एमबीबीएस दाखिले में फर्जी प्रमाणपत्रों की आशंका, 370 अभ्यर्थियों की सूची से मचा हड़कंप

सुशील रावत, वरिष्ठ पत्रकार देहरादून।
उत्तराखंड में नीट स्टेट कोटे के तहत एमबीबीएस दाखिलों में फर्जी स्थायी निवास और अन्य प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल की आशंका ने चिकित्सा शिक्षा विभाग की चिंता बढ़ा दी है। वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप बहुगुणा ने शुक्रवार को चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल से मुलाकात कर 370 अभ्यर्थियों की सूची सौंपते हुए प्रमाणपत्रों की जांच कराने और अपात्र पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मंत्री ने संबंधित जिलाधिकारियों से जांच कराकर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि स्टेट कोटे की सीटों पर वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों को ही प्रवेश मिलना चाहिए। यदि जांच में किसी अभ्यर्थी के प्रमाणपत्र फर्जी अथवा नियमों के विपरीत पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और पात्र अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की जाएगी।
पांच प्रमाणपत्र जांच में फर्जी मिले
फर्जी प्रमाणपत्रों के आरोपों के बीच फ्रीडम फाइटर कोटे से जुड़े पांच अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र जांच में फर्जी पाए जाने के बाद निरस्त किए जा चुके हैं। संबंधित स्थायी निवास प्रमाणपत्र भी रद्द किए गए हैं। एसडीएम के निर्देश पर चार मामलों में एफआईआर दर्ज कराए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले की जांच चिकित्सा शिक्षा मंत्री के निर्देश पर जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान की ओर से गठित समिति ने की। समिति में सीडीओ और एडीएम स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया था। जांच के बाद स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों को निरस्त करने की कार्रवाई की गई।
एक ही कथित स्वतंत्रता सेनानी की तीन पोतियों को अलग-अलग कॉलेजों में मिली सीट
मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि एक ही स्वतंत्रता सेनानी धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह की पोती होने का दावा करने वाली तीन अभ्यर्थियों—तृप्ति, परी और खुशी—को अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में सीट आवंटित की गई थी। तृप्ति को हरिद्वार, परी को हल्द्वानी और खुशी को श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला था। जांच के बाद इनका प्रवेश निरस्त कर दिया गया।.दस्तावेजों में तीनों के पते भी अलग-अलग पाए गए। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र में 21/1 तरली राजीव नगर, तरली कंडोली, देहरादून का पता दर्ज था, जबकि स्थायी निवास प्रमाणपत्र में 32/32 डांडीपुर मोहल्ला, देहरादून तथा अन्य दस्तावेजों में हरिद्वार और मुजफ्फरनगर के पते सामने आए।
कथित स्वतंत्रता सेनानी के पते पर भी उठे सवाल
जांच के दौरान बताए गए पते का भौतिक सत्यापन भी किया गया। तरली कंडोली स्थित 21/1 नंबर के पते पर ऐसा कोई मकान नहीं मिला। स्थानीय लोगों से पूछताछ में भी संबंधित नाम के स्वतंत्रता सेनानी के वहां रहने की पुष्टि नहीं हुई। परिवार के एक सदस्य ने बताया कि धर्मवीर नाम के व्यक्ति वहां जरूर रहते थे, लेकिन वे स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे। उनके अनुसार धर्मवीर सर्वे ऑफ इंडिया में चालक के रूप में कार्यरत थे। परिवार में उनके दो पुत्र थे, जिनमें से एक सेलाकुई में रहता है और दूसरे का निधन हो चुका है।
फ्रीडम फाइटर कोटे की सात सीटों पर सवाल
प्रदीप बहुगुणा ने स्टेट कोटे की सीटों में बड़े पैमाने पर अनियमितता की आशंका जताई है। उनका आरोप है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फ्रीडम फाइटर कोटे की नौ सीटों में से सात सीटें ऐसे अभ्यर्थियों को आवंटित कर दी गईं, जिनकी पात्रता संदिग्ध थी।.पिछले वर्ष पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने के कारण फ्रीडम फाइटर कोटे की कुछ सीटें रिक्त रह गई थीं। इसके विपरीत इस वर्ष सरकारी कॉलेजों की 11 सीटों में से नौ सीटें प्रथम चरण की काउंसलिंग में ही आवंटित हो गईं। इसी अंतर ने भी सवाल खड़े किए हैं।
अंतिम दिनों में जारी हुए प्रमाणपत्र
नीट की प्रथम चरण की काउंसलिंग कराने वाले उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर फ्रीडम फाइटर कोटे के 24 आवेदकों की सूची जारी की गई थी। इसी सूची के आधार पर प्रमाणपत्रों की पड़ताल शुरू हुई। आरोप है कि अधिकांश आवेदकों ने 17, 18 और 24 अगस्त को ही संबंधित प्रमाणपत्र हासिल किए थे। कुछ प्रमाणपत्र ऑनलाइन और कुछ ऑफलाइन जारी होने की बात सामने आई है। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली जैसे अन्य राज्यों से की थी। हालांकि केवल दूसरे राज्य से शिक्षा प्राप्त करना अपने आप में अपात्रता का आधार नहीं है, लेकिन संबंधित श्रेणी और राज्य कोटे की पात्रता के सभी दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी है।
एक प्रमाणपत्र नंबर भी सवालों के घेरे में
दून मेडिकल कॉलेज में आवंटित एक सीट के मामले में भी प्रमाणपत्र को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि अभ्यर्थी प्रांयजल की ओर से दर्ज किया गया प्रमाणपत्र नंबर जारी ही नहीं हुआ था और उस नंबर से किसी अन्य व्यक्ति ने आवेदन किया था। इसके बावजूद सीट आवंटित किए जाने का दावा किया गया है। इस मामले की भी जांच की मांग की गई है।
कार्रवाई के डर से तीन अभ्यर्थी प्रवेश लेने नहीं पहुंचे
फर्जी प्रमाणपत्रों की आशंका वाले कुछ अभ्यर्थियों में से प्रांयजल, संस्कृति पाल और जान्हवी जायसवाल के प्रवेश लेने के लिए कॉलेज नहीं पहुंचने की जानकारी दी गई है। वहीं परी, तृप्ति और खुशी के प्रवेश निरस्त किए जा चुके हैं। इनके स्थायी निवास प्रमाणपत्र भी रद्द कर दिए गए हैं।
प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
स्वतंत्रता सेनानी और उनके उत्तराधिकारियों से संबंधित प्रमाणपत्र जारी करने की निर्धारित प्रक्रिया में स्वतंत्रता सेनानी की पेंशन पट्टा संख्या, मूल निवास, वर्तमान पता, शासनादेश संख्या और उत्तराधिकारी से संबंधित विवरण दर्ज किया जाता है। उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र में लाभार्थी का आधार नंबर और स्वतंत्रता सेनानी से संबंध का विवरण भी शामिल होता है। ऐसे प्रमाणपत्र जिला कार्यालय में उपलब्ध अभिलेखों तथा विभिन्न स्तरों पर सत्यापन के बाद जारी किए जाते हैं।
स्वतंत्रता सेनानी एवं उत्तराधिकारी कल्याण समिति के अध्यक्ष संदीप शास्त्री और जिलाध्यक्ष डॉ. एमआर सकलानी ने भी पूरे मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि स्टेट कोटे में फ्रीडम फाइटर श्रेणी के तहत एमबीबीएस में प्रवेश पाने वाले सभी अभ्यर्थियों के स्वतंत्रता सेनानी और स्थायी निवास प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों को उनका अधिकार मिल सके। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र रघुवंशी ने बताया कि उन्होंने करीब एक माह पहले मुख्यमंत्री से मुलाकात कर ऐसी आशंका जताई थी और प्रमाणपत्रों की जांच की मांग की थी।
370 की सूची की जांच के बाद सामने आएगी तस्वीर
अब 370 अभ्यर्थियों की सूची सौंपे जाने के बाद जिला स्तर पर प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित अभ्यर्थियों के प्रवेश और प्रमाणपत्रों पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं विभागीय जांच से यह भी स्पष्ट होगा कि फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला केवल फ्रीडम फाइटर कोटे तक सीमित है या अन्य श्रेणियों में भी ऐसी शिकायतें हैं।