Uttarakhandउत्तराखंडएसटीएफ की बड़ी कार्रवाई

उत्तराखंड में साइबर ठगी पर एसटीएफ की ताबड़तोड़ कार्रवाई, एक सप्ताह में 73 लाख रुपये बचाए

1930 हेल्पलाइन पर मिली शिकायतों के बाद बैंक खातों को कराया फ्रीज, छह मामलों में लाखों की रकम होल्ड

देहरादून। साइबर ठगी के मामलों में उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की कार्रवाई लगातार जारी है। साइबर अपराध की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय वित्तीय हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से त्वरित कार्रवाई कर पीड़ितों की ठगी गई रकम को होल्ड अथवा फ्रीज कराया जा रहा है। एसटीएफ के अनुसार 19 सितंबर से 26 सितंबर 2026 के बीच एक सप्ताह में विभिन्न मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के शिकार लोगों की करीब 73 लाख रुपये की धनराशि बचाई गई।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ उत्तराखंड अजय सिंह ने साइबर अपराध पीड़ितों को तत्काल राहत दिलाने और साइबर ठगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में एसटीएफ के अधीन संचालित साइबर हेल्पलाइन 1930 कंट्रोल रूम की टीम शिकायत मिलते ही संबंधित बैंकों, मर्चेंट और नोडल अधिकारियों से समन्वय कर संदिग्ध खातों में पहुंची रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने के लिए कार्रवाई कर रही है।

छह मामलों में लाखों की रकम होल्ड
एसटीएफ के मुताबिक पिछले एक सप्ताह में छह प्रमुख मामलों में त्वरित कार्रवाई की गई। इनमें पिथौरागढ़ की निर्मला भट्ट से इंश्योरेंस पॉलिसी अपडेट करने के नाम पर 93,130 रुपये की ठगी की गई थी। 19 सितंबर को शिकायत मिलने के बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए 56,054.39 रुपये होल्ड कराए। इसी तरह 23 सितंबर को ऊधमसिंहनगर के झनकईया निवासी गीता देवी ने फर्जी APK लिंक के माध्यम से 1.88 लाख रुपये की ठगी की शिकायत की। कार्रवाई के बाद उनकी 71,973.08 रुपये की रकम होल्ड कराई गई।
देहरादून के पटेलनगर निवासी कार्तिकेय से APK लिंक के जरिए 50 हजार रुपये की साइबर ठगी हुई। 22 सितंबर को शिकायत मिलने के बाद टीम ने त्वरित कार्रवाई कर 49,999 रुपये की पूरी रकम होल्ड करा दी। ऋषिकेश निवासी अतुल रावत से 24 सितंबर को फर्जी Trading Investment App के जरिए दो लाख रुपये की ठगी की गई। मामले में साइबर हेल्पलाइन टीम ने संबंधित बैंकों और मर्चेंट नोडल अधिकारियों से तत्काल संपर्क किया। इसके परिणामस्वरूप ठगी गई रकम में से 1,33,408.72 रुपये संदिग्ध बैंक खातों में फ्रीज/होल्ड करा दिए गए।

देहरादून के पटेलनगर निवासी विजय अरोरा के क्रेडिट कार्ड से APK फाइल के माध्यम से 56,502 रुपये की धोखाधड़ी की गई। शिकायत मिलने के बाद टीम ने पूरी 56,502 रुपये की राशि होल्ड करा ली। वहीं, बागेश्वर निवासी बबली देवी को Trading Investment App के जरिए पैसा दोगुना करने का झांसा देकर 97,500 रुपये की ठगी की गई। 24 सितंबर को मिली शिकायत पर कार्रवाई करते हुए टीम ने 86,101.02 रुपये होल्ड करा लिए।

समय पर शिकायत से बच सकती है रकम

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के मुताबिक साइबर ठगी में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। ठगी के तुरंत बाद 1930 पर शिकायत दर्ज कराने से रकम को ठगों के खातों में आगे ट्रांसफर होने से रोकने की संभावना बढ़ जाती है। इसके लिए पीड़ितों को घटना के बाद देरी न करते हुए तत्काल साइबर हेल्पलाइन पर सूचना देने की सलाह दी गई है।
एसटीएफ ने आमजन से अपील की है कि अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें और कमीशन के लालच में बैंक खाता किराये पर देना भी अपराध है। इसके अलावा ATM कार्ड, OTP, PIN और UPI PIN किसी के साथ साझा न करें। खाते में किसी अज्ञात स्रोत से रकम आने पर तत्काल बैंक और पुलिस को सूचित करें।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने वालों से रहें सावधान

पुलिस ने लोगों को तथाकथित डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी से भी सतर्क रहने को कहा है। एसटीएफ के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल अथवा फोन पर गिरफ्तारी का भय दिखाता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कोई भी सरकारी जांच एजेंसी ऑनलाइन तरीके से गिरफ्तारी नहीं करती। पुलिस ने अनजान नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल पर बातचीत नहीं करने और किसी अज्ञात व्यक्ति को व्यक्तिगत जानकारी अथवा दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने की सलाह दी है।

निवेश के नाम पर बढ़ रहा ठगी का जाल

एसटीएफ ने तेजी से बढ़ रहे इन्वेस्टमेंट स्कैम को लेकर भी लोगों को सावधान किया है। ठग फर्जी वेबसाइट, नकली निवेश एप और झूठे रिव्यू अथवा शुरुआती छोटे लाभ का लालच देकर लोगों का भरोसा जीतते हैं। इसके बाद अधिक मुनाफे का झांसा देकर उनसे लगातार बड़ी रकम निवेश कराई जाती है। पुलिस ने लोगों से कम समय में अधिक मुनाफे के लालच में निवेश नहीं करने और किसी भी संदिग्ध निवेश योजना, वेबसाइट या एप की विश्वसनीयता जांचने की अपील की है। साथ ही गूगल अथवा अन्य सर्च इंजन से कस्टमर केयर नंबर खोजकर संपर्क न करने की सलाह दी गई है। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराने अथवा cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत करने की अपील की गई है।

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