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देहरादून: 34 बेटियों की थमी पढ़ाई को डीएम ने दी नई उड़ान, ‘नंदा-सुनंदा’ से 9 लाख की सहायता

देहरादून। आर्थिक तंगी, पिता के निधन, गंभीर बीमारी और पैरालाइज्ड अभिभावकों की वजह से जिन 34 बेटियों की पढ़ाई बीच में रुक गई थी, उन्हें जिला प्रशासन ने फिर से शिक्षारूपी पंख दे दिए हैं। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित प्रोजेक्ट ‘नंदा-सुनंदा’ के 13वें संस्करण में जिलाधिकारी सविन बंसल ने 9 लाख रुपये की सहायता राशि के चेक वितरित कर इन बालिकाओं की बाधित शिक्षा को पुनर्जीवित किया।

कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने कहा कि बालिकाएं ही सच्ची “नंदा-सुनंदा देवियां” हैं। उनकी शिक्षा को पुनर्जीवित कर उन्हें आत्मनिर्भर और योग्य बनाना ही असली वंदना है। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपनी शिक्षा की ललक बनाए रखें, महापुरुषों की जीवनी पढ़ें और जीवन में सफल होकर अन्य बालिकाओं के लिए रोल मॉडल बनें।स्कूलों का असंवेदनशील रवैया भी आया सामने
कई बालिकाओं के परिजनों ने भावुक होकर बताया कि फीस न भर पाने की वजह से स्कूलों ने छात्राओं को 15-15 दिन तक स्कूल से बाहर खड़ा रखा और परीक्षा में बैठने से भी रोका। ऐसे में परिवार भविष्य को लेकर चिंतित था, लेकिन ‘नंदा-सुनंदा’ योजना ने उम्मीद की किरण जगा दी।
इन बेटियों की शिक्षा फिर हुई शुरू
कैंसर पीड़ित पिता की बेटी सृष्टि की बीसीए 5वें सेमेस्टर की पढ़ाई फिर शुरू हुई। पैरालाइज्ड पिता की बेटी शिवांगी (बीएजे एंड एमसी डिजिटल, द्वितीय सेमेस्टर) की उच्च शिक्षा को सहारा मिला। पिता के निधन के बाद बाधित हुई अलैका रावत (बीएससी नर्सिंग), आकृति बडोनी (बीकॉम), तनिका (कक्षा 10), लावण्या (कक्षा 9), दिव्या (कक्षा 6), नंदनी (यूकेजी), ईशिका (कक्षा 3) समेत कई अन्य बालिकाओं की पढ़ाई दोबारा पटरी पर आई। यूकेजी की छात्रा मानवी सहित अन्य जरूरतमंद बालिकाओं को भी योजना का लाभ मिला। परिजनों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खराब आर्थिक स्थिति के बीच यह मदद उनके बच्चों के भविष्य के लिए संजीवनी साबित हुई है।

अब तक 126 बालिकाओं को मिला लाभ

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में संचालित ‘नंदा-सुनंदा’ प्रोजेक्ट के तहत अब तक 62 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि देकर 126 बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित किया जा चुका है। कार्यक्रम में उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरि, उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेंद्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट सहित अभिभावक उपस्थित रहे। संदेश साफ है—जरूरतमंद बेटियों की शिक्षा ही असली पूजा है।

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