साइबर ठगी की रकम लौटाने में अब तेजी, 1930 शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई और म्यूल खातों पर निगरानी के निर्देश

देहरादून। साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने और साइबर ठगी के पीड़ितों को उनकी फंसी धनराशि जल्द वापस दिलाने को लेकर उत्तराखंड शासन ने गंभीरता बढ़ा दी है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सोमवार को देहरादून में हुई महत्वपूर्ण बैठक में साइबर वित्तीय अपराधों की रोकथाम, ठगी की रकम को तत्काल होल्ड कराने के साथ पात्र पीड़ितों को धनराशि वापस दिलाने तथा बैंकिंग संस्थानों और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय को लेकर विस्तृत मंथन किया गया।
बैठक में मनी रेस्टोरेशन मॉडल (MRM) और ग्रिवांस रेडरेसाल मैकेनिज्म (GRM) के प्रभावी क्रियान्वयन को प्रमुखता से लिया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों और बैंकिंग संस्थानों को निर्देश दिए कि साइबर ठगी के मामलों में केवल रकम को होल्ड या लियन करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जांच एवं निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र पीड़ितों को धनराशि की वास्तविक और शीघ्र वापसी सुनिश्चित की जाए। बैठक में गृह सचिव शैलेश बगोली, पुलिस महानिरीक्षक साइबर नीलेश आनंद भरने, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक STF अजय सिंह, भारतीय रिजर्व बैंक देहरादून के क्षेत्रीय निदेशक एवं कार्यालय प्रमुख हर्ष कुमार गौतम सहित विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
1930 पर शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई के निर्देश
बैठक में पुलिस अधीक्षक साइबर शान्तनु पाराशर ने साइबर वित्तीय अपराधों की मौजूदा स्थिति, MRM एवं GRM की प्रगति, लंबित मामलों, पीड़ितों को धनराशि की वापसी तथा बैंकिंग संस्थानों की भूमिका को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि 1930 साइबर हेल्पलाइन और National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) पर साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित शिकायत प्राप्त होते ही त्वरित कार्रवाई की जाए। समय पर कार्रवाई से ठगी की रकम को आगे अन्य खातों में ट्रांसफर होने से रोका जा सकता है और पीड़ित की आर्थिक क्षति को कम किया जा सकता है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायत से लेकर रकम होल्ड कराने और पात्र पीड़ित को वापस दिलाने तक की पूरी प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया जाए।
म्यूल खातों और संदिग्ध बैंक खातों पर विशेष नजर
साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले म्यूल अकाउंट यानी ऐसे बैंक खातों, जिनका उपयोग ठगी की रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है, की पहचान और निगरानी को लेकर भी बैठक में विशेष निर्देश दिए गए। इसके साथ ही संदिग्ध बैंक खातों, असामान्य लेन-देन, ATM और चेक के माध्यम से रकम निकालने वाले हॉटस्पॉट की पहचान कर प्रभावी कार्रवाई करने को कहा गया। संदिग्ध लेन-देन से जुड़े KYC दस्तावेज, CCTV फुटेज और ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड को समय रहते सुरक्षित रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEA) के साथ साझा करने पर भी जोर दिया गया।
बैंक, RBI और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय जरूरी
मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराधों का स्वरूप लगातार बदल रहा है और अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर कुछ ही समय में ठगी की रकम को कई खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। ऐसे में पुलिस, बैंकिंग संस्थानों, RBI और संबंधित विभागों के बीच त्वरित सूचना साझा करना और तत्काल कार्रवाई बेहद जरूरी है। बैठक में सक्षम नोडल अधिकारियों की व्यवस्था को मजबूत करने के साथ 24×7 सहायता एवं त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया, ताकि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत पर संबंधित एजेंसियों के बीच किसी प्रकार की देरी न हो।
जन-जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर
बैठक में 1930 हेल्पलाइन, NCRP, MRM और GRM की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने आमजन से अपील की कि साइबर ठगी का शिकार होने पर घबराने या देर करने के बजाय तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज करें, क्योंकि शुरुआती समय में की गई शिकायत ठगी की रकम को होल्ड कराने और उसे आगे ट्रांसफर होने से रोकने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री के अपराध मुक्त एवं सुरक्षित उत्तराखंड के विजन के अनुरूप साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सभी संबंधित विभागों और संस्थानों को संयुक्त, समन्वित और परिणामोन्मुख कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में तय किया गया कि साइबर ठगी की रकम की शीघ्र वापसी, म्यूल एवं संदिग्ध खातों की पहचान, ATM/चेक निकासी हॉटस्पॉट पर कार्रवाई, बैंकिंग संस्थानों के साथ समन्वय तथा जन-जागरूकता के लिए संबंधित एजेंसियां आपसी तालमेल से समयबद्ध कार्रवाई करेंगी।