काशी हिंदी विद्यापीठ ने डॉ. रामगोपाल भट्ट को प्रदान की ‘विद्या वाचस्पति’ की मानद उपाधि

देहरादून। हिंदी भाषा, साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालीन योगदान तथा 37 वर्षों की अविरल राजकीय सेवा के साथ-साथ शिक्षणेत्तर गतिविधियों में उल्लेखनीय भूमिका के लिए डॉ. रामगोपाल भट्ट को ‘विद्या वाचस्पति’ (पीएचडी समतुल्य) की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया। यह सम्मान काशी हिंदी विद्यापीठ द्वारा 19 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान प्रदान किया गया।

समारोह में देश के विभिन्न प्रांतों से आए शिक्षाविदों, साहित्यकारों और शोधकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। विद्यापीठ की अकादमिक परिषद की अनुशंसा पर यह मानद उपाधि डॉ. भट्ट को हिंदी सेवा, सरस्वती साधना, कला-संस्कृति, शोध कार्य तथा सामाजिक-शैक्षणिक क्षेत्र में उनके महत्त्वपूर्ण योगदान के आधार पर प्रदान की गई।
डॉ. रामगोपाल भट्ट मूल रूप से उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जनपद से हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार, शैक्षणिक गतिविधियों, शोध और सेवा कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाया। उनकी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित शैक्षणिक प्रतिष्ठा को भी इस सम्मान का प्रमुख आधार माना गया। सम्मान ग्रहण करते हुए डॉ. भट्ट ने इसे हिंदी भाषा और संस्कृति की सेवा में समर्पित सभी प्रयासों का सामूहिक सम्मान बताया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित विद्वानों ने उनके योगदान की सराहना करते हुए इसे हिंदी जगत के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।
