्कूल पहुंचीं।

स्कूल का गेट बंद करने और पुलिस बुलाने का आरोप
शुक्रवार को स्कूल पहुंचने पर गेट भीतर से बंद किए जाने और पुलिस बुलाए जाने का आरोप भी छात्रा की मां ने लगाया है। उनका कहना है कि उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत दिए जाने की जानकारी दी, लेकिन स्कूल की ओर से शिकायत दिखाने से इनकार कर दिया गया। मां ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई और स्कूल प्रबंधन से प्रार्थना सभा में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने बताया कि वह शनिवार को शिक्षा विभाग के अधिकारियों और जिलाधिकारी से मुलाकात कर अपनी शिकायत रखेंगी।

प्रधानाचार्य बोले, 16 अक्टूबर को ही किया निलंबित

वहीं, स्कूल के प्रधानाचार्य सोनू कुंद्रा का कहना है कि इस प्रकरण में 15 अक्टूबर को शिकायत प्राप्त हुई थी और मामले की जांच की गई। उनके अनुसार, 16 अक्टूबर को ही संबंधित शिक्षक को निलंबित कर दिया गया था। उन्होंने अब मामले को बिना वजह तूल दिए जाने की बात कही है।

जांच से तय होनी चाहिए जवाबदेही
इस पूरे प्रकरण में स्कूल प्रबंधन और शिकायतकर्ता के दावों के बीच विरोधाभास सामने आया है। एक ओर मां छात्रा पर दबाव बनाने और शिकायत को दबाने के प्रयास का आरोप लगा रही हैं, वहीं प्रधानाचार्य कार्रवाई किए जाने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि शिकायत, जांच की प्रक्रिया और शिक्षक के निलंबन से संबंधित तथ्यों की स्वतंत्र रूप से पड़ताल करें। मामला एक नाबालिग छात्रा की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा है। इसलिए केवल निलंबन का दावा कर प्रकरण को समाप्त मान लेना पर्याप्त नहीं होगा। यह स्पष्ट होना चाहिए कि शिकायत पर क्या जांच हुई, छात्रा और अन्य संबंधित विद्यार्थियों के बयान किस तरह दर्ज किए गए तथा उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए। आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, शिकायत करने वाली छात्रा या अन्य विद्यार्थियों पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं पड़ना चाहिए।

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